
काशी में जुटेंगे महागठबंधन के कई नेता, मां कृष्णा के इस कदम से डरीं अनुप्रिया
कानपुर. लोकसभा चुनाव को लेकर देश की सभी रजनीतिक पीएम नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए रणनीति बना रहे हैं। यूपी के तीन लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और बसपा ने गठबंधन कर भाजपा को पटखनी देकर विपक्ष दलों के अंदर 2019 फतह की उम्मीद जगा दी। इसी के चलते कांग्रेस पार्टी अब छोटे-छोटे दलों को एक साथ हाथ मिला रही है। सोनेलाल पटेल की जयंती 2 जुलाई को बनारस में मनाई जाएगी, जिसकी आगवाई केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल करेंगी। इस अवसर पर संजय सिंह, जयंती चौधरी, नरेश उत्तम, बसपा नेता भीमराव अंबेडकर सहित कई अन्य नेताओं को आमंत्रण दिया गया है। इस मंच से कृष्णा अपनी बेटी अनुप्रिया पर जुबानी हमला बोल सकती हैं। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी और बेटी को हराने के लिए महागठबंधन का ऐलान कर सकती हैं।
जयंती के दिन दिखाएंगी पॉवर
समाजवादी पार्टी के अंदर चली रार कुछ हद तक थम गई है, लेकिन कुर्मी समाज के नेता स्व सोनेलाल पटेल की सियासत रूपी विरासत को लेकर एक बार फिर मां और बेटी आपने-सामने होंगी। जिसकी झलख बनारस में 2 जुलाई को डॉक्टर पटेल की जयंती में देखने को मिलेगा। अपना दल कानपुर के जिलाध्यक्ष राम सिंह राजपूत ने बताया कि डॉक्टर पटेल की जयंती के अवसर पर कांग्रेस, सपा, बसपा, राष्ट्रीय लोकदल, कांग्रेस के अलावा अन्य छोटे दलों के नेता मौजूद रहेंगे। जयंती के दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष कुष्णा पटेल महागठबंधन का ऐलान करेंगी और मोदी सरकार को हराने के लिए जुट जाएंगी। राजपूत ने बताया कि बनारस में हजारों की संख्या में लोग पहुंचेंगे और वहीं से भाजपा व उनके सहयोगी दलों को पटखनी देने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।
मिर्जापुर में बेटी को घेरेंगी मां
लोकसभा चुनाव 2019 में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के ऐलान, कि वो 2019 का लोकसभा चुनाव मिर्जापुर से लड़ेंगी के बाद मां कृष्णा पटेल ने अपने पति स्व सोनेलाल पटेल की जयंती कानपुर के बजाए बनारस में मनाए जाने की घोषाणा की है। शनिवार को अपना दल के नेताओं के साथ बैठक कर जयंती को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई। जिलाध्यक्ष राम सिंह राजपूत ने बताया कि यूपी के सभी जिलों से कार्यकर्ताओं को बनारस में आने को कहा गया है। करीब पचास हजार अपना दल समर्थक बनारस पहुंचेंगे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल डॉक्टर साहब के बताए रास्ते से भटक गई हैं। जिस दल ने डॉक्टर साहब को पिटवाया उन्हीं के साथ सरकार में शामिल होकर अपना दल के नेताओं के नेताओं के साथ धोखा दिया है। मिर्जापुर में अपना दल अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारेगा।
पल्लवी को लड़वाएंगी चुनाव
अपना दल की नेता कृष्णा पटेल 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी छोटी बेटी पल्लवी पटेल को चुनाव के मैदान में उतारेंगी। पल्लवी को जिताने के लिए कृष्णा पटेल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, मयावती और कांग्रेस से समर्थन मांग सकती हैं। अपना दल के नेताओं की मानें तो विपक्षी दल पल्लवी को मिर्जापुर से ही चुनाव के मैदान में उतार सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो पहली बार दो बहनें चुनाव के मैदान में आमने सामने होंगी। जिलाध्यक्ष ने बताया कि अभी पल्लवी पटेल कहां से चुनाव लड़ेंगी तय नहीं हुआ। हां अगर सहयोगी दल उन्हें मिर्जापुर से चुनाव में उतारने को कहेंगे तो अपना दल के कार्यकर्ता अपनी नेता को जिता कर संसद भेजेंगे। अपना दल के एक नेता ने बताया कि पल्लवी पटेल ने खुद मिर्जापुर से चुनाव लड़ना चाहती हैं और इसके लिए विपक्ष के नेताओं से 2 जुलाई को बात की जाएगी।
इसके चलते बढ़ी दूरियां
अनुप्रिया पटेल ने साल 2012 में रोहनिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीता था, लेकिन साल 2014 में उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया और उसके बाद उन्होंने मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत गईं। अनुप्रिया के इस्तीफा देने के बाद रोहनिया सीट पर उपचुनाव हुआ, जहां से इस बार अपना दल की ओर से अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल खड़ी हुईं लेकिन वो चुनाव हार गईं और ये सीट सपा के पास चली गईं जिसे कि अनुप्रिया ने हराया था। इसी के बाद मां बेटी के बीच रार शुरू हो गई। अनुप्रिया पटेल सियासत के मैदान में बड़ती गई वहीं मां कृष्णा पटेल अपनी छोटी बेटी के साथ पिछड़ती गईं। लेकिन 2019 में हालत इस बार बदल गए हैं। कृष्णा पटेल अपनी बड़ी बेटी को चक्रव्यूह में फंसाने के लिए बनारस की धरती में रणनीति बनाएंगी।
बेटी को पार्टी से निकाला
हार के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कृष्णा पटेल ने एक्शन लेना शुरू किया और सबसे पहले अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया, जिसका विरोध अनुप्रिया गुट ने किया जिसके बाद मां-बेटी का झगड़ा खुलकर सामने आ गया।इसके बाद कृष्णा पटेल ने खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए अनुप्रिया पटेल को पार्टी से ही निकालने का फरमान सुना दिया, जिसके बाद पार्टी में कलह चुनाव आयोग के पास पहुंची लेकिन चुनाव आयोग ने इस झगड़े को कोर्ट में पहुंचा दिया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह इस मामले में एक्शन ले और उसके बाद चुनाव आयोग दोनों ही दलों को अपना दल पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने पर ही रोक लगा दी।
Updated on:
25 Jun 2018 09:54 am
Published on:
25 Jun 2018 09:39 am
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
