
मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच आईटीबीपी जवान
कानपुर में उस समय हड़कंप मच गया, जब आईटीबीपी का एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। जवान ने आरोप लगाया कि वह 17 मई से लगातार थाने और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। जवान का कहना है कि उसकी मां का हाथ अस्पताल की लापरवाही की वजह से काटना पड़ा। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुट गए हैं।
जवान के मुताबिक उसकी मां को सांस लेने में दिक्कत होने पर 13 मई को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें पारस हॉस्पिटल ले जाया गया। आरोप है कि इलाज के दौरान हाथ में तेजी से इन्फेक्शन फैल गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को 17 मई को हाथ काटना पड़ा।
आईटीबीपी जवान का कहना है कि सिर्फ 24 घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ कि हाथ पूरी तरह खराब हो गया। उसका आरोप है कि शुरुआती इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से संक्रमण बढ़ता गया और आखिरकार हाथ काटना पड़ा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ फ्रीजर में सुरक्षित रखकर अधिकारियों के पास पहुंचा। उसने पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। जवान का कहना है कि उसकी मां की हालत अब स्थिर है, लेकिन परिवार मानसिक रूप से टूट चुका है।
कमिश्नर कार्यालय में जवान को कटे हाथ के साथ देखकर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने तत्काल जांच के निर्देश दिए।
सहायक पुलिस आयुक्त (स्टाफ ऑफिसर) अमरनाथ ने बताया कि आईटीबीपी 32वीं बटालियन के जवान ने अपनी मां के इलाज को लेकर शिकायत की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महिला को पहले आईटीबीपी अस्पताल से रेफर किया गया था। रास्ते में तेज दर्द होने पर उन्हें कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा।
पुलिस के मुताबिक डीसीपी पूर्वी ने पूरे मामले की जांच के लिए सीएमओ कानपुर नगर को पत्र भेजा है। कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल दोनों की भूमिका की जांच कराई जाएगी। साथ ही कटे हुए हाथ की फोरेंसिक जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ कार्यालय के अनुसार जांच के दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड, इलाज की प्रक्रिया, मेडिकल दस्तावेज और डॉक्टरों की भूमिका की बारीकी से जांच की जाएगी। फोरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
19 May 2026 04:18 pm
Published on:
19 May 2026 04:18 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
