
कानपुर। देश में आज भी सैकड़ों गांव ऐसे हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसबदहाली के पीछे के कारण है छोटी संसद के सांसद। जो चुनाव जीतने के बाद गांव के विकास के बजाए अपने घर को चमकाने में लग जाते हैं, पर इटावा जिले के सैफई गांव की तस्वीर मुम्बई की तर्ज पर दिखती है। हर सुविधा इस गांव में मौजूद है जो बड़े-बड़े मेट्रो शहरों में देखने को नहीं मिलगी। लेकिन सैफई को वीवीआईपी ग्रामपंचायत बनाने के पीछे मुलायम सिंह यादव के मित्र दर्शन सिंह का अहम योगदान है। कम पढ़े लिखे होने के बावजूद वह सरकारी बाबुओं पर कड़ी नजर रखते हैं और गांव के विकास के लिए आए पैसे का हिसाब उनसे लेते हैं। मुलायम सिंह देश-प्रदेश के किसी भी इंसान से ज्यादा भरोसा दर्शन सिंह पर करते हैं और जब भी परेशान होते हैं तो उनसे सलाह लेने के लिए खुद गांव पहुंच जाते हैं और दोनों एक कमरे के अंदर कई-कई घंटे गप्पे मारते रहते हैं। मुलायम सिंह अपने मित्र की इमानदारी के इतने कायल है कि उन्हें अजीवन सैफई की सत्ता सौंप दी। दर्शन सिंह पिछले 46 सालों से यहां से निर्विरोध प्रधान चुनते आ रहे हैं जब तक जिएंगे तब तक वो प्रधान रहेंगे।
मुलायम को नाम लेकर पुकारते हैं दर्शन सिंह
मुलायम सिंह को यादवलैंड में एक ही व्यक्ति है जो सीधे नाम लेकर पुकारता है और गलती करने पर उन्हें फटकार लगाता है। वह और कोई नहीं बल्कि सैफई ग्राम पंचायत के प्रधान व मुलायम के बचपन के मित्र दर्शन सिंह है। दर्शन सिंह पिछले 46 सान से सैफई के निर्विरोध सरंपच बनते आ रहे हैं। दर्शन सिंह ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत सदस्यों के नाम की मुहर लगा मुलायम सिंह के पास भिजवाते हैं और उनकी रजामंदी के वह सभी लोग भी निर्विरोध निर्वाचित होते हैं। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में इसे एक रिकॉर्ड के तौर पर देखा जा रहा है। दर्शन सिंह अपने मित्र के सियासी सफर को रफ्तार देने के लिए गांव में बैठकर रणनीति बनाते रहते हैं। सपा से जुड़े लोगों का कहना है कि मुलायम, शिवपाल, रामगोपाल और अखिलेश के साथ ही पूरा परिवार दर्शन सिंह की रिसपेक्ट करता है। चाचा भजीते के बीच चल रही रार को होली के दौरान दर्शन सिंह ने खत्म कराया था। अखिलेश को प्यार से समझाया तो शिवपाल को भी साइकिल को दुरूस्त करने के लिए लगाया था।
कौन हैं दर्शन सिंह यादव
दर्शन सिंह का जन्म इटावा जिले के सैफई गांव में 1940 को हुआ था। दर्शन सिंह और सपा सरंक्षक मुलायम सिंह बचपन के दास्त हैं। मुलायम सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो उनके कंधे से कंधा मिलाकर दर्शन सिंह चले। लोहिया आंदोलन के दौरान 15 साल की उम्र में मुलायम सिंह सियासत में कूद पड़े। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया और फर्रूखाबाद जेल में बंद कर दिया। इसकी भनक जैसे ही दर्शन को हुई तो उन्होंने जेल के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। जिसके चलते जिला प्रशासन को मुलायम सिंह को रिहा करना पड़ा। साल 1967 के चुनाव में दर्शन सिंह यादव मुलायम सिंह के साथ साइकिल पर चुनाव प्रचार करते थे और घूम-घूमकर चंदा मांगते थे। सैफई में कोई भी त्योहार हो, मुलायम सिंह यादव दर्शन सिंह को अपने बगल में ही बिठाया करते हैं। सपा परिवार में चले विवाद को सुलझाने में दर्शन सिंह का अहम रोल रहा है। वह पिछले डेढ़ साल से अखिलेश यादव , शिवपाल यादव और प्रोफेसर रामगोपाल के टच में रहे और तीनों के बीच बनीं दुरियों को कम किया।
1972 से गांव के सरंपच
दर्शन सिंह यादव साल 1972 से ही सैफई के प्रधान चुने जा रहे हैं। पहले प्रधानी के चुनाव नियमित समय पर नहीं होते थे, इसलिए 1972 के बाद 1982, 1988 और 1995 में जब ग्राम प्रधानों के चुनाव कराए गए, तब दर्शन सिंह यादव ही प्रधान बने। 1995 से पांच वर्ष के नियमित अंतराल पर चुनाव कराए जा रहे हैं। तब से दर्शन सिंह को ही ग्राम प्रधान चुना जा रहा है। गांव के फूलसिंह यादव कहते हैं कि दर्शन सिंह यादव लंबे समय से इस गांव के निर्विरोध प्रधान हैं। और बताया, वो जब तक जीवित रहेंगे तब तक निर्विरोध बनते रहेंगे, क्योंकि इस संबंध में नेताजी ने गांव में चौपाल के जरिए लोगों से शपथ पत्र लेकर दर्शन सिंह को सैफई सौंप दी है। फूलसिंह यादव बताते हैं कि आज भी दर्शन सिंह साधारण लोगों की तरह रहते हैं और शाम को चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। दर्शन सिंह पर आज तक एक भी अरोप नहीं लगा। हर समाज और वर्ग की मदद के लिए वो 24 घंटे खड़े रहते हैं। ं दर्शन सिंह और पिछले दिनों उन्हें यश भारती पुरस्कार भी दिया गया था। मुलायम सिंह के परिवार में वो एक सम्मानित बुज़ुर्ग की हैसियत रखते है।
सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि
क़रीब चार हज़ार की आबादी वाले इस गांव की ख़ासियत ये है कि जितने जन प्रतिनिधि इस सम इस गांव में हैं उतने शायद ही दुनिया के किसी और गांव में होगे। वहीं मुलायम सिंह के परिवार का शायद ही कोई ऐसा सदस्य हो जो उम्र की अर्हता पूरी करता हो और ’जनप्रतिनिधि’ न हो। यह राजनीतिक परिवार इतना अब इतना बड़ा हो गया है कि सभी की महत्वाकांक्षाएं जोर मारने लगी हैं और नतीजा परिवार में गुटबाज़ी और विवाद खुलकर सड़क पर आ गया है। पिछले दो साल से यादव परिवार के भीतर दो गुटों में जिस तरह से शह और मात का खेल चला प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में चर्चा का विषय बना रहा। सरपंच दर्शन सिंह यादव ने कहा, ‘मुलायम सिंह के परिवार में कोई रार नहीं है, बल्कि कुछ मतभेद थे, जिन्हें दूर कर लिया गया है। शिवपाल यादव अपने बड़े भाई के खिलाफ कभी कदम नहीं उठा सकते हैं और अखिलेश भी अपने चाचा को कभी सियासत से बेदखल करने की सोच नहीं सकते।
Published on:
10 May 2018 04:51 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
