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OMG! देश के सबसे प्रदूषित शहरों में चौथे नंबर पर कानपुर

अभी सर्दी की सिरहन ठीक से शुरू भी नहीं हुई है और कानपुर की आबोहवा गैस चैंबर में तब्दील होने लगी है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कानपुर में प्रदूषण का स्तर 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया.

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OMG! देश के सबसे प्रदूषित शहरों में चौथे नंबर पर कानपुर

कानपुर। अभी सर्दी की सिरहन ठीक से शुरू भी नहीं हुई है और कानपुर की आबोहवा गैस चैंबर में तब्दील होने लगी है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कानपुर में प्रदूषण का स्तर 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया. वहीं लगभग 316 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. प्रदूषण का स्तर मानक से 8 गुना ज्यादा हो चुका है.

चौथे नंबर पर है कानपुर
पिछले दिनों एयर क्वालिटी इंडेक्स की जारी रिपोर्ट में पूरे देश में कानपुर चौथे नंबर पर पहुंच गया है. बता दें कि साल-2017 में डब्ल्यूएचओ ने कानपुर को दुनिया में सबसे पॉल्यूटेड शहर का शर्मनाक खिताब दिया था. एक साल बीत जाने के बाद सर्दी शुरू होने से पहले ही पॉल्यूशन रूपी रावण ने अपना सिर उठाना शुरू कर दिया है. मुश्किल इस बात की है कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड गाइडलाइन जारी कर जिम्मेदारी पूरी कर देता है और जिम्मेदार विभाग उन निर्देशों को कागजों में पूरा कर चैन की नींद सो जाते हैं.

हवा हुई जहरीली
एयर क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट पर गौर करें तो सुबह 6 बजे भी पीएम-2.5 का स्तर 271 है, जो मानक से 4 गुना है. मॉर्निंग वॉकर्स के लिए यह खतरे की घंटी है. सुबह और शाम कानपुर में बेहद प्रदूषित इलाकों में गहरी धुंध छाने लगी है. वहीं दोपहर 1 बजे के बाद वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी होती गई, जो शाम 4 बजे तक 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई. वहीं डॉक्टर्स के मुताबिक दमा रोगियों को एतियात बरतने की जरूरत है.

ऐसे मिले हैं निर्देश
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्राल बोर्ड की जारी गाइडलाइन के मुताबिक सर्दियों में मुख्य मार्गों में ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए सफाई कराई जाने के निर्देश हैं. सीएम ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की ओर से ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है. सुबह-सुबह सफाई कर्मियों द्वारा झाड़ू लगाए जाने से भारी मात्रा में पॉल्यूशन फैल रहा है. विभाग के पास 2 ऑटोमैटिक स्वीपर मशीन में से 1 मशीन पिछले 9 महीन से खराब पड़ी है. इसके अलावा कई जगहों पर सफाई कर्मी ही कूड़ा एकत्रित कर आग लगा देते हैं. शहर में रोजाना 1300 टन कूड़ा निकलता है और 2 लाख टन से ज्यादा कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में जमा है.

ऐसे बढ़ रहा है प्रदूषण
हर साल लाखों वाहन सड़कों पर उतरते हैं और प्रदूषण का बड़ा कारण बनते हैं. शहर में 70,000 से ज्यादा ऐसे वाहन हैं जो अपनी जिंदगी पूरी कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं. जिंदगी पूरी कर चुके इन वाहनों से मानक से ज्यादा प्रदूषण होता है. गाड़़ियों से निकलने वाले धुएं विकराल समस्याओं को पैदा कर रहे हैं. इसे रोकने के लिए आरटीओ ने कोई कदम नहीं उठाया, सिर्फ कोरे वादे कर कार्यवाही पूरी कर दी जाती है.

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