
कानपुर . याद कीजिए, बीते बरस प्रदेश के तमाम पेट्रोल पंप पर ईंधन की घटतौली और मिलावटी पेट्रोल-डीजल बेचने का खुलासा हुआ था। कुछ पेट्रोल पंप सील हुए तो कुछ जुगाड़ से बच गए। दागियों की फेहरिस्त में तमाम ऐसे पेट्रोल पंप भी शामिल थे, जोकि अपने-अपने इलाके में अच्छी सुविधाएं देने के लिए पहचाने जाते थे। बहरहाल, इस खुलासे के बाद यह यकीन करना मुश्किल हो गया है कि ईंधन के धंधे में कोई ईमानदार है और बेईमान। अब यह संशय दूर होगा। दरअसल, आईआईटी-कानपुर के मैकेनिकल विभाग के छात्रों ने ऐसी डिवाइस बनाई है, जोकि किसी भी पेट्रोल पंप पर घटतौली को तुरंत पकड़ लेगी। इस डिवाइस की मदद से मिलावटी ईंधन की जानकारी भी तुरंत मिलेगी। फिलहाल इस डिवाइस की कीमत है करीब 2000 रुपए, लेकिन आईआईटी का दावा है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा तो लागत मूल्य सिर्फ 500 रुपए आएगा।
वाहन के टैंक में फ्यूल क्वांटिफायर एडवांस डिवाइस को लगाना होगा
कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के मैकेनिकल विभाग के पीएचडी छात्रों के इस आविष्कार को नाम दिया गया है फ्यूल क्वांटिफायर एडवांस डिवाइस। मैकेनिकल विभाग के प्रो. नचिकेता तिवारी की देखरेख में पीएचडी के छात्र माधवराव लोंधे और महेंद्र कुमार गोहिल ने इस डिवाइस को तैयार किया है। खास किस्म की इस डिवाइस को कार-बाइक अथवा किसी अन्य वाहन के ईंधन टैंक में फिट कराना होगा। यह डिवाइस फ्यूल टैंक के ऊपरी हिस्से में लगेगी, ताकि पेट्रोल-डीजल पंप मशीन का नोजल इसी डिवाइस के अंदर से होते हुए टंकी में जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक डिवाइस में कई सेंसर लगे है। सबसे पहले तेल मैगनेटिक रोटर में जाता है। इसमें काफी संख्या में निगेटिव और पॉजिटिव ब्लेड होते हैं। ब्लेड के घूमते ही तेल के फ्लो की रीडिंग माइक्रो प्रोसेसर यूनिट में दर्ज होने लगती है। डिवाइस को कोन की आकार में बनाया गया है, ताकि किसी भी वाहन के ऑयल टैंक में आसानी से फिट किया जा सके। डिवाइस के सर्किट को ब्लू टूथ डिवाइस या फिर वाई-फाई से जोडऩा भी मुमकिन है। ऐसे में डिवास की रीडिंग कुछ ही सेंकेंड में मोबाइल स्क्रीन पर दिखने लगेगी। इसके अतिरिक्त एक अन्य स्क्रीन वाहन के डैश-बोर्ड पर भी होगी। प्रो. नचिकेता तिवारी ने बताया कि इस डिवाइस की मदद से महज 10 सेकेंड में तेल की वास्तविक मात्रा पता चल जाएगी। आविष्कार करने वाले छात्रों ने बताया कि डिवाइस प्रति सेकेंड यूनिट के हिसाब से ईंधन की माप करती है। ऐसे में नोजल से ईंधन को तेजी से डाला जाए अथवा धीरे-धीरे, डिवाइस की रीडिंग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
फिलहाल कीमत 2000 रुपए, जल्द 500 में उपलब्ध होगी
आइआइटी के छात्रों को इस डिवाइस को बनाने में फिलहाल 2000 रुपए खर्च करने पड़े हैं। संस्थान ने इस आविष्कार को पेटेंट करा लिया है। अब बाजार में उपलब्ध कराने के किसी कंपनियों से बात जारी है। बताया गया है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा तो सिर्फ 500 रुपए में यह डिवाइस बाजार में मुहैया होगी। प्रोफेसर नचिकेता तिवारी ने दावा किया कि इस डिवाइस को अपग्रेड करने का काम जारी है, ताकि घटतौली के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल में मिलावट की पड़ताल भी मुमकिन रहे। नई डिवाइस को भी लैब में परख लिया गया है और पेटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है। दावा है कि डिवाइस की मदद से रीडिंग एकदम सही आती है, लेकिन सेंसर में गड़बड़ी होने पर कुछ अंतर संभव है। अलबत्ता यह अंतर 1000 एमएल में 5 एमएल से ज्यादा नहीं होगा।
स्टार्टअप की तैयारी, गुरुग्राम की कंपनी से जारी है बातचीत
आईआईटी की टीम डिवाइस की मदद से स्टार्टअप की तैयारी में जुटी है। कंपनी खोलने की प्लानिंग है। गुरुग्राम की नामचीन कार कंपनी से बातचीत भी जारी है। कंपनी ने डिवाइस का सर्वे भी कराया है।
Published on:
11 May 2018 09:58 am
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