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निजी अस्पतालों के थे ऐसे हालात, अफसरों के निरीक्षण में कलई खुलकर आई सामने, छूट गया पसीना

जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के औचक छापेमारी के दौरान निजी अस्पतालों में चल रहे कारनामे की कलई खुलकर सामने आई।

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niji aspatal

निजी अस्पतालों के थे ऐसे हालात, अफसरों के निरीक्षण में कलई खुलकर आई सामने, हो गए हैरान

कानपुर देहात-जननी सुरक्षा को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। आये दिन निजी अस्पतालों में लापरवाही से होने वाली जच्चा बच्चा की मौतों को लेकर प्रशासन ने चाबुक चलाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में विभागीय अफसरों सहित प्रशासन ने कानपुर देहात के अकबरपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध हास्पिटल में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने औचक छापेमारी अभियान शुरू किया। इस दौरान निजी अस्पतालों में चल रहे कारनामे की कलई खुलकर सामने आई। दरअसल नगर के तीन निजी अस्पतालों में निरीक्षण के दौरान एक भी डॉक्टर व प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिला। इससे खफा हुए उपजिलाधिकारी ने दो लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। फिलहाल इस निरीक्षण के बाद निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल लंबे अरसे से इन घटनाओं के चलते जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर उपजिलाधिकारी अकबरपुर आनंद कुमार सिंह, व डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा ने अकबरपुर के निजी अस्पतालों में छापेमारी की। सबसे पहले माती रोड टेलीफोन एक्सचेंज के समीप स्थित न्यू रमा शिव हास्पिटल में चेकिंग हुई। यहां पर दस बेडों पर पांच मरीज भर्ती मिले और अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। जबकि नर्सिग कार्य देख रही रनियां निवासी वंदना पाल व मोहम्मदपुर की प्रमिला यादव प्रशिक्षित होने का कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सकीं। इसी दौरान अस्पताल पहुंचे संचालक रतन कुमार निवासी गिरदौं भोगनीपुर भी एसडीएम को डॉक्टर व नर्सिग स्टाफ न होने के बावत संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद एसडीएम ने कोतवाली रोड स्थित राधा-कृष्ण हास्पिटल में छापेमारी की।

छापेमारी में कोई भी डॉक्टर व कर्मी मौजूद नहीं मिला। कथित अस्पताल कर्मी रामकेश द्वारा अस्पताल संचालक के बावत कोई जानकारी नहीं दी गई। इस पर नाराज एसडीएम ने कर्मी को हिरासत में लेकर कोतवाली भेजा। इसके बाद मड़वाई मोड़ स्थित सांई हास्पिटल पहुंचे अधिकारियों को संचालक जितेंद्र सिंह मौके पर मिले। एसडीएम द्वारा डॉक्टर व कर्मियों की मौजूदगी की छानबीन करने पर सिर्फ डॉ. नरेंद्र सिंह मिले। उन्होंने बीएएमएस डिग्री होने की जानकारी दी और वह एलोपैथिक इलाज कर रहे थे। यहां भी एसडीएम ने संचालक जितेंद्र सिंह को हिरासत में लेकर कोतवाली भेजा। एसडीएम ने बताया कि हिरासत में लिए दोनो निजी अस्पताल कर्मियों से दस्तावेज मांगे गए हैं। छानबीन के बाद कार्रवाई की जाएगी।