
प्रेस वार्ता करते पुलिस आयुक्त कानपुर
Kanpur News:कानपुर नगर में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें झारखंड निवासी मुख्य आरोपी राजू ठाकुर भी शामिल है। जांच में CISF का जवान दाउद अंसारी की संलिप्तता सामने आई है, जिसे पूछताछ के लिए लाया जा रहा है। गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों तक फैला हुआ है और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं।
मामले की शुरुआत रनवां निवासी भैरव प्रसाद पाण्डेय द्वारा साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 के बीच उन्हें और उनकी पत्नी मीना पाण्डेय को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर मानसिक दबाव बनाया गया। आरोपियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताया और मीना पाण्डेय के आधार कार्ड से पुलवामा आतंकी हमले के आरोपियों को 70 लाख रुपये भेजने का झूठा आरोप लगाकर परिवार को डरा दिया।
गिरोह ने वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पुलिस स्टेशन और एंटी करप्शन ऑफिस का सेटअप दिखाया। वर्दीधारी लोगों को दिखाकर जांच का माहौल बनाया गया और परिवार को गिरफ्तारी की धमकी दी गई। इसके बाद “जांच प्रक्रिया” के नाम पर RTGS के माध्यम से अलग-अलग खातों में कुल 57 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस दौरान पीड़ित परिवार को लगातार निगरानी में रखने का झांसा देकर घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, फर्जी कागजात और एक मारुति अर्टिगा कार बरामद की है। जांच में 57 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से कुछ धनराशि फ्रीज भी कर दी गई है।
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। यह लोग खुद को पुलिस, CBI या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। वीडियो कॉल पर फर्जी कार्यालय और अधिकारी दिखाकर विश्वास दिलाया जाता था। फिर आतंकी फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने का डर दिखाकर मोटी रकम वसूली जाती थी। पैसे को सुरक्षित बताने के लिए फर्जी लेटरहेड का भी इस्तेमाल किया जाता था।
कानपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहा जाता है और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, ठगी की रकम के इस्तेमाल और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहन जांच में जुटी है।
Updated on:
25 Apr 2026 01:41 pm
Published on:
25 Apr 2026 01:38 pm
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