
कानपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। अब सभी स्कूली बसों, वैन और ऑटो पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। इस कोड को स्कैन करते ही वाहन की पूरी जानकारी—फिटनेस, बीमा, परमिट और ड्राइवर का विवरण—तुरंत सामने आ जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य स्कूली परिवहन में पारदर्शिता बढ़ाना और सड़क हादसों पर रोक लगाना है। विभाग का मानना है कि इससे अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर भरोसा मिलेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत हर स्कूली वाहन पर एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। जैसे ही कोई अभिभावक या अधिकारी इसे स्कैन करेगा, वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट, चालक का विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज तुरंत स्क्रीन पर दिख जाएंगे। इससे फर्जी या अधूरे दस्तावेज वाले वाहनों की पहचान आसानी से हो सकेगी और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन वाहनों के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट या बीमा नहीं होगा, उन्हें सड़कों पर बच्चों को ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो ऐसे वाहनों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इससे नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती बढ़ेगी।
विभाग के मुताबिक, कानपुर में करीब 9 हजार स्कूली वाहन संचालित हैं। इनमें से लगभग 150 वाहनों पर क्यूआर कोड लगाए जा चुके हैं और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है। एआरटीओ और पीटीओ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूलों में जाकर वाहनों की जांच करें और पूरा डेटा एक विशेष पोर्टल पर अपलोड करें।
इस डिजिटल सिस्टम को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से भी जोड़ा गया है, जिससे लखनऊ से लेकर जिला स्तर तक हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार ने बताया कि स्कूली बसों की फिटनेस जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल से अभिभावकों को बच्चों की यात्रा को लेकर ज्यादा भरोसा मिलेगा।परिवहन विभाग की यह पहल न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि स्कूली परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ाएगी।
Updated on:
07 Apr 2026 05:33 pm
Published on:
07 Apr 2026 05:33 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
