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खाकी के कंधे से उतरकर इतिहास में दफन होगी दूसरे विश्वयुद्ध की एनफील्ड रायफल

20वी शताब्दी के शुरुआती 50 साल में ली-एनफील्ड रायफल ही ब्रिटिश आर्मी की ताकत थी। वर्ष 1888 में ईजाद हुई ली-एनफील्ड रायफल को ब्रिटिश आर्मी ने वर्ष 1895 में सेना में शामिल किया

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lee infield rifle

खाकी के कंधे से उतरकर इतिहास में दफन होगी दूसरे विश्वयुद्ध की एनफील्ड रायफल

कानपुर. छह महीने और, इसके बाद दूसरे विश्वयुद्ध में जलवा दिखाने वाली ली-एनफील्ड रायफल इतिहास बन जाएंगी। यूपी पुलिस ने ली-एनफील्ड राइफल को अपने शस्त्रागार से विदा करने का फैसला किया है। सिपाहियों के कंधे पर भारी-भरकम रायफल के बजाय स्वदेसी छोटी-हल्की इंसास रायफल होगी। यूपी पुलिस मुख्यालय ने कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री को बड़े पैमाने पर रायफल बनाने का आर्डर दिया है। फिलवक्त, देश में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, बीएसएफ के अलावा जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और असम स्वदेसी रायफल का इस्तेमाल करती हैं।


ली-एनफील्ड रायफल में जैमिंग और लोडिंग की दिक्कत

दरअसल, ली-एनफील्ड रायफल में जैमिंगे और प्रत्येक फायर के बाद लोड करने की समस्या है। इस दिक्कत के कारण अपराधियों से मुठभेड़ के समय पुलिस कमजोर पड़ती रही है। गौरतलब है कि यूपी के कुख्यात अपराधियों के पास स्वचालित और आधुनिक असलहों का जखीरा है। ऐसे में यूपी पुलिस ने ली-एनफील्ड रायफल के विकल्प पर गौर किया तो स्वदेसी इंसास की खरीद का फैसला हुआ। इस बारे में अपर पुलिस महानिदेशक (लोजिस्टिक) कल्लूरी एसपी कुमार कहते हैं कि ली-एनफील्ड राइफल्स ऐतिहासिक अवशेष हैं, बावजूद विभिन्न प्रदेशों की पुलिस के ऑपरेशन में हैं, लेकिन जैमिंग और लोडिंग की समस्या के कारण छह महीने में चरणबद्ध तरीके से शस्त्रागार से बाहर किया जाएगा।


सीतापुर रखी जाएंगी पुरानी रायफल, कानपुर से मिलेंगी इंसास

पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, सभी जिलों से क्रमबद्ध तरीके से पुरानी ली-एनफील्ड रायफल मंगाकर सीतापुर के केंद्रीय शस्त्रागार में रखी जाएंगी, जबकि इंसास का आवंटन कानपुर से होगा। एएसपी (लोजिस्टिक) सुशील शुक्ला ने बताया कि ली-एनफील्ड राइफल को प्रत्येक फायर के बाद बोल्ट (लोड) करना पड़ता है, जबकि इंसास से एक साथ कई राउंड फायर करना मुमकिन है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ और सीआरपीएफ की तरह हथियारों के लिए कमेटी नहीं होने के कारण इंसास को यूपी पुलिस के शस्त्रागार में पहले शामिल करना संभव नहीं था। दो महीने पहले हथियार विशेषज्ञ आशीष राठौर को परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया गया है। आशीष पहले बीएसएफ के साथ थे और अब पुलिस आधुनिकीकरण से जुड़े हैं।


ब्रिटिश फौज की ताकत थी ली-एनफील्ड रायफल

20वी शताब्दी के शुरुआती 50 साल में ली-एनफील्ड रायफल ही ब्रिटिश आर्मी की ताकत थी। वर्ष 1888 में ईजाद हुई ली-एनफील्ड रायफल को ब्रिटिश आर्मी ने वर्ष 1895 में सेना में शामिल किया, जोकि 1957 तक कायम रहा। इस रायफल में .303 बोर के दस कारतूस की मैगजीन लोड होती है। खास बात यह है कि पड़ोसी बांग्लादेश की आर्मी अभी तक ली-एनफील्ड रायफल पर भरोसा करती है, जबकि कनाडा की पुलिस भी इसी के भरोसे है।


भारतीय सेना ने 2017 में इंसास का साथ छोड़ा

कारगिल युद्ध में इंसास रायफल के दम पर भारतीय फौज ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी, अलबत्ता बदलते दौर में सेना ने 2017 में इंसास रायफल को हटाकर एके सीरिज की रायफल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। रायफल और लाइट मशीनगन को मिलाकर बनाई गई इंसास रायफल 400 मीटर तक मार करने में सक्षम है। इस रायफल में एक मैगजीन में 30 कारतूस लोड होते हैं।