
कानपुर में मूंगफली के व्यापार के नाम पर चल रहे करोड़ों के जीएसटी घोटाले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को गिरोह के सक्रिय सदस्य दीपक कुमार उर्फ ‘मोगली’ को सीओडी क्रॉसिंग से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पहले ही दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि अब पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह के मुताबिक, राज्य कर विभाग ने फरवरी में कल्याणपुर थाने में फर्जी फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ लेने की एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि ‘अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी’ नाम की फर्म पूरी तरह से कागजी थी।जब पुलिस ने मेहरबान सिंह का पुरवा स्थित पते का सत्यापन कराया, तो वहां किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली। यही नहीं, फर्म से जुड़ा मोबाइल नंबर भी बंद पाया गया। डिजिटल साक्ष्यों की जांच में साफ हो गया कि यह फर्म सिर्फ कागजों में ही मौजूद थी और इसी के जरिए 2019-20 में 2.66 करोड़ रुपये का फर्जी ITC क्लेम किया गया।
क्राइम ब्रांच ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर दीपक कुमार उर्फ मोगली को सीओडी क्रॉसिंग से दबोच लिया। उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।इससे पहले पुलिस गिरोह के दो अन्य सदस्यों—कमल गौरव साहू और एतिशाम हुसैन—को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और किरायानामा जैसे कूटरचित दस्तावेज तैयार कराते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था।इसके बाद बिना किसी वास्तविक व्यापार के केवल कागजों में माल की खरीद-बिक्री दिखाकर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आईटीसी का गलत क्लेम कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जाता था।गिरोह में कई लोग कमीशन पर काम करते थे—कोई फर्म रजिस्ट्रेशन करता था, तो कोई बैंक खाता खोलता था और कुछ लोग बिलिंग व रिटर्न फाइलिंग का जिम्मा संभालते थे।
Updated on:
20 Mar 2026 09:24 pm
Published on:
20 Mar 2026 09:24 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
