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पीएम मोदी के चलते सपना हुआ साकार, अख्तर जहां को हज जाने का मिला मौका

फिर क्या था जहां के आंख से खुशी के आंसू टपकने लगे।

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Due to PM dreams

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कानपुर. पति की मौत के बाद पटकापुर निवासी अख्तर जहां का हज जाने का सपना टूट गया। उन्होंने पिछले तीन साल से सउदीअरब जाने के लिए आवेदन किया, लेकिन महरम (वह मर्द जिनसे पर्दा न हो) ने अड़ंगा अटका दिया। पर मोदी सरकार की नई नियमापली की जब खबर अख्तर जहां को हुई तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो बासमंडी स्थित लगे हज आवेदन कैंप पर जाकर हज जाने के लिए आवेदन करने पहुंची तो कर्मचारियों ने नया नियम का पर्चा उन्हें थमा दिया। जिसमें हज जाने के लिए कम से कम चार महिलाओं का होना जरूरी है और चारों एक-दूसरे को जानती व पहचानती न हो। जहां के चेहरे पर मायूसी छा गई, तभी वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि तीन महिलाओं ने आवेदन पहले से ही किया हुआ है और चौथी अख्तर जहां हैं, जो बिना मर्द के हज जाना चाहती हैं। फिर क्या था जहां के आंख से खुशी के आंसू टपकने लगे। जहां ने कहा कि पीएम मोदी के चलते वो हज जा रही हैं। हम उनके हर निर्णय के साथ है और वो महिलाओं को पुरूषों के बराबर का दर्जा दिलाने के लिए लगे हैं।
पति की मौत के बाद टूट गया था सपना
पटकापुर निवासी अख्तर जहां ने बताया कि तीन बार से हज के लिए आवेदन कर रही थीं। उनके पति महबूब अली का इंतकाल चार साल पहले हो चुका है। इसलिए महरम रिश्तेदार के साथ हज जाने की खुशामद कर रही थीं लेकिन लॉटरी में नाम ही नहीं आ रहा था। इस बार उनकी बेटी शबाना ने सुना कि अकेले हज पर जा सकती हैं तो आवेदन करने चली गईं। वहां तीन अन्य महिलाओं का भी साथ मिल गया। वे कहती हैं कि 15 सालों से हज करने के लिए रुपये जुटा रही थीं। अब अल्लाहताला ने मौका भी दे दिया है। उन्हें यह नहीं मालूम कि कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता तो सऊदी अरब हुकूमत इस तरह के हज यात्रियों और आवेदन को स्वीकार क्यों करती। हम मोदी सरकार का तहेदिल से सुक्रिया अदा करती हैं कि उन्होंन नियमों में बदलाव कर हम जैसे सैकड़ों महिलाओं को हज यात्रा में जाने के दरबाजे खोल दिए हैं।
इसके चलते नहीं जा पा रही थीं हज
परमपुरवा की रहने वाली महरुन निशा के पति की मौत के बाद उनका हज जाने का सपना टूट गया। महरून बताती हैं कि पांच साल पहले हम अपने पति मजीद अली के साथ हज जाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन हमारा पासपोर्ट समय से नहीं बन पाया। इसी के चलते पति अकेले हज करने के लिए चले गए। पति हज कर आए और तीन माह के बाद उनकी मौत हो गई। महरुन निशा कहती हैं कि पति के निधन के बाद हज जाने का दरबाजे हमारे लिए पूरी तरह से बंद हो गए थे, लेकिन मोदी सरकार के नए नियम की जानकारी जब हमारे बेटे रईस को हुई तो वो हमें लेकर बांसमंडी पहुंचा और हज के लिए आवेदन करवाया। महरुन निशा ने बताया कि चार महिलाओं का समूह बन गया है। अब चयन लॉटरी से होना है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अल्लाहताला उन्हें मौका देंगे।
मसर्रत जहां और शमीम बानो ने किया आवेदन
बांसमंडी हज आवेदन कैंप में बाबूपुरवा निवासी मसर्रत जहां और दादामियां की रहने वालीं शमीम बानो ने भी हज जाने के लिए आवेदन किया है। बांसमंडी स्थित मौजूद कर्मचारी लियाकत अली ने बताया कि कानपुर से अभी तक सिर्फ चार महिलाओं ने ही आवेदन किया है। इनका नाम हज जाने वाली सूची में लिख दिया गया है। अगर चार से अधिक महिलाएं आवेदन करती हैं तो उनका दूसरा ग्रुप बनाया जाएगा। महरम के बिना हज जाने के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए एक नियम है कि वो आपस में एक-दूसरे को पहचानती न हो, साथ ही रिश्तेदार न हो। भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से हज नियमावली में बदलाव कर बिना महरम (वह मर्द जिनसे पर्दा न हो) के महिलाओं को हज पर जाने की अनुमति मिल गई है। इससे उन महिलाओं को जिनके पति का निधन हो गया है, या अकेले रहती हैं हज जा सकती हैं। सरकार की ये पहल सराहनीय है।