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शुभेंदु अधिकारी पर शंकराचार्य का तीखा वार, गाय को माता कहकर 14 साल बाद काटने की नीति पर उठाए बड़े सवाल

Gaumata Protection Issue:शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कानपुर देहात में गौ संरक्षण पर सरकारों और नेताओं की आलोचना की। उन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कथित बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि गाय को माता कहकर उसके वध की नीति विरोधाभासी है और इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए।

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Shankaracharya Avimukteshwaranand

पत्रकारों से बातचीत करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती -फोटो- वीडियो ग्रैब

Shankaracharya Avimukteshwaranand News: कानपुर देहात पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण के मुद्दे पर सरकारों और राजनीतिक दलों पर बेहद तीखा हमला बोला। पुखरायां स्थित गौशाला और मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोग एक तरफ गाय को “माता” कहते हैं और दूसरी तरफ उसके लिए ऐसे नियम बनाते हैं, जो आस्था को चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कथित बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि “खबरदार शुभेंदु अधिकारी, तुमने जो यह निर्णय लिया है क्या वह सही है? एक तरफ तुम गाय को माता कहते हो और दूसरी तरफ कहते हो कि 14 साल के बाद उसे काटा जा सकता है।” शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि अगर गाय को माता कहा जाता है तो फिर उम्र के आधार पर उसके वध की बात कैसे स्वीकार की जा सकती है।

‘मां को मां और पशु को पशु कहो’, दोहरी नीति पर भड़के शंकराचार्य

अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोहरे रवैये पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जो लोग गाय को माता कहते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से अपनी नीति तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “अगर आप गाय को माता कहते हैं तो फिर उसे काटने की बात कैसे कर सकते हैं।” शंकराचार्य ने तीखे शब्दों में कहा कि पहले की सरकारें गाय को पशु मानती थीं, इसलिए कम से कम उनमें दिखावा नहीं था, लेकिन जो लोग खुद को गौभक्त बताते हैं, वही इस तरह के विरोधाभासी नियम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भावनाओं और आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पश्चिम बंगाल का जिक्र कर सरकारों की नीति पर उठाए सवाल

कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि गौ माता के सम्मान को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम या विरोधाभास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकार या नेता गाय को माता मानता है तो फिर उसके संरक्षण और सुरक्षा के लिए स्पष्ट और एक जैसी नीति होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक तरफ गाय को पवित्र बताया जाता है, तो दूसरी तरफ उसके वध को लेकर समय और उम्र तय करना किस आधार पर उचित है। शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर स्पष्टता जरूरी है।

गौ संरक्षण को बताया आस्था का विषय, जनता से की अपील

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गौ संरक्षण किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और संस्कृति का विषय है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग अपनी मां की रक्षा को धर्म और कर्तव्य मानते हैं, उसी तरह गौ माता की रक्षा भी समाज का दायित्व है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में गौ रक्षा एक बड़ा जन आंदोलन बन सकता है और इसके लिए समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें स्पष्ट नीति नहीं बनातीं तो समाज को खुद इस दिशा में जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।