
तारीख: 13 फरवरी, जगह: कानपुर देहात जिला, मड़ौली गांव, समय: दोपहर के करीब 2:45 बजे। मढ़ौली गांव के कुछ लोग अपने खेतों में चारा काट रहे थे तो कुछ फसलों में पानी दे रहे थे। दोपहर का समय धीरे-धीरे बीतने को हो चला था और सांझ का आगमन हो रहा था।
तभी पुलिस और प्रशासन की गाड़ियों का काफिला दिखा। बगल के खेत में चारा काट रहीं कमला देवी ने बताया कि वहां पहुंचने के बाद पुलिस ने आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों को भगा दिया।
इससे गांव के लोगों को किसी अनहोनी या बड़ी कार्रवाई का अंदेशा हो गया था। कुछ ही देर में तस्वीरें साफ हो गईं। कार्रवाई होनी थी कृष्ण गोपाल दीक्षित के खेत में बने जानवरों और परिवार के रहने वाले घर पर।
इनके घर के टिन शेड के पक्के बने कंस्ट्रक्शन पर एक महीने पहले यानी 13 जनवरी के दिन ही बुलडोजर चलाया जा चूका था। इस बार बारी थी घास-फुस, पतलों और पॉलीथिन की बनी झोपड़ी की।
प्रशासन के टीम में शामिल थे मैथा के SDM ज्ञानेश्वर सिंह, मड़ौली गांव के लेखपाल अशोक चौहान, रूरा थाने के SHO दिनेश गौतम, कानूनगो, तीन दूसरे गांव के लेखपाल, महिला पुलिसकर्मी और पुरुष पुलिसकर्मी।
समय: दोपहर के 3 बजे यानी टीम के आने के 15 मिनट बाद
प्रशासन के निर्देश पर JCB ने सबसे पहले हैंडपंप और शिवमंदिर के चबूतरे को तोड़ना शुरू किया।
मंदिर और हैंडपंप को उखाड़ने के बाद बारी थी झोपड़ी को गिराने की। कृष्णगोपाल का परिवार जिद पर अड़ा था कि वो किसी भी कीमत पर झोपड़ी को नहीं गिरने देगा। प्रशासन के लोग समझाते-बुझाते कम। धमकाते ज्यादा।
एक महीने पहले ही गिरे पक्के मकान से परिवार दुःखी था। कृष्ण गोपाल की पत्नी प्रमिला देवी उम्र 52 साल और बेटी नेहा दीक्षित उम्र 22 साल झोपड़ी में चली गई। अंदर से दरवाजा बंद कर ली। बाहर से निकलो-निकलो की आवाजें गूंजने लगीं।
दरवाजा खुलवाने और धक्का-मुक्की के बीच झोपड़ी में आग लग लग गई। पुलिस जबरदस्ती मां-बेटी को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। तभी एक अधिकारी ने JCB ड्राइवर को इशारा किया कि जिस हिस्से में आग लगी है उसको गिराकर बाहर की तरफ फेंक दो। JCB आगे बढ़ी। जैसे ही उसने आग लगे हिस्से को धक्का मारा।
झोपड़ी का ऊपरी हिस्सा और अंदर रखा जनरेटर दोनों गिर गया। जनरेटर से डीजल और मोबिल बाहर की तरफ रिसने लगा। तेल के संपर्क में आने से आग ने भयावह रूप ले लिया। चंद सेकेंड में ही पूरी झोपड़ी भभक उठी और धू-धू कर जलने लगी। ये सब इतना जल्दी हुआ की मां बेटी को बाहर निकलने तक का समय नहीं मिल सका।
बेटी और पत्नी को बचाने के चक्कर में कृष्ण गोपाल दीक्षित भी झुलस गए। चेहरे की चमड़ी झुलस कर झूल रही थी। बेटे चिल्ला रहे थे कि वो देखो मां और बहन जल रही है।
चीख-पुकार के बीच पुलिस और प्रशासन की टीम भागने लगती है। JCB को इशारा करते हुए पुलिस ने भागने को कहा। JCB ड्राइवर JCB लेकर भागने लगा। सिंगल रोड पर भागते-भागते 3 किलोमीटर आगे जाकर रोशनमऊ गांव में एक पेड़ में टक्कर मार दिया। पीछा कर रहे 10 से 12 लोगों ने उसको पकड़ लिया और पिटाई की।
गैस सिलेंडर फटता तो जा सकती थीं और जानें
हम जब घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। जिधर नजर जाए उधर सिर्फ पुलिसकर्मी ही दिखाई दे रहे थे, जिले के सभी बड़े अधिकारी वहां मौजूद थे। मौके पर अग्निशमन यानी दमकल की गाड़ी भी खड़ी थी।
जो 13 फरवरी को मां-बेटी के जलकर मरने के बाद वहां पहुंची थी। टूटा हुआ शिवमंदिर का चबूतरा, उखाड़ा गया हैंडपंप, 1 महीने पहले तोड़ा गया पक्का टिनशेड, खूंटे पर बंधी 2 गायें और उनके 2 बछड़े, जलकर राख हुई झोपड़ी, झोपड़ी में जलकर मरी मां-बेटी की राख के रूप में मौजूद अवशेष और उनके अरमान। दिखाने और बताने के लिए बस यही चीजें वहां बची थीं। गैस सिलिंडर और एक चूल्हे को उस वक्त बाहर निकाल लिया गया था वर्ना सिलिंडर अगर अंदर होता तो और जाने जा सकती थीं।
20 मीटर के फासले पर है पीड़ित और आरोपी का घर
आरोपी अशोक दीक्षित और कृष्ण गोपाल दीक्षित का घर महज 20 मीटर के फासले पर ही है। दोनों की पहले आपस में अच्छी बनती भी थी। नवम्बर में गौरव फौजी और कृष्ण गोपाल के छोटे बेटे अंश दीक्षित में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई।
फिर दोनों तरफ से देख लेने की धमकी दी गई। फिर यही मुद्दा गड़े मुर्दे की तरह उखाड़ा गया और फिर से अवैध कब्जे को लेकर एप्लीकेशन दी गई।
यह तो घटना वाले दिन की वह कहानी है, जिसके कुछ अंश आपने पढ़ा और देखा होगा। आइए अब घटना में शामिल JCB और FIR की इनसाइड स्टोरी को जानते हैं ...
कृष्ण गोपाल दीक्षित के घर को 14 जनवरी और 13 फरवरी को गिराया गया था। पहली बार पक्के बने टिन शेड को ध्वस्त किया गया था। जबकि दूसरे बार में यह घटना घटित हुई। जब हम FIR में दर्ज JCB ड्राइवर की पड़ताल करने के लिए निकले तो हमें काफी चौंकाने वाले नतीजे मिले। ड्राइवर बताकर जिसका नाम FIR में दर्ज किया गया था , असल में JCB ड्राइवर का वह नाम था ही नहीं। उस नाम का कैमरामैन निकला।
FIR में JCB ड्राइवर बताकर, जिसका नाम दीपक लिखा है, पत्रिका इन्वेस्टीगेशन में वह कैमरामैन निकला। दीपक गुप्ता कैमरामैन है और वह रोशनमऊ गांव का रहने वाला है। गांव में ही दीप स्टूडियो के नाम से उसकी दुकान है।
जब हम दीपक के घर पहुंचे तो वह घर पर नहीं मिला। उसके पिता नरेश गुप्ता ने बताया की वह रिकॉर्डिंग करने बाहर गया है। दीपक के पिता ने आगे बताया कि जिस दिन घटना हुई उस दिन पहले तो मुझे पता ही नहीं चला। जब भागती हुई JCB के पीछे लोग चिल्ला रहे थे तब हम सब बाहर निकल कर देखे तो समझ पाए की मामला क्या है।
हमने दीपक के पिता नरेश गुप्ता से सवाल किया कि क्या उस दिन दीपक ही रिकॉर्डिंग कर रहा था तो उन्होंने कहा की उस समय तो नहीं था बाद में गया हो तो मैं नहीं बता सकता।
दीपक के घर के बाद हम JCB के मालिक बालकराम के घर पहुंचे। उनका घर रोशनमऊ गांव के स्कूल के पास है। जो घटनास्थल से 3 किलोमीटर की दूरी पर है। बालकराम के 3 बेटे हैं। दो अभी फौज में हैं और बड़ा बेटा रिटायर हो चुका है। बड़े बेटे सरविंद के नाम पर ही JCB है।
बालकराम ने बताया कि रूरा थाना इंचार्ज, SDM हमारी JCB को ले गए। हमारी JCB से ही उनका मकान एक महीना पहले भी गिरवाया था। इस बार भी उन्होंने फोन करके मंगाया था। घटना के बाद उसमें तोड़-फोड़ की गई। 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। JCB थाने में बंद है सो अलग। इसकी भरपाई कौन करेगा।
B.SC ग्रेजुएट है ड्राइवर सुरजीत, पिता के मौत के बाद बचपन से ही ननिहाल में रहता है
हम JCB ड्राइवर सुरजीत के घर पहुंचे। घर पर सुरजीत के नाना, नानी और मामी मिलीं। उन्होंने बताया कि वह जब एक साल का था तब उसके पिताजी की मौत हो गई थी। मां की दूसरी जगह शादी हो गई। इसलिए बचपन से वह अपने ननिहाल नटपुरवा में ही रहने लगा।
नाना हीरालाल ने बताया कि उसकी पढ़ाई लिखाई सब यहीं से हुई। साइंस स्ट्रीम से उसने ग्रेजुएशन की। 2 साल पहले कोरोना में उसने कहा कि घर बैठे हैं कुछ कर लेंगे तो आमदनी हो जाएगी, अभी वो सिख ही रहा था पूरी तरह से पारंगत भी नहीं था। दलित बस्ती नटपुरवा, रोशनमऊ से 2 किलोमीटर और घटनास्थल से तकरीबन 5 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है।
सुरजीत के मामा भी चलाते हैं JCB, पहली बार घर गिरा तो वही थे ड्राइवर
सुरजीत के मामा का नाम सुरवीर है वह दलित बस्ती नटपुरवा में रहते हैं। वह बताते हैं कि हमें प्रशासन ने बुलाया, प्रशासन ने ही गिरवाया और प्रशासन ने ही फंसाया, कॉल डाटा रिकॉर्ड खंगाल कर देख ले कोर्ट सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
सुरजीत आगे कहते हैं कि पुलिस और SDM ने जब तोड़ने का आदेश दिया तब किसी ड्राइवर की क्या औकात की घर तोड़ने से मना कर सके, वो तो बस उनके आदेशों का पालन कर रहा था।
जो असली दोषी हैं वो बाहर घूम रहे हैं और जो बेकसूर है उसको जेल में भेज दिया। यह कहां न्याय है। गरीब की रोजी-रोटी छीनकर, गरीब को जेल भेजकर किसी गरीब को न्याय कैसे मिलेगा। पहली बार मकान टूटने की घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि गरीब का पक्का मकान पहली बार तोड़कर घर आया तो ऐसा लगा जैसे कितना बड़ा पाप करके आया हूं।
कार्यवाई के नाम पर अबतक क्या हुआ?
JCB ड्राइवर सुरजीत कुमार और लेखपाल अशोक चौहान को जेल भेज दिया गया है। मामले में सबसे बड़े आरोपी के रूप में सामने आए बर्खास्त मैथा SDM ज्ञानेश्वर सिंह अभी भी बाहर हैं।
SIT जांच शुरू हो गयी है, DM से अकेले में आधे घंटे तक हुई पूछताछ
मड़ौली गांव के पंचायत में शुक्रवार को SIT जांच कर रहे कानपुर के कमिश्नर राजशेखर और ADG अलोक कुमार पहुंचे। उन्होंने कृष्ण गोपाल के बेटे शिवम् और अंश के बयान दर्ज किए।गांव पहुंची DM नेहा जैन से दोनों अधिकारियों ने पंचायत भवन के बंद कमरे में आधे घंटे तक पूछताछ की।
Updated on:
19 Feb 2023 12:23 pm
Published on:
19 Feb 2023 11:21 am
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