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कानपुर. पांच दिवसीस बिठूर महोत्सव के अवसर पर बॉलीबुड के साथ ही कवि और कव्वालों ने नाना की नगरी को अपने स्वरों से खुशनुमा बना दिया है। देररात कव्वाल मुस्तफा नाज ने ‘चढ़ता सूरज धीरे- धीरे ढल जाएगा’.. और‘ झूम बराबर झूम शराबी’... आज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर ली, यह बगावत मैंने कर ली... सुनाकर बिठूर को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं अनामिका अंबर ने ‘मैं तेरे नाम हो जाऊं तू मेरे नाम हो जाए मैं तेरा दाम हो जाऊं तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है मुझे, बनूं मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए’ सुनाया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़हट से गूंज उठा।
कव्वालों और कवियों ने बांधी समां
बिठूर महोत्सव का शुभारंभ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था। बॉलीबुड की गायिका अनुराधा पौड़वाल ने पहले बेहतरीन भक्ति गीत के साथ ही फिल्मी तराने सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। देररात कवियों और कव्वालों ने खूब समां बांधी। जैसे ही वहीं मुस्तफा नाज ने ‘मयखाने में यही रोज हुआ करता है, पीने वाला तो समुंदर की दुआ करता है’... इस शायरी सुनाया तो लोग अपनी कुर्सियों से खड़े होकर तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया।
जब कव्वाल अपनी सुरों की खुशबू बिखेर रहे थे तभी दर्शक उन्हें सुनने के लिए खड़े हो और अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान विधायकों के साथ उनके सहयोगियों की ऐसी भीड़ रही कि अधिकारियों को बैठने की जगह नहीं मिली। वीआईपी लोगों के लिए मंच के आगे की दो लाइनें रिजर्व की गई थी। इसमें लगभग दो सौ लोगों के बैठने का इंतजाम था लेकिन शुक्रवार को इतनी भीड़ हुई कि यह जगह नाकाफी साबित हुई।
1857 क्रांति की यादें कर दीं ताजा
बिठूर महोत्सव में कवियों के शानदार काव्य पाठ ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद ’कानपुर जब तक महि शेष शीश पर है, है उदाहरण तरुणाई का, बलिदान रहेगा सदा अमर मर्दानी लक्ष्मीबाई का’... वीरांगना झांसी की रानी पर यह पंक्तियां सुनाकर लखनऊ की कवियित्री कविता तिवारी ने 1857 क्रांति की यादें ताजा कर दीं। शुक्रवार को बिठूर महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में कई शहरों से आए कवियों ने एक से एक शानदार काव्यपाठ कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने ‘किसी गीता से न कुरआन से अता होती है, न बादशाहों की दौलत से अता होती है, रहमतें बरसतीं हैं उन्हीं लोगों पर जिनके दामन में बुजुर्गों की दुआ होती है’ सुनाया तो हाल तालियों से गूंज उठा। अनामिका अंबर ने ‘मैं तेरे नाम हो जाऊं तू मेरे नाम हो जाए मैं तेरा दाम हो जाऊं तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है मुझे, बनूं मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए’ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लेकिन दिग्विजय नहीं होना चाहिए
मध्य प्रदेश से आए शशिकांत यादव ‘देवास’ ने ‘रामायण का वाचन करते और सुनते गुरुवाणी हैं, हिंदु मुस्लिम बाद में हैं हम पहले हिंदुस्तानी है’... सुनाकर हिंदू - मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कांग्रेस नेता पर तंज कसते हुए कहा कि जीवन में विजयी होना चाहिए लेकिन दिग्विजय नहीं होना चाहिए। सहारनपुर के राजेंद्र राजन ने ‘दिलों में जिनके लगती है, वो आंखों से नहीं रोते जो अपने के नहीं होते किसी के भी नहीं होते’ सुनाया। ‘मैं तेरे नाम हो जाऊं तू मेरे नाम हो जाए मैं तेरा दाम हो जाऊं तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है मुझे, बनूं मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए’ ये मशहूर लाइने कवयित्री अनामकि अंबर की हैं। इन लाइनों को सुनने के बाद आपको गंगा की लहरों को छूकर आ रही हवाओं की ताजगी महसूस होगी।
Published on:
23 Dec 2017 04:57 pm
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