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दस दिन तक धर्ममय रहा कानपुर, गंगा-जमुनी तहजीब की बही बयार

कानपुर में लोगों ने पेश की मिशाल, मिल जुलकर बनाया गणेश उत्सव और मोहर्रम का पर्व

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कानपुर। दस दिन तक देशभर में गणेश महोत्सव की बयार बही, तो वहीं मुहर्रम से शहर धर्ममय रहा। 10 दिन तक चला उत्सव रविवार की शाम गणेश विजर्सन के बाद थमा। पर इस दौरान कानपुर के कई इलाकों में गंगा-जमुनी की अद्भुत तहजीब देखने को मिली। जूही लक्ष्मणपुरवा मोहल्ले में हिन्दू और मुस्लिम धर्म के लोग अगल-बगल में गणेश पूजा और मोहर्रम मनाया। सबसे खास बात यह है कि जब हिन्दू वर्ग के लोग पूजा करते थे तब मुस्लिम समुदाय के लोग उसमें शामिल होकर अपने साउंड को बंद कर देते थे। इसी तरह से जब मुस्लिम धर्म के लोग मोहर्रम की दुआ, फातिया करते, तो हिन्दू धर्म के लोग अपना लाउडस्पीकर व भक्ति संगीत बन्द कर देते थे। गणेश विजर्सन के दिन सैकड़ों मुस्लिम भाई अपने-अपने घरों से निकले और गणपति बप्पा मोरैया, असले बरस तू जल्दी आ के नारे लगा रहे थे। लोगों का कहना है कि राजेनता चाहे जितने प्रयास कर लें, पर हम एक थे और एक ही रहेंगे।

सांप्रदायिक सौहार्द की बना मिसाल
गणेश महोत्सव और मुहर्रम का माह एक साथ पड़ने के चलते शासन-प्रशासन के लिए कौमी एकता बनाए रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। कुछ अराजकतत्वों ने महौन खराब करने की कोशिश भी की, लेकिन अमन-पंसद लोगों के सामने उसकी रणनीति पूरी तरह से फेल हो गई। शहर में सैकड़ों पंडालों में भगवान गणेश की जयकारे की गूंज सुनाई दी तो मुहर्रम पर धूम-धाम के साथ ताजिए भी निकले और सभी धर्मो के लोगों ने भाग लेकर एक अनोखी मिशाल पेश की। लेकिन सबसे अद्भुत नजारा जुही स्थित लक्ष्मणपुरवा मोहल्ले में देखने को मिला। यहां पर भगवान गणपति का पंडाल और हजरत फुलवारी शाह का ताजिया बिल्कुल आमने सामने था। अस्ताने के सामने इमाम चौक का यह नजारा सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना।

लोगों ने बढ़ाए नेकी के हाथ
दोनों समुदाय के लोगों ने यहां अपने अपने पर्व को शांति और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाया। जब गणपति की आरती होती तो उस वक्त मस्जिद की लाउडस्पीकर को बंद कर दिया जाता था। जब आरती खत्म हुई तो नोहाख्वानी शुर कर दीजाती थी, जिसमें सभी लोग शरीक होते थे। शुक्रवार को मोहर्रम के दौरान ताजिया में हिंदू भाईयों ने बड़चड़ का हिस्सा लिया। रिहाना कहती हैं कि यहां हिन्दू-मुस्लिम समाज के लोग मिलकर एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। गणेश पूजन का आयोजन हमारे क्षेत्र पिछले कई दशकों से मनाया जा रहा है। दोनों समुदाय के लोग चंदा कर पैसे जमा करते हैं और भगवान गणेश की भव्य मूर्ति लाकर पंडाल में विराजमान कराते हैं।

विजर्सन में दिखी अनोखी झलख
गणेश विसर्जन के अवसर पर मोहल्ले का हर इंसान ढोल नगाढ़े की ध्ुन में थिरकता नजर आया। यहां न तो कोई हिन्दू था और न ही मुसलमान, सभी इंसान दिखे। नरेंद्र पाण्डेय कहते हैं कि पहले अंग्रेजों ने हमें आपस में लड़वा कर राज किया। गोरे तो चले गए पर उनकी चाल को देश के राजनेताओं ने अपनी सियासत को चमकाने के लिए आजमाने लगे। पर अब लोग उनकी चाल को समझ चुके हैं और आपसी भाईचारा बनाए रखनें के लिए आगे आए हैं। पांडेय ने बताया कि पिछले पंद्रह सालों से सभी धर्मो के लोग गणेश महोत्सव से लेकर विजर्सन तक भगवान गणपति बप्पा की अराधना करते हैं और आपसी भाईचारा बना रहे इसके लिए बप्पा से मन्नत भी मांगते हैं।

रामवनमी के दिन हुई थी हिंसा
पिछले साल इसी इलाके में रामनवमी के दिन कुछ अराजकतत्वों ने संप्रदायिक महौल खराब करने की कोशिश की थी। जिसके चलते दोनों समुदायों के बीच जमकर बवाल के साथ आगजनी भी हुई थी। तभी दोनों धर्मो के लोग बाहर आए और उपद्रवियों के मंसूबों में पानी फेर दिया। राशिद बताते हैं कि कुछ बाहरी लोग हमारे मोहल्ले में आ गए और लोगों को भड़का दिया। जिसके चलते पत्थरबाजी शुरू हो गई और वो बड़ी हिंसा में बदल गई। राशिद कहते हैं कि तब रमेश शुक्ला, पांडेय जी समेत दर्जनों लोग गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने के लिए आगे आए और फिर से सभी के दिल एक हो गए। पांडेय ने बताया कि मोहल्ले के लोगों ने बैठक कर तय किया कि अब अपने इलाके को बचाने के लिए हम खुद आगे आएंगे और अराजकत्वों के मंसूबों को फेल करेंगे।