
कानपुर। योगी सरकार प्रदेश की 22 करोड़ की जनता को बेतहर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराए जाने का दावा आएदिन करती रहती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर गरीबों का ठीक से इलाज नहीं करते तो मरीज के तीमारदार जमीन, जेवरात गिरवीं रख कर प्राईवेट अस्पतालों में जाने को विवश हो रहे हैं, पर वहां के धरती के भगवान पैसे के आगे इंसानियत को शर्मसार कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला रायपुरवा थानाक्षेत्र स्थित न्यू सेवा धाम हॉस्पिटल में सामने आया है। यहां के डॉक्टरों ने प्रेग्नेंट महिला की डिलेवरी के दौरान उसका ऑपरेशन किया और पेट के अंदर स्पंज को छोड़ टाके लगा दिए। दो दिन के बाद महिला की छुट्टी कर दी गई, पर घर जाते ही वह दर्द से कराहने लगी। परिजन उसे लेकर फिर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने इंजेक्शन देकर दर्द कम कर दिया। आठ माह तक डॉक्टर महिला का इलाज करते रहे, पर उसे राहत मिली। तब पति ने पत्नी को दूसरे डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां दर्द के राज से पर्दा उठा। अल्टासाउंड में महिला के पेट में स्पंज पाया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर स्पंज बाहर निकाला। पीड़ित पक्ष ने मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पेट में छोड़ा स्पंज का टुकड़ा
गांधी नगर सीसामऊ के रहने वाले वकील दीपक बाजपेई की पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी अगस्त 2017 को हुई थी। उनकी पत्नी की यह सर्जरी रायपुरवा स्थित न्यू सेवा धाम हॉस्पिटल डॉक्टर श्वेता यादव ने की थी। दो दिन बाद उनकी पत्नी शालिनी को घर भेज दिया गया। कुछ दिनों बाद शालिनी के पेट में दर्द उठा। उन्होंने डॉ. श्वेता से संपर्क किया तो उन्होंने दर्द की दवाइयां देकर उन्हें घर भेज दिया। इधर उनकी पत्नी को दर्द में कोई राहत नहीं मिली तो उन्होंने उन्हें दूसरे अस्पताल में दिखाया। यहां डॉक्टरों ने शालिनी के पेट का अल्ट्रासाउंड किया तो उन्हें पता चला कि उनके पेट में स्पंज का टुकड़ा है। दीपक ने बताया कि वह रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास शिकायत करने पहुंचे तो वहां मौजूद डॉ. जेएस सचान और डॉ. श्वेता ने उन्हें वहां से भगा दिया। उन्होंने शालिनी की आर्य नगर के एक दूसरे प्राइवेट अस्पाल में सर्जरी कराई। सर्जरी के बाद शालिनी के पेट से स्पंज का टुकड़ा निकाला गया।
240 दिन तक इलाज के नाम पर ठगी
दीपक ने बताया कि डॉक्टर श्वेता उनकी पत्नी के पेट दर्द का वास्तिव कारण नहीं जान सकीं। उनकी पत्नी ने खाना-पीना छोड़ दिया। वह कमजोर होती चली गईं। पूरे 240 दिन तक मैं अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल के चक्कर काटता रहा। डॉक्टर से मर्ज पूछता तो सही उत्तर नहीं मिलता। मैंने अल्ट्रासाउंड कराए जाने को कहा तो डॉक्टर स्वेता मान गईं। उन्होंने अपने हॉस्पिटल में पत्नी के पेट का अल्ट्रासांड किया और जांच रिपोर्ट में बताया कि लीवर में सूजन है और एक दो माह में दवा के जरिए ठीक कर दी जाएगी। उन्होंने हमें रिपोर्ट तक नहीं दी। पत्नी की हालत नाजुक होने पर मैंने दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया और उन्हें दिखाया तो डॉक्टर स्वेता की पोल खुलकर सामने आ गई। पीड़ित पक्ष ने डॉक्टर श्वेता यादव के खिलाफ आईपीसी की 269/506 धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
डॉक्टर ने कहा आरोप निराधार
वहीं मामले पर डॉक्टर स्वता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वकील के सारे आरोप निराधार हैं। हमने उनका पूरा ट्रीटमेंट किया। डिलेवरी के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य थे। वहीं मामले पर इंसपेक्टर रायपुरवा का कहना है कि वकील की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस जांच कर रही है और आरोप सही पाए जाने पर डॉक्टर को अरेस्ट कर जेल भेजा जाएगा। पीड़िता के पति ने बताया कि पत्नी के इलाज के लिए मैंने हमना घर और जेवरात गिरवीं रख दिए। डॉक्टर से कईबार गुहार लगाई कि अगर आप ठीक नहीं कर सकती तो पत्नी को दूसरे अस्पताल रेफर कर दीजिए। लेकिन डर के चलते वह हमें गुमराह करती रहीं।
Published on:
09 Apr 2018 09:23 pm
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