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मोबाइल और लैपटॉप लोगों को बना रहे हैं बांझपन और नपुंसकता का शिकार

नशा, तनाव, मोबाइल और लैपटॉप का घंटों प्रयोग महिला और पुरुषों दोनों में बांझपन और नपुंसकता का खतरा बढ़ा रहा है. मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी आहिस्‍ता-आहिस्‍ता आपको बीमार बना रही है. यही गर्मी मां-बाप बनने में बड़ी रुकावट पैदा कर रही है.
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कानपुर

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Alok Pandey

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Updated: 7 Oct 2018, 2:14 PM IST

Kanpur

मोबाइल और लैपटॉप लोगों को बना रहे हैं बांझपन और नपुंसकता का शिकार

कानपुर। नशा, तनाव, मोबाइल और लैपटॉप का घंटों प्रयोग महिला और पुरुषों दोनों में बांझपन और नपुंसकता का खतरा बढ़ा रहा है. मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी आहिस्‍ता-आहिस्‍ता आपको बीमार बना रही है. यही गर्मी मां-बाप बनने में बड़ी रुकावट पैदा कर रही है. इसलिए कहा जाता है कि मोबाइल का इस्‍तेमाल करने के बाद उसको खुद से दूर ही रखें. इतना ही नहीं, लैपटॉप का भी जांघों पर रखकर इस्‍तेमाल न करें. ये अहम बातें जीएसवीएम कॉलेज में शुरू हुई डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यू कॉन 2018 यानी कि फॉग्‍सी की कॉन्‍फ्रेंस में उभर कर सामने आई.

ऐसी मिली है जानकारी
बता दें कि फॉग्‍सी की कॉन्‍फ्रेंस को महिला स्‍वास्‍थ्‍य, कल्‍याण और सशक्‍तिकरण के नाम पर समर्पित किया गया है. यही वजह है कि कॉन्‍फ्रेंस में देश-विदेश के नामचीन डॉक्‍टरों ने हाल के शोध और नि:संतान माता-पिता के घर खुशियों को लाने के लिए नई तकनीकों पर चर्चा की. ये चर्चा काफ़ी विस्‍तृत रही.

डीएनए हो रहा है खराब
महापौर प्रमिला पांडेय ने बांझपन और किशोरावस्‍था की कार्यशाला का दीप प्रज्‍वलित कर शुभारंभ किया. कॉन्‍फ्रेंस में फॉग्‍सी के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ. नरेंद्र मेहरोत्रा ने इस दौरान कहा कि अभी तक टाइट कपड़ों और ज्‍यादा गर्मी में रहने वाले पुरुषों के शुक्राणुओं का डीएनए खराब हो रहा था, लेकिन अब पैंट में मोबाइल रखने और लैपटॉप को पैर पर रखकर काम करने से भी डीएनए खराब होने लगा है.

ये है तकनीक
इसी कड़ी में ऑस्‍ट्रलिया से आए डॉ. केशव मेहरोत्रा ने कहा कि पिकसी और ईक्‍सी तकनीक से अब शुक्राणुओं को ठीक कराया जा रहा है, लेकिन इसमें एक बात खास है. वह ये कि ये महंगी है. डॉ. महरोत्रा ने बताया कि सिक्‍सपैक और बॉडी बिल्‍डिंग की चाहत सभी में बढ़ रही है. ऐसे में लोग स्‍टेरॉयड लेने लगते हैं. यही स्‍टेरॉयड उन्‍हें बांझपन का शिकार बना रहा है.