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बैंक चोरी में शार्प शूटर का आया नाम, बनारसी के खात्में के लिए एक्शन में पुलिस

यूनियन बैंक लॉकर से सोना पार करने वाले मुख्यआरोपी ने उगले गई राज, तीन राज्यों के बैंक में हाथ कर चुका है साफ

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यूनियन बैंक लॉकर से सोना पार करने वाले मुख्यआरोपी ने उगले गई राज, तीन राज्यों के बैंक में हाथ कर चुका है साफ

कानपुर। उत्तर प्रदेश के मोस्टवांटेड अपराधी व पचास हजार के इनामी बदमाश के खात्में का काउन-डाउन शुरू हो गया है। आईजी आलोक सिंह ने यूनियन बैंक लॉकर से माल पार करने वाले अपराधियों को पकड़ने वाली टीम का शार्प शूटर के दबोचने का काम सौंपा है। 32 लॉकर तोड़ने वाले मास्टरमांडन भानु ने पुलिस की पूछताछ के दौरान बनारसी और भोपाल के आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या करने वाले शरीफ ढपाली से संबंध होने की बात कबूली है। इसी के बाद इन दोनों के अलावा तीन अन्य बदमाशों को धरदबोचने के लिए पुलिस की टीमें लग गई हैं।
कौन है रहीस बनरसी
अनवरगंज के हीरामन का पुरवा से जरायम की दुनिया में पैर रखने वाले रईस सिद्दीकी उर्फ रईस बनारसी को प्रदेश के बड़े क्रिमिनल्स के तौर पर जाना जाता है। भाई की हत्या के बाद बनारस के खालिसपुरा इलाके में अपने ननिहाल में इसने पनाह ली। इस दौरान इसने बनारस ं अपना एक गैंग बना लिया। रईस बनारस तो मोनू पहाड़ी कानपुर में अपने गैरकानूनी कार्यो को अंजाम देते थे। दो साल पहले एसटीएफ ने मोनू पहाड़ी को अरेस्ट कर लिया तो बनरसी बनारस छोड़कर कानुपर आ गया और डी-39 गैंग की कमान संभाल ली। इसी के गैंग में हिस्स्ट्रीशीटर गुलाम नबी भी शामिल हो गया और अवैध वसूली, मर्डर सहित अनेकर गैरकानूनी कार्य करने लगा।
ऐसे पड़ा नाम बनारसी
बनारस में रहने के कारण क्राइम वर्ल्ड में लोगों ने रईस का नाम रईस बनारसी के नाम से जाना। गैंग चलाने के लिए उसने लूट व हत्या के साथ मुंगेर (बिहार) से विदेशी असलहों की तस्करी शुरू कर दी। क्राइम ब्रांच सोर्सेज की मानें तो रईस की गिनती उन चंद खूंखार बदमाशों में होती है जो लूट, रंगदारी के लिए जान लेने से नहीं हिचकते। रईस सिद्दीकी ने जब क्राइम वर्ल्ड में कदम रखा तो उसे कुछ लोगों का ही सपोर्ट था लेकिन उसने अपने बल पर मुन्ना बजंरगी से सम्पर्क किया और पहले उसके साथ काम शुरू किया। रईस बनारसी ने मोनू पहाड़ी साथ मिलकर भाई के हत्यारे शानू ओलंगा की हत्या कर दी थी।
32 लॉकर तोड़ने वाले से संबंध
छादानगर महापालिका कॉलोनी निवासी भानुप्रताप के घर पर पुलिस ने देरशात रेड मारा। यहां से पुलिस ने वाहनों के फर्जी नंबर प्लेड बरामद की। साथ ही दस्तावेज हाथ लगे, जिनमें शहर के बेकनगंज का रईस बनारसी, शरीफ दपाली, कुलीबाजार का शादाब, चकेरी का अजय सिंह समेत उन्नाव व शुक्लागंज के दो बदमाशों के नाम सामने आए हैं। पुलिस की टीमें अब इन कुख्यात अपराधियों को दबोचने के लिए लग गई हैं। जानकारों की मानें तो भानुप्रताप और सुपारी किलर मोनू पहाड़ी के बीच अच्छी दोस्ती थी। मोनू के जेल जाने के बाद रईस बनारसी भानुप्रताप के संपर्क में आया और दोनों आयाराम-गयाराम की दुनिया में मिलकर काम करने लगे।
इन तीन राज्यों के बैंकों में किए हाथ साथ
भानु पुलिस की पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपी ने पुलिस को बताया है कि उसने केरल, महाराष्ट और तमिलनाडु में बैंक लॉकरों को तोड़कर करोड़ों की चोरी की है। साथ ही पुलिस ने गाजियाबाद और ग्रेडर नोएडा में बैंक लॉकर से सोना पार करने पर उससे पूछा तो भानु ने इन दो वारदातों को नहीं करने की बात कबूली। गाजियाबाद और ग्रेडर नोएडा की पुलिस आज शहर आ सकती है और आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की पुलिस कानपुर बुधवार तक आएगी। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने कए और बड़ा खुलासा किया है। भानु ने अभी तक 500 कारें चोरी की और उन्हें नेपाल में जाकर बेचा है। उसके इस काले कारनामें में रईस बनारसी सहित अन्य गुर्गे भी शामिल रहे हैं।