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बीएसपी की हार पर हुआ बड़ा खुलासा, इसलिए यहां मिल रही लगातार शिकस्त, मायावती खुद हैं जिम्मेदार

2007 में प्रदेश की बागडोर जनता ने मायावती के हाथों में दे दी...

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Connection between Panki Hanuman Mandir and Mayawati UP news

बीएसपी की हार पर हुआ बड़ा खुलासा, इसलिए यहां मिल रही लगातार शिकस्त, मायावती खुद हैं जिम्मेदार

कानपुर. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। समाजवादियों के आतंक से जनता त्रस्त थी, इसी के चलते 2007 में प्रदेश की बागडोर मायावती के हाथों में दे दी। सीएम पद की शपथ लेते ही मायावती ने ऐतिहासिक पनकी हनुमानमंदिर की रखवाली कर रहे हाथी को वन विभाग के अफसरों के जरिए जबरन उठवा लिया और उसे जहरीला इंजेक्शन देकर मौत के घाट उतार दिया गया। विरोध में मंदिर के महंत जीतेंद्र दास सहित सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन-प्रशासन के पास जाकर गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं। फलस्वरूप मंदिर के महंत ने पूजा-अर्चना के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती को श्राप दिया था कि जब तक उनका हाथी वापस नहीं देंगी, तब तक कानपुर से बीएसपी कभी नहीं जीतेगी। श्राप का नतीजा रहा कि 2007 के बाद जितने चुनाव हुए शहर से बसपा का खाता नहीं खुला। महंत ने बताया कि गोरखपुर के महंत को जैसे ही सीएम बनाया गया वैसे ही उन्होंने हमसे कहा था कि जिस दिन हम हाथी की व्यवस्था कर लेंगे, उस दिन उस दिन मंदिर आएंगे और भगवान बजरंगबली के दर्शन करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि मंदिर की पुरानी धरोहर को सीएम वापस करेंगे और लोकसभा 2019 में पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनवाएंगे।

पनकी हनुमान मंदिर का इतिहास

मंदिर के महंत जीतेंद्र दास बताते हैं कि मंदिर करीब 400 बरस पुराना है। इसकी स्थापना श्रीश्री1008 महंत परषोतम दास जी ने की थी। कहते हैं, कानपुर शहर की स्थापना से पहले पनकी का हनुमान मंदिर स्थापित हो चुका था। बताया, महंत जी एक बार चित्रकूट से लौट रहे थे, तब जिस स्थान पर पनकी का मंदिर है, वहां पर उन्हें एक इस तरह की चट्टान दिखी जिस पर बजरंग बलि को देखा जा सकता था। बस, उन्होंने तब ही उस स्थान पर मंदिर का निर्माण करने का फैसला किया। उन्होंने भव्य मंदिर की आधारशिला रखी, जहां हर मंगलवार और शनिवार को सैकड़ों की संख्या में भक्त आते हैं और प्रभु श्रीराम भक्त हनुमान के दर पर हाजिरी लगाकर मन्नतें मांगते हैं। महंत ने बताया कि श्रीश्री1008 महंत परषोतम दास जी ने उसी वक्त मंदिर की रखवाली के लिए हाथी जोड़े भी रखे थे, जो 2007 तक मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों के आकर्षण का केंद्र थे।

चुनाव चिन्ह के चलते गजराज को ले गए

महंत ने बताया कि 2007 का चुनाव जीतने के बाद सूबे की बागडोर मायावती ने संभाली। बसपा के कार्यकर्ताओं ने पनकी मंदिर परिसर पर हाथी होने की जानकारी उन तक पहुंचा दी। मायावती ने तत्यकालीन वन विभाग के अधिकारी बीआर अहिरवार को मंदिर भेजकर हाथी को उठाए जाने का आदेश दिया था। बीआर अहिरवार पुलिसबल के साथ मंदिर पहुंचे और हमारी आंख के सामने गजराज को जबरन उठा ले गए। हम लोगों ने विरोध किया तो पुलिस के जरिए खामोश करा दिया गया। महंत का आरोप है कि वन विभाग के अफसर बीआर अहिरवार ने मंदिर के गजराज को जहरीला इंजेक्शन देकर मार डाला और शव को दफनवा दिया। हमने इसकी शिकायत पुलिस, प्रशासन और खुद मायावती से की, पर उल्टा मुकदमा दर्ज करा जेल भेजने की हमें धमकी दी गई। इसके बाद हम कोर्ट चले गए, जहां अभी भी मामला चल रहा है।

सीएम योगी ने हाथी देने का किया है वादा

महंत ने बताया कि जब सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के सांसद थे, तब वह कई बार पमकी हनुमान मंदिर आए और प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमान के दर्शन किए। सीएम बनने के बाद पहली बार वह कानपुर के भौंती स्थित एक प्राईवेठ इंजीनियरिंग कॉलेज आए थे। उन्होंने हमें मिलने के लिए बुलवाया था। हम उनसे मिलने के लिए गए और बजरंगबली के दर्शन करने का कहा। जिस पर उन्होंने कहा था कि महंत जी जब तक हम मंदिर के लिए हाथी नहीं दे देते, तब तक वहां कदम नहीं रख सकते। जल्द ही हाथी लेकर प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमान के दर पर आएंगे और पूजा-अर्चना करेंगे। व्यस्थता के चलते उन्हें समय नहीं मिला, बावजूद हमें विश्वास है कि एक महंत की मांग दूसरा महंत जरूर पूरा करेगा। गोरखपुर की हार पर जीतेंद्र दास ने कहा कि मायावती कभी भी सत्ता का सुख नहीं पाएंगी। वह चाहे जिस दल से गठबंधन कर लें, पर प्रदेश की बागडोर कभी उन्हें नसीब नहीं होगी।