
कानपुर. प्रोफेसर एचसी वर्मा...किसी पहचान के मोहताज नहीं... न जाने कितने लाख छात्र इनकी किताबें पढ़कर आज बड़े-बड़े वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर बन चुके हैं। तकनीक के दौर में भी उनकी किताबें मौजू हैं...शायद ही कोई छात्र हो जो एचसी वर्मा की कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स के बारे में न जानता हो। कहा जाता है कि ये किताब दुनिया भर में पढ़ी जाती है। इसके जरिए प्रो. वर्मा को हर साल करोड़ों की रॉयल्टी मिलती है। इसे वह प्रधानमंत्री फंड व दूसरे सोशल कॉज़ में दान कर देते हैं। आईआईटी कानपुर से रिटायरमेंट के बाद भी प्रो.वर्मा शिक्षा जगत से जुड़े हैं और पार्ट टाइम क्लासेज लेने जाते रहते हैं।
अमेरिका से आया प्रोफेसर बनने का न्योता
कहा जाता है कि प्रो. वर्मा को अमेरिका में प्रोफेसर बनकर पढ़ने का ऑफर भी आया लेकिन इन्होने उसको अस्वीकार कर दिया। इन्होंने अपने जड़ को नहीं भुला और 1980 में पटना साइंस कलेज में प्रोफेसर के रूप में ज्वाइन किया। साइंस कॉलेज में बच्चों को पढ़ते हुए इन्होंने देखा की बच्चे भौतिक विज्ञान की पढाई का आनंद नहीं ले रहे है बल्कि पढ़- पढ़ कर ऊब रहे हैं। जितना एक्सपेरिमेंट H C VERMA ने अपने पढाई के दिनों में फिजिक्स के किताबों (फिक्स्डमेंटल ऑफ़ फिजिक्स रेस्निक और हॉलिडे, जिन्होंने उन्हें एम.एस.सी. के दौरान पढ़ा था) के साथ किया था उतना एक्सपेरिमेंट तेज विद्यार्थी भी नहीं कर रहे थे। भाषा की समस्या भी उन छात्रों के आड़े आ रही थी।
ऐसे लिखी कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स
इन समस्याओं को दूर करने के लिए एचसी वर्मा ने एक किताब लिखने की सोची जो भाषा के इस कठिनाई को आसान कर सके। इसके लिए उन्होंने 8 साल तक कठिन परिश्रम किया और फल स्वरूप लोगों के बीच आया कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स (Concepts of Physics) यह पुस्तक भौतिक विज्ञानं की सुन्दरता की उजागर करने में सफल रही। इस पुस्तक की सफलता का कारण था इसकी सरल भाषा, दिलचस्प संख्यात्मक उदाहरण और भारतीय संस्कृति के साथ सम्बन्ध। यह पुस्तक आईआईटी-जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) की तैयारी के लगभग सभी छात्रों द्वारा उपयोग की जाती है।
पिता भी थे शिक्षक
प्रो.वर्मा का जन्म बिहार राज्य के दरभंगा जिले में हुआ था। एचसी वर्मा बचपन में वे पढने में तेज नहीं थे। उनके पिताजी शिक्षक थे। प्रारम्भ में गणित और विज्ञान की शिक्षा उनके पिताजी ने ही दी। स्कूल के दिनों में इन्हे विज्ञान और गणित में ज्यादा रूचि नहीं थी। स्नातक करने के लि एउनका का दाखिला पटना पटना साइंस कॉलेज में हुआ |स्नातक कम्पलीट करने के बाद H C VERMA ने GATE की परीक्षा निकाली और IIT KANPUR से MSC के लिए दाखिला लिया। आईआईटी कानपुर में एचसी वर्मा ने सभी लडको में टॉप किया और 10.0 में से 9.9 GPA हासिल किया | उसके बाद उन्होंने IIT KANPUR से ही डॉक्टरेट की पढाई की और तीन वर्षो से भी कम समय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
फिजिक्स को कर दिया आसान
फिजिक्स की पढ़ाई आसान बनाने के लिए आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक प्रो. एचसी वर्मा ने घरेलू, दैनिक जीवन में प्रयोग आने वाले 300 क्लास रूम एक्सपेरिमेंट बनाए हैं। इनकी मदद से फिजिक्स पढ़ना-लिखना-समझना आसान हो जाएगा। ये एक्सपेरिमेंट बेलन, चमटा, कल्छुल, गिलास सहित तमाम घरेलू सामान से बनाए गए हैं, जो मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, माडर्न साइंस के उदाहरण को सरल बनाने में कारगर साबित हुए हैं।
माने जाते हैं फिजिक्स की दुनिया के भगवान
उनके बारे में लोग कहते है की है प्रोफेसर फिजिक्स में इतना खोए रहते थे कि क्लास में लुंगी ही पहन कर पढ़ाने चले आते थे | उनकी हाथो में कोई किताब नहीं , साधारण कपडे और चेहरे पर मोटे लेंस का चश्मा होता था। उनके बारे में लोग यहाँ तक कहते है की 2000 के दशक में दो ही भगवान माने जाते थे एक क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर और फिजिक्स की दुनिया में प्रोफेसर एचसी वर्मा।
Published on:
13 Apr 2018 02:46 pm
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