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आईआईटी बना जहर का सबसे बड़ा खरीदार, स्टूडेंट्स ले रहे खुलेआम चरस-गांजा

आईआईटी बना जहर का सबसे बड़ा खरीदार, खुलेआम ले रहे चरस-गांजा

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कानपुर. देश के नामी संस्थान IIT आईआईटी में डीएम के छापे के बाद बदनुमा दाग लग गया। यहां पर बड़े पैमाने पर स्टूडेंट्स गांजा, चरस, स्मैक ड्रग्स और कोकीन का बड़े पैमाने में इस्तमाल करते थे। लड़कों के साथ ही लड़कियों को भी इसकी लत पड़ चुकी थी। आईआईटी प्रशासन को मामले की भनक थी, लेकिन वो आंख बंद किए हुए।

खतरनाक जहर का कारोबार करने वाले माफिया इसे संस्थान के अंदर बिना रोक-टोक के पहुंचा रहे थे। इनका साथ यहीं के चतुर्थश्रेणी के कर्मचारी भी देते थे। डीएम सूरेंद्र सिंह के एक्शन में आने के बाद यहां के अफसर जागे और पुलिस से मदद की गुहार लगाई। निदेशक निदेशक मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि आईआईटी प्रशासन को खबर लगी थी कि हास्टल के तमाम छात्र ड्रग्स ले रहे हैं। हमने प्रोफेसरों के जरिए गुप्त तरीके से इसकी जांच कराई तो 25 ऐसे छात्र सामने आए जो ड्रग्स के आदी हैं। इन्हें चिह्नित किया गया है। प्रशासन को और तमाम छात्रों के बारे में जानकारी मिली है, जो ड्रग्स और प्रतिबंधित दवाओं को सेवन करते हैं।

ऐसे हुआ खुलासा


कल्याणपुर पुलिस ने तीन माह पहले आईआईटी के निजी सुरक्षाकर्मी को संदेह के आधार पर अरेस्ट किया था। पुलिस ने जब तलाशी ली तो बड़े पैमाने पर उसके पास से गांजा बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान उसने गांजे की सप्लाई आईआईटी कैम्पस में करने की बात बताई थी। पुलिस ने सुरक्षाकर्मी को जेल भेज दिया और आईआईटी पर नजर अड़ा दी।

पुलिस ने इस दौरान कई स्टूडेंट्स को दुकानों में शाम के वक्त सुर्ती, सिगरेट, बीयर और शराब का नशा करते पाया। पुलिस ने उन्हें हिदायद देकर छोड़ दिया और इसकी रिपोर्ट डीएम के पास भेज दी। डीएम सूरेंद्र सिंह को जब इसकी जानकारी हुई तो वो आईआईटी पहुंच गए और निदेशक को तलब कर इस पर उनसे बातचीत की।

यहां निदेशक ने माना कि कुछ स्टूडेंट्स् मादक पदार्थ का सेवन करते हैं, जिन्हें चिन्हित किया गया है और उन पर कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने निदेशक को निर्देश दिए कि संस्थान के अंदर कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं करें। साथ ही वहां से सभी 24 धोबियों को बाहर कर दिया गया। शाम के वक्त संस्थान के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई।

नानकानी से पहुंचाया जाता है मादक पदार्थ

आईआईटी के छात्रों को नशे का सामान लेने के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक छात्रों को सुर्ती से लेकर चरस, गांजा और स्मैक हास्टलों और गेट बाहर स्थित चायपान की दुकानों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। आईआईटी से सटे मिश्रित आबादी वाले मुहल्ले के कुछ लोग भी छात्रों को ड्रग्स की सप्लाई करते हैं।

पुलिस को सूचना यह भी है कि आईआईटी में तैनात कुछ निजी सिक्योरटी गार्ड और चुतर्थ श्रेणी कर्मचारी भी छात्रों को ड्रग्स पहुंचाते हैं। आईआईटी में ड्रग्स सप्लाई करने वालों का सुरक्षित रास्ता है नानकारी मुहल्ला है। वहां से लोग बैग और जेब में ड्रग्स लेकर आईआईटी परिसर और हास्टलों में घुस जाते हैं और छात्रों को ड्रग्स सप्लाई कर उसी रास्ते से बाहर निकल जाते हैं।

सूत्रों की माने तो चाय की दुकानों के साथ ही आस-पास इलाकों में दर्जनों की संख्या में खुले मैगी प्वाइंट, चाय-पान की दुकानें, रेस्टोरेंट, कल्याणपुर और बिठूर रोड के तमाम रेस्टोरेंट भी इस धंधे में लिप्त हैं।

पुलिस की रिपोर्ट के बाद प्रशासन हरकत में आया

आईआईटी कानपुर में पुलिस व अन्य सरकारी एजेंसियों को कैंम्पस के अंदर आने से पहले निदेशक से अनुमति लेनी होती है। कल्याणपुर पुलिस को जब इसकी जानकारी हुई तो चाय की दुकानों पर स्टूडेंट्स सिगरेट में मादक पदार्थ का सेवन करते हुए पाया। पुलिस ने स्टूडेंट्स को हिदायद देकर छोड़ दिया। लेकिन कारोबार से जुड़े लोगों पर नजर अड़ा दी। आईआईटी के एक सुरक्षाकर्मी को गांजे के साथ गिरफ्तार किया था।

आरोपी ने पूछताछ के दौरान कैम्पस के अंदर गांजा पहुंचाने का बात कबूली थी। पुलिस ने भी आईआईटी प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी और इसी के बाद निदेशक ने प्रोफेसरों की एक टीम बनाकर इसका सेवन करने वाले और बेचने वालो ंपर नजर रखने को कहा था। आईआईटी प्रशासन ने 25 स्टूडेंट्स को मादक पदार्थ का सेवन करते हुए पाया। आईआईटी प्रशासन बदनामी से बचने के लिए चुपचाप इन पर कार्रवाई कर रहा था, लेकिन जिला प्रशासन तक बात पहुंचने के बाद वो बैकफुट में आया।