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Kanpur News: फर्जी डिग्री गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, पैसों के बदले बिना परीक्षा 10वीं से PhD तक दिला रहा था डिग्रियां

Fake Degree Racket:कानपुर पुलिस ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया है। मास्टरमाइंड डॉक्टर रवि समेत दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। आरोपी पैसों के बदले बिना परीक्षा 10वीं से PhD तक की फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते थे।
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कानपुर

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Avanish Kumar

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Updated: 18 May 2026, 6:20 PM IST

Kanpur Police

कानपुर में पुलिस ने फर्जी मार्कशीट,डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थाना किदवई नगर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में सामने आए इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंटरमीडिएट से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्रियां तैयार कर लोगों को बेच रहे थे। मामले में करोड़ों रुपये के लेनदेन के भी सुराग मिले हैं।गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर मनीष उर्फ रवि और अर्जुन यादव शामिल हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ महीने पहले पकड़े गए फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट गिरोह का मुख्य सरगना भी डॉक्टर मनीष उर्फ रवि ही था। पुलिस अब पुराने मामलों को भी इस नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही है।

ऐसे चलता था फर्जी डिग्री बनाने का खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न फर्जी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के नाम पर नकली मार्कशीट, ग्रेड शीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे। आरोपी छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को बिना परीक्षा दिए डिग्री दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे।पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, नकली मोहरें, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में कई राज्यों तक नेटवर्क फैला होने की बात सामने आई है।

कई बड़े संस्थानों के नाम का किया दुरुपयोग

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अलग-अलग राज्यों के छात्रों को निशाना बनाकर करीब 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए। जांच में यह भी सामने आया कि कई बड़ी यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों के नाम का दुरुपयोग किया गया। पुलिस अब उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के संकेत भी मिले हैं। बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

“ग्लोबल अवार्ड” के नाम पर भी होती थी ठगी

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक आरोपी “GLOBAL BOOK OF EXCELLENCE AWARD UK LONDON” नाम से कथित अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर लोगों से ठगी करते थे। सोशल मीडिया और प्रचार सामग्री में कई सेलिब्रिटीज को अवार्ड देने का दावा कर भरोसा बनाया जाता था।मुख्य आरोपी डॉक्टर मनीष उर्फ रवि ने पूछताछ में दुबई यात्रा करने की बात भी स्वीकार की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क देश के बाहर तक फैला था या नहीं।

गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में कार्रवाई

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, धोखाधड़ी और अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच एसआईटी और क्राइम ब्रांच की टीम कर रही है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

वही अन्य पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जी डिग्री और सर्टिफिकेट का यह नेटवर्क युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रहा था। आने वाले दिनों में मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।