
Ishwarganj
विनोद निगम.
कानपुर. धार्मिक नगरी बिठूर को कभी क्रांतिकारियों की शरणस्थली के नाम से जाना जाता था, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते इसका विकास अटका रहा। लेकिन अब देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दौरे के बाद इसके दिन बहुरने शुरू हो गए हैं। महामहिम स्वच्छता की अलख जगाने के लिए ईश्वरगंज आ रहे हैं। एक साल पहले ये गांव बदहाल था, यहां पर कई सालों से युवक व युवतियों की शादी नहीं हुई थी। तभी गांववालों ने चौपाल लगाकर अपने बल पर गांव को सवांरने का प्रण लिया और आज की तारीख में कानपुर जिले का ईश्वरगंज खुले में शौचमुक्त गांव बन गया है। राष्ट्रपति 15 सितंबर को यहीं पर चौपाल लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन के सपने को साकार करने के लिए प्रधानों को संकल्प दिलाएंगे।
राष्ट्रपति के स्वागत के लिए सज रहा ईश्वरीगंज
राष्ट्रपति बनने के बाद महामहिम राम नाथ कोविंद पहली बार कानपुर आ रहे हैं। शहर आगमन पर उनके स्वागत के लिए तैयारियां तेज़ हो गई है। जिले के पहले ओडीएफ गांव ईश्वरगंज में राष्ट्रपति के आगमन के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। महामहिम राम नाथ कोविंद गांव में 'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। राष्ट्रपति का कार्यक्रम तय होने के बाद ईश्वरगंज गांव अचानक चर्चा में आ गया। राष्ट्रपति भवन से कार्यक्रम जारी होते ही प्रशासनिक अमले ने ईश्वरगंज गांव में डेरा जमा लिया है। पूरे गांव का चेहरा बदलने की कवायद चल रही है। सड़कें नालियां साफ़ की जा रही है, साथ ही घास और झाड़ियां काटी जा रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर बन रहे पांडाल, स्टेज और हैलीपैड की निगरानी के लिए बम गंगाराम के प्रयास से संवरी गांव की तस्वीर ईश्वरगंज गांव सबसे बदहाल श्रेणी में गिना जाता था।
गांव में सड़क, बिजली, पानी, गंदगी, शिक्षा और एजूकेशन के नाम पर कुछ नहीं था। इसी के चलते इस गांव में सैकड़ों की संख्या में युवक कुवांरे बैठे थे। एक साल पहले गांव के गंगाराम ने मुनादी करा लोगों को बाहर एक जगर एकत्र किया। यहीं पर बैठकर गंगाराम ने लोगों को खुद के पैसे से गांव की दक्षा और दिक्षा बदलने के लिए संकल्प दिलाया। गांव का हर किसान, मजदूर, महिला, युवक और युवतियों ने हाथों पर फावड़ा और कुदाल उठाकर गांव को संवारने में जुट गए। हर घर में टॉयलेट बन गए। सड़क और खरंजे का जाल बिछ गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने खुद के पैसे सर्मसेबुल के जरिए पानी की समस्या को दूर कर दिया। इसी के चलते जिला प्रशासन गांव को मदद देने के लिए आगे आया और ये पहला अडीएफ गांव बना।
गांववालों में दिखी खुशी
महामहिम के गांव में आगमन को लेकर ग्रामीणों में ख़ुशी है। उनका कहना है कि उनको राष्ट्रपति के आने से बहुत उम्मीदें हैं। उनके आने से ही गांव काफी विकास होगा। गांव केचंदा देवी, कविता कहती हैं कि राष्ट्रपति के आने से जो गांव में थोड़ी बहुत समस्याएं हैं वो भी दूर हो जाएंगी। कानपुर नगर निगम के नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि महामहिम के आगमन पर एक अपर नगर आयुक्त के निर्देशन में नगर निगम की टीम लगा दी गई है और साफ़ सफाई की पूरी व्यवस्था रखी जाएगी। राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी कर्मभूमि में यह उनका पहला कार्यक्रम भी होगा, हालांकि उनके गांव के लोग थोड़ा निराश हैं। क्योंकि राष्ट्रपति गांव नहीं जाएंगे।
122 गांव ही ओडीएफ-
जिस जिले से राष्ट्रपति अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं, वहां के एक चौथाई गांव भी अब तक अओडीएफ नहीं हो पाए हैं। सरकारी आकड़ों के अनुसार कानपुर के 940 गावों में से केवल 122 गांव ही अब तक ओडीएफ हो पाए हैं। अफसरों का दावा है कि सरकारी मदद से 60 हजार शौचालय बनवाए जा चुके हैं और अभी 90 हजार बनवाए जाने हैं। सीडीओ अरूण कुमार ने बताया कि जिने के सभी गांव दो अक्तूबर तक ओडीएफ कर लिए जाएंगे। सरकार की ओर से गंगा के किनारे बसे शहरों को 31 दिसम्बर तक पूरे जिले को ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया गया है, इस समय में बाकी बचे 90 हजार शौचालय बनवाने हैं।
महामहिम का गांव नहीं हो पाया ओडीएफ-
वैसे तो अफसरों ने उसी दिन से कानपुर देहात के गांव परौंख में दौड़ लगानी शुरू कर दी थी, जिस दिन रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति का चुनाव लड़ाने की घोषणा की गई थी। गांव के विकास की तमाम योजनाएं बन गईं, लेकिन अभी तक एक भी योजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। चार नए नलकूप गांव में खड़े हो गए, लेकिन उनको बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाया। गांव में 700 शौचालय बनाए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 50 के लिए ही आधा पैसा मिल पाया है।
राष्ट्रपति के जिले कानपुर देहात का हाल भी कुछ ऐसा ही है, यहां के 954 गावों में से केवल 14 अब तक ओडीएफ हो पाए हैं और अभी जिले में 1.19 लाख शौचालय बनाए जाने हैं। अफसरों का कहना है कि दो अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य पूरा कर लेंगे।
Published on:
13 Sept 2017 05:27 pm
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