
जब प्राथमिक विद्यालय पहुंचा ये IAS अधिकारी, खुद चाक उठाकर लिया एग्जाम, फिर जो हुआ दंग रह गए सभी
कानपुर. शिक्षा व्यवस्था को परखने के लिए कानपुर के सीडीओ अरूण कुमार (आईएएस) पिछले कई दिनों से सरकारी स्कलों का भ्रमण कर रहे हैं। सांसद मुरली मनोहर जोशी के गोद लिए गांव से शुरू हुआ निरीक्षण अभियान बुधवार को घाटमपुर तहसील तक पहुंच गया। यहां सीडीओ अरुण कुमार ने धरमपुरवा, इर्टरा, बनी, राजगोपालपुर और डबरापुर गांव जाकर सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को परखा। इस दौरान डबरापुर में सीडीओ ने बच्चों से बोर्ड पर एबीसीडी के साथ ककहरा लिखने को कहा, लेकिन एक भी छात्र ठीक से उत्तर नहीं दे सका। सीडीओ ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका से प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया लिखने को कहा। कपकपाते हाथों से उन्होंने भी ब्लैक बोर्ड पर एजूकेशन का सफेद झूठ लिख दिया। सीडीओ ने खंड शिक्षा अधिकारी को जमकर लताड़ा और टीचर को प्रतिकूल प्रविष्ट के साथ सहायक अध्यापिका का वेतन रोकने का आदेश दिया।
ककहरा तक नहीं लिख पाए टीचर-छात्र
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरुण कुमार ने बुधवार को पांच प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया। यहां बच्चों की उपस्थिति 90 फीसदी के ऊपर पाई गई। इस दौरान सीडीओ ने सभी स्कूलों के बच्चों से प्रश्न किए, कहीं ठीक जवाब मिला तो कहीं गलत। इर्टरा में कक्षा पांचवी के छात्र ने अपना व अपने पिता का नाम नहीं लिख पाया तो बनी में कक्षा चार की छात्रा गिनती के दस शब्द नहीं सुना सकी। सबसे ज्यादा हालत डबरापुर स्कूल में दिखी, यहां बच्चों के साथ टीचर ने सरकारी ब्लैकबोर्ड पर सफेद झूठ लिख दिया। सीडीओ अरूण कुमार ने टीचर से कई सवाल दागे और प्रतिकुल प्रविष्ट थमा दी। इस पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को चेतावनी के साथ एक सहायक अध्यापिका का वेतन रोकने के आदेश दिए।
जमीन पर बैठे मिले नौनिहाल, तो थमाया नोटिस
निरीक्षण के दौरान राजगोपालपुर स्कूलं में बच्चे सर्दी में जमीन पर बैठे थे। इस पर सीडीओ ने प्रधानाचार्य से जवाब मांगा तो उन्होंने फंड नहीं आने की बात कहकर अपना दामन छुड़ा लिया। सीडीओ ने खंड शिक्षा अधिकारी से इस पर सवाब मांग तो वह भी बगले झांकते मिले। सीडीओ ने तत्काल सभी सरकारी स्कूलों में कुर्सी व मेजों की व्यवस्था कराए जाने के निर्देश दिए। यहां पर 113 पंजीकृत बच्चों में 100 हाजिर थे। प्रधानाध्यापिका अनुपस्थित थीं। अध्यापकों के नाम का बोर्ड स्कूल के बाहर लगा होने पर खंड शिक्षा अधिकारी को चेतावनी दी गई। कक्षा तीन की गुंजन किताब नहीं पढ़ पाई। पिता का नाम नहीं लिख पाई। गैरहाजिर सहायक अध्यापिका का वेतन रोकने के आदेश किए। सीडीओ ने बताया कि पांचों स्कूलों में पढ़ाई का स्तर असंतोष जनक पाया गया जिसके चलते खड शिक्षा अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
हम सरकारी स्कूल से पढ़कर आईएएस बने
अरूण कुमार ने बताया कि एक दशक पहले सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई होती थी, लेकिन एकाएक यहां शिक्षा की गुणवत्ता में खराबी आ गई। पिता जी ने हमारा एडमीशन प्राथमिक स्कूल में कराया। क्लास बारवीं तक हम सरकारी स्कूल में पढ़े और इसी के चलते आईएएस की परीक्षा क्वालीफाई कर पाए। आज भी जिन टीचरों ने हमें शिक्षा दी उनकी हिन्दी का तोड़ किसी के पास नहीं है। वह हिन्दी के साथ ही फर्राटेदार अंग्र्रजी भी बोलते हैं। सरकारी स्कूलों की शिक्षा बेहतर वो इसके लिए हमसब को मिलकर काम करना होगा। बेहतर टीचरों को यहां पदस्थ करने के साथ जो तैनात हैं उनकी ट्रेनिंग देनी की सख्त आवश्यकता है।
Published on:
28 Dec 2017 10:46 am
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