
कानपुर. धरती की छाती चीर कर सोना निकालने वाले अन्नदाता को जहां आसमान से आई आफतों ने बर्बाद किया है, वहीं इनके मतों से सत्ता का सुख भोगने वाले नेताओं ने सिर्फ जुबानी मलहम लगाने के सिवाय कुछ नहीं किया। इसी के चलते आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद देश की अस्सी फीसदी आबादी एक-एक रुपए के लिए मोहताज है। सरकारों ने इनकी तकदीर बदलने के नाम पर सिर्फ कर्जमाफी और अन्तोदय का अनाज देकर वाहवाही लूटने का काम किया गया है, जबकि किसानों के भविष्य की सुरक्षा की गारण्टी देने वाली कोई कार्ययोजना अभी तक तैयार नहीं की गयी है। इसी के कारण गरीबी से बदहाल किसान बबूल के पेड़ पर झूल कर आत्महत्या कर रहा है। कानपुर के दोआब (घाटमपुर ) तहसील के सैकड़ों गांवों में पिछले दो दशक से बे-मौसम बारिश के साथ ही सूखा पढ़ने के चलते यहां सबसे ज्यादा खुदकुशी की घटनाएं सामने आई हैं।
दो दशक से बेहाल दोआब के किसान
गंगा-जमुना के बीच में पढ़ने वाली घाटमपुर तहसील के गांव आजादी के बाद भी बदहाल हैं। यहां किसान खेती-बाड़ी छोड़ कर बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि तूफानी बारिश और सूखे की मार से फसले बर्बाद हो गईं, जिसके चलते हमलोग कर्ज के बोझ तले दब गए। सजेती थानाक्षेत्र के बरईपुर गांव निवासी रामसजीवन कहजे हैं कि कर्ज न चुका पाने के कारण कई किसानों ने आत्महत्या कर ली। योगी सरकार ने किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ़ करने का एलान किया है जो सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। रामसजीवन ने बताया कि हमारे गांव में करीब 190 किसानों ने बैंकों से किसान क्रेडिड कार्ड के जरिए कर्जा लिया था, जिसमें महज 90 किसानों को लाभ मिला है। रामसजीवन ने कहा कि बैंक सिर्फ किसान क्रेडिड कार्ड के पात्र जो एक लाख का कर्जा लिया है, उसे ही माफ कर रहे हैं।
तो लगा ली बबूल के पेड़ पर फांसी
बरईपुर गांव के रहने वाले किसान राजेंद्र कुमार ने सहकारी बैंक से 80 हजार का कर्जा लिया था। राजेंद्र ने सोचा था कि इस पैसे से अच्छी खेती करके बैंक का कर्ज चुका देगा और माली हालत भी ठीक हो जायेगी। लेकिन कुदरत का ऐसा कहर बरपा की सूखा पड़ गया जिससे उसकी फसल बर्बाद हो गयी। फसल बर्बाद होने से राजेंद्र की माली हालत और खराब हो गयी और बैंक अपना पैसा पाने के लिये उसको नोटिस देने लगा। अस्सी हजार का बैंक कर्ज धीरे धीरे बढ़कर एक लाख नब्बे हजार हो गया और बैंक ने फिर से नोटिस जारी कर दिया जिससे आहत होकर राजेंद्र ने खेत में लगे पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी। राजेंद्र के छोटे भाई प्रेम शंकर ने बताया कि जिला सहकारी बैंक से अस्सी हजार कर्ज लिया था। चार दिन पहले बैंक का नोटिस आया तो वह गुमशुम रहने लगा, सुबह बच्चो से मिलकर खेत पर चला गया और बबूल के पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी।
इन किसानों ने मौत को गले लगाया
बिठूर थाना क्षेत्र के एक किसान की फसल बारिश में बर्बाद हो गयी जिससे आहत होकर उसने अपने घर में फ़ासी लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक किसान की पत्नी गीता ने बताया कि दो साल पहले ग्रामीण बैंक से पति ने खेती के लिए पचास हजार का कर्जा लिया था। लेकिन बारिश के चलते फसल बर्बाद हो गई। वहीं बैंकवाले घर आकर लोन अदा करने का दबाव बनाने लगे। तभी पीएम नरेंद्र मोदी ने यूपी के चुनाव के वक्त घोषणा की, सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही सभी किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। उदास पति के चेहरे में मुस्कान आई। प्रदेश में योगी की सरकार बन गई और उन्होंने कर्जमाफी का ऐलान कर दिया, लेकिन सूची में हमारे पति का नाम नहीं आया। इसके चलते उन्होंने खुदकुशी कर ली। वहीं महाराजपुर के किसान ने रविवार को सुसाइड कर लिया। उसे भी कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला। किसान की पत्नी सुधा ने कहा कि सरकारों को कर्जामाफी के बजाय किसानों की मुख्य समस्याओं के निदान के लिए जमीन पर उतरकर रणनीति बनानी चाहिए।
कर्जमाफी से नहीं रुकेंगी आत्महत्याएं
मौसम वैज्ञानिक अनरूद्ध दुबे ने किसानों की आत्माहत्या पर कहा कि आजादी के बाद से अब तक किसानों के बारे में किसी भी सरकार ने ठोस रणनीति नहीं बनाई। कर्जमाफी या अन्य सहायता से किसानों का कुछ भला नहीं होने वाला। अगर किसानों के सुसाइड को रोकना है तो पहले उसे उन्नत फसल उगाने के साथ ही कम समय में तैयार करने वाली फसलों के बारे में जानकारी देनी होगी। अनरूद्ध दुबे कहते हैं कि पिछले दस सालों से पेड़ों की कटान के चलते मौसम चक्र में जबरदस्त परिवर्तन आया है और इसी के चलते अक्सर बेमौसम बारिश तो बारिश के समय सूखा पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को अब वो ही फसल उगानी चाहिए, जो इन प्रकृतिक आपदातों को झेल सकें। कानपुर-बुंदेलखं डमें आज भी किसान दो ही फसलों की बोवनी करता है जो इनके लिए घातक साबित हो रही है।
Updated on:
22 Aug 2017 08:47 am
Published on:
22 Aug 2017 08:46 am
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