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रोबोट बनेंगे कुली, सिर्फ मालिक को सौंपेगा सामान

आईआईटी में छात्रों ने तैयार किया 40 हजार रुपए का रोबोट

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IIT kanpur

रोबोट बनेंगे कुली, सिर्फ मालिक को सौंपेगा सामान

कानपुर. कुछ बरस और, फिर रेलवे स्टेशनों पर कुलियों का सिंडिकेट गुजरे दिन की बात होगा। आईआईटी - कानपुर की हैकाथान 2018 प्रतियोगिता में नायाब किस्म का रोबोट ईजाद किया गया है। यह रोबोट रेलवे स्टेशनों पर सूटकेट, बीफ्रकेस और लगेज बैग लेकर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जाएगा। खास बात यह कि रोबोट कुली को सामान और प्लेटफार्म बताने के बाद आपको निगरानी करने की जरूरत नहीं होगी। रोबोट चेहरे के स्कैन करने के बाद उसी व्यक्ति को सामान सौपेंगा, जोकि सामान बुक करते समय सामने था। अभी रोबोट कुली को और विकसित करने की दिशा में काम जारी है। कोशिश है कि सामान बुकिंग के समय रोबोट एक डिवाइस देगा। जीपीएस से कनेक्ट इस डिवाइस के जरिए रोबोट सामान लेकर उसी स्थान पर पहुंच जाएगा, जहां डिवाइस लेकर व्यक्ति खड़ा होगा।


पहाड़ों पर पर्यटकों के लिए पोर्टर का काम करेगा

आईआईटी - कानपुर में हैकाथान-2018 प्रतियोगिता में छात्रों ने नायाब किस्म के रोबोट और एयरोनोटिक्स मॉडल बनाए हैं। इन्हीं मॉडलों में कुली रोबोट सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। फिलहाल, इस रोबोट की लागत अभी 50 हजार रुपए है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाए तो कीमत करीब 30 हजार रुपए आएगी। शुक्रवार को छात्रों ने रोबोट कुली का सफल परीक्षण भी किया। व्हील और चेन के कारण किसी भी स्थान पर पहुंचने में सक्षम कुली रोबोट पहाड़ी इलाकों में भी चल सकता है। शोधकर्ता छात्रों का दावा है कि इस खूबी के कारण यह रोबोट रेलवे स्टेशनों के अलावा पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों के सामान को ढोने के लिए पोर्टर का काम भी करेगा।


डिवाइस के जरिए बुकिंग करने वाले को पहचानेगा

फिलहाल, कुली रोबोट को संचालित करने के लिए ऑपरेटर को अपनी पीठ पर एक सेंसर बांधना होगा। इसी सेंसर से रोबोट को कमांड मिलेगी, यानी वह व्यक्ति जिधर घूमेगा, रोबोट भी उसी दिशा में घूम जाएगा। कुली रोबोट बनाने वाले छात्रों का दल अभी अपने मॉडल को अपग्रेड करने में जुटे हैं। कोशिश है कि रोबोट को संचालित करने वाला व्यक्ति एक ही स्थान पर बैठा रहे। बुकिंग करने वाले व्यक्ति के चेहरे को रोबोट स्कैन करेगा। इसके बाद बुकिंग करने वाले व्यक्ति को इस डिवाइस मुहैया कराई जाएगी। डिवाइस लेकर व्यक्ति जिधर जाएगा, रोबोट उसी दिशा में पहुंच जाएगा। स्टेशन पर भीड़ होने के बावजूद रोबोट डिवाइस तक पहुंचने के बाद चेहरा स्कैन करेगा। अब बुकिंग करने वाला व्यक्ति जैसे ही भुगतान करेगा, रोबोट डिवाइस वापस लेकर सामान छोड़ देगा।


ड्रोन की शक्ल वाला एयरोप्लेन क्रैश नहीं होगा

हैकाथान में शामिल आईआईटी-मद्रास के छात्रों का दल ड्रोन को एयरोप्लेन जैसा रूप देने में कामयाब हुआ है। यह ड्रोन एयरोप्लेन 100 किलोमीटर तक रास्ता तय कर सकता है। गौरतलब है कि अभी तक जिस ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है, उसकी स्पीड कम है और उसके क्रैश होने की संभावना अधिक रहती है। एयरोप्लेन मॉडल के ड्रोन में क्रैश होने की संभावना बिल्कुल नहीं है। ड्रोन बनाने वाली टीम में मद्रास आईआईटी के एयरोस्पेस में बीटेक कर रहे छात्र चित्रांश, अविनाश,ऐश्वर्या, कृष्णा और राहुल शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि पहाड़ों, नदियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए यह ड्रोन बेहद उपयोगी होगा। देश के सैनिकों को पहाड़ों के बारे में इस ड्रोन से काफी जानकारी मिल सकती है।

मूक बधिर को पढ़ाएगा रोबोट

एक अन्य टीम के छात्रों ने रोबोट का ऐसा मॉडल तैयार किया है कि जो मूक बधिर लोगों के लिए लाभकारी है। रोबोट के रूप में दो कृत्रिम हाथ होंगे जिसे मोबाइल एप के जरिए जोडक़र मूक-बधिर लोगों को पढ़ाएगा। इस रोबोट के संचालन के लिए सिर्फ लोगों को बोलना होगा। रोबोट बोली को संबंधित भाषाओं में अनुवाद करके मूक बधिर लोगों को इशारे से पढ़ा सकता है।