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Bikru Case News: बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ की बेटी पुलिस विभाग में बनी ओएसडी, कानपुर कमिश्नरी में तैनात

-बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा की बेटी वैष्णवी बनी पुलिस विभाग में ओएसडी-कानपुर कमिश्नरी में वैष्णवी ने संभाला पदभार

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Bikru Case News: बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ की बेटी पुलिस विभाग में बनी ओएसडी, कानपुर कमिश्नरी में तैनाती

Bikru Case News: बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ की बेटी पुलिस विभाग में बनी ओएसडी, कानपुर कमिश्नरी में तैनाती

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. यूपी के बहुचर्चित बिकरू कांड (Bikru Kand) में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा की बेटी वैष्णवी को ओएसडी (OSD) के पद पर तैनात किया गया है। वैष्णवी नीट क्वालीफाई कर चुकी हैं उनका चयन मृतक आश्रित कोटा के तहत विशेष कार्याधिकारी के पद पर किया गया है। दरअसल बिकरू (Bikru Scandal) में हुई घटना में बलिदान हुए यूपी पुलिस के परिवारो के साथ सूबे की सरकार तत्पर है। सरकार बलिदानियों के परिवार में आश्रितों को नौकरी दे रही है। इस प्रक्रिया में मृतक आश्रित कोटा के तहत वैष्णवी ने ओएसडी पद के लिए आवेदन किया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैष्णवी को नियुक्ति मिल गई है। वैष्णवी ने 13 जुलाई को डीजीपी ऑफिस लखनऊ (DGP Office Lucknow) में ज्वाइन किया था। वहां से उनका तबादला कानपुर और फिर कमिश्नरी में कर दिया गया है। उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है।

बिकरु कांड में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्र का परिवार बांदा के महाराणा प्रताप चौक में पुलिस लाइन रोड पर मकान में रहता है। उन्होंने अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा से यूपी पुलिस में सिपाही से लेकर सीओ तक का सफर तय किया। हालांकि उनकी बेटियों की शिक्षा कानपुर में ही पूर्ण हुई। मृतक आश्रित में ओएसडी बनाने के बाद बड़ी बेटी वैष्णवी को खाकी वर्दी देख परिवार के लोगों की आंखे छलक आईं। लोग उनमें देवेंद्र मिश्रा की छवि को देख रहे हैं। वैष्णवी के दो छोटे भाई और एक छोटी बहन है।

वैष्णवी मिश्रा नीट एग्जाम भी क्वालीफाई कर चुकी हैं। जबकि छोटी बेटी वैशाली अभी कानपुर से बीएससी कर रही है। शहीद सीओ के छोटे भाई राजीव मिश्र ने बताया कि भैया की ख्वाहिश थी कि बड़ी बेटी डॉक्टर बने। मगर उनके बलिदान के बाद उनकी बेटी ने उनके ही नक्शे कदम पर आगे बढऩे की ठानी है। उसका चयन विशेष कार्य अधिकारी के पद पर पुलिस विभाग में हुआ है, जिससे हम लोग बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि हर त्यौहार तथा विशेष कार्यक्रमों में भैया परिवार के साथ बांदा आते रहते थे। आज उनकी कमी महसूस हो रही है।