
कानपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नाटक विधानसभा चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। समाजवादी पार्टी और बसपा के संभावित गठबंधन को भांपते हुए उन्होंने सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को आदेश दिए थे कि 14 से लेकर 5 मई तक प्रदेश के 20 हजार दलित बाहूल्य गांवों में जाकर चौपाल लगाएं। इसी के बाद योगी सरकार और भाजपा संकठन के पदाधिकारियों ने अपने कदम गांवों की तरफ बढ़ा लिए। यूपी में करीब 41 सौ गांवों में तो कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलों के करीब पांच सौ गांवों में मंत्री व जनप्रतिनिधियों ने रात गुजारी। ग्रामीणों की समस्याएं सुनी तो अपनी कहानी भी उनके समक्ष शेयर की। राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर अनूप सिंह कहते हैं कि लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा तक गैर जाटव व गैर यादव वोट बड़े पैमाने में भाजपा की ओर आ गया था। जिसका नतीजा रहा कि क्षत्रपों की यहां जबरदस्त हार उठानी पड़ी। 10 लोकसभा में से 9 तो 52 विधानसभा सीटों में 47 पर कमल खिला था।
14 से 5 मई तक चला अभियान
दलितों के घर भोजन और गांव में ही रात भर ठहरने का बीजेपी नेताओं का अभियान अब ख़त्म हो गया। अब न तो नेता दलित के संग दाल रोटी खाएंगे, और न ही रात किसी दलित के यहां रूकेंगे। बीजेपी ने 14 अप्रैल से 5 मई तक ग्राम स्वराज अभियान चलाया था। अब इसका रिपोर्ट कार्ड बन रहा है। पार्टी ने इसमें क्या खोया और क्या पाया? इस पर होम वर्क शुरू हो गया है। किस नेता ने बाज़ी मारी और कौन फिसड्डी रहा, सबका ब्यौरा तैयार हो रहा है। बीस दिनों तक बीजेपी नेताओं ने दलितों के घर आंगन के चक्कर लगाए। सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई नेताओं ने दलितों के यहां भोजन किया। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या घाटमपुर में तो सतीश महाना ने महाराजपुर में चौपाल लगाई। साथ ही सात 17 जिलों के 47 विधायक व 5 उपविजेता प्रत्याशी भी गांवों में जाकर समस्साएं सुनी।
41 सौ गांवों में पहुंची बीजपी
पार्टी का दावा है कि यूपी में 4100 सौ तो कानपुर‘-बुदेलखंड में करीब पांच सौ दलित गांवों तक बीजेपी गई और नेताओं ने वहीं चौपाल लगाई और रात भर रूके भी। क्षेत्र के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने बताया कि हमारे परीक्षेत्र के सभी दलित बाहूल्य गांवों भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, संगठन के पदाधिकारी, विस्तारक पहुंचे। इस अभियान से पार्टी को बहुत बड़ी सफलता मिली है। अब पार्टी इन्हीं गांवों के युवाओं को संगठन में जगह देगी और 2019 के लिए चुनाव के मैदान में उतार देगी। मानवेंद्र सिंह ने बताया कि भाजपा कभी जातिगत राजनीति में विश्वास नहीं रखती, लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस लोगों को जाति -धर्म के नाम पर बांटकर अपनी सियासत चमकाते आ रहे हैं। इसी के कारण भाजपा जनता के पास गई और पीएम मोदी और सीएम योगी की योजनाओं की जानकारी उन तक पहुंचाई।
सबसे पहले सीएम ने लगाई थी चौपाल
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले प्रतापगढ़ में एक दलित परिवार के संग दाल रोटी खाई।दो दिनों बाद अमरोहा में उन्होंने चौपाल लगाई. इस दौरान योगी को ज़मीन पर हुए सरकारी काम काज का पता चला तो उन्होंने कुछ अफ़सरों को सस्पेंड किया तो कई का ट्रांसफ़र कर दिया। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कानपुर में दलितों का दरवाज़ा खटखटाया। वहीं पार्टी के यूपी अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडे ने काशी और अयोध्या में दलित चौपाल लगाई। अब बीजेपी ऑफ़िस में एक-एक नेता की रिपोर्ट कार्ड बन रही है. पूरा लेखा-जोखा दिल्ली ऑफ़िस को भेजा जाएगा. इसके बाद कुछ नेताओं की क्लास लगेगी तो कुछ को ईनाम भी मिल सकता है।अगले महीने की शुरूआत तक योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकते हैं। दलितों को जोड़ने में पार्टी कामयाब रही या नहीं ? इसकी पूरी फ़ाईल तैयार की जा रही है।लोकसभा चुनाव की तैयारी में ये जानकारी बड़ी काम की होगी।
संगठन में दलितों की इंट्री
सपा-बसपा के वोट बैंक के बड़े हिस्से को अपनी तरफ खींचकर ही भाजपा ने लोकसभा और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है। इसको बरकरार रखने के लिए भाजपा जिला इकाइयों में जल्द ही बड़ा फेरबदल करने जा रही है। पदाधिकारियों में पिछड़ों और दलितों की संख्या बढ़ाए जाने की तैयारी की जा रही है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में कुल 17 जिले आते हैं। इन सभी इकाइयों में कितने दलित और पिछड़े महत्वपूर्ण पदों पर हैं, पिछले दिनों इसकी लिस्ट तैयार की गई थी। वर्तमान राजनीतिक माहौल को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने तय किया है कि संगठन में दलितों और पिछड़ों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। प्रदेश स्तर पर पूरी तैयारी हो चुकी है, किसी भी दिन नए पदाधिकारियों की सूची जारी हो सकती है। जिला इकाइयों में किन दलितों और पिछड़ों को रखा जाना है, इसके लिए पिछले दिनों पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हर जिले की समीक्षा के लिए भेजा था।
Published on:
08 May 2018 02:39 pm
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