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BIG BREAKING – प्रधानमंत्री जी सेंट्रल रेलवे स्टेशन का यह हाल, एक लाख मुसाफिरों की सुरक्षा बंदरों के हाथ

जहां जीआरपी को होना चाहिए, वहां बंदर आराम फरमा रहे थे, सुरक्षा के दावे सारे फेल  

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जहां जीआरपी को होना चाहिए, वहां बंदर आराम फरामा रहे थे, सुरक्षा के दावे सारे फेल

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बुलेट ट्रेन चलाने के लिए आएदिन बयान देते रहते हैं, लेकिन देश के अधिकतर रेलवे स्टेशन बदहाल हैं और सुरक्षा व्यवस्था भगवान के भरोसे चल रही है। देश के बड़े रेलवे स्टेशनों में एक कानपुर सेंट्रल स्टेशन की रखवाली जीआरपी’-आरपीएफ के बजाए बंदरों के हाथों में है। जिस केबिन में बैठकर अराजकतत्वों की निगरानी जीआरपी को करनी चाहिए, उसमें सुबह से लेकर शाम तक बंदर बैठे रहते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि यात्रियों की सुरक्षा प्रभु श्रीराम भक्त बंदर करते हैं। लखनऊ जा रहे प्राईवेट कर्मचारी अनुज सक्सेना ने बताया कि कुड दिन पहले एक बुजुर्ग महिला स्टेशन के अंदर बोलत में पेट्रेल लेकर आ गई और प्लेटफार्म में दो में आग लगाकर जान दे दी। स्टेशन के किसी भी गेट में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ आपकों बंदर ही नजर आएंगे।
100 से ज्यादा ट्रेनों का आवागमन
दिल्ली से हावड़ा रूट पर मौजूद कानपुर सेंट्रल सबसे अहम स्टेशनों में शामिल है। इस स्टेशन से आए दिन 100 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। साथ ही एक लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन होता है। इसके अलावा करीब दस हजार यात्री हर समय स्टेशन पर अपने गाड़ी का इंतजार करते दिख जाएंगे। इस स्टेशन को भी मॉर्डन बनाए जाने की श्रेणी में रखा गया था। इसके बावजूद स्थिति वैसी ही बनी हुई है। यहां चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। साथ ही प्लेटफार्म पर जानवर घूमते दिख जाएंगे। यही नहीं, रेलवे स्टेशन की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है। पत्रिका टीम शुक्रवार को स्टेशन का रियल्टी चेक करने पहुंची तो जिस केबिन पर जीआरपी के जवान बैठे होने चाहिए, वहां बंदर मौजूद थे। करीब आधे घंटे तक केबिन की रखवाली बंदर करते रहे, बावजूद रेलवे के अफसरों की नजर उन पर नहीं पड़ी।
---फिर भी नहीं बदली सूरत
कानुपर से हर दिन लखनऊ जाने वाले रईस खान ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपना पहला रेल बजट प्रस्तुत करते हुए कानपुर सेंट्रल को नई दिल्ली तक सुपरफास्ट ट्रेन देने के साथ मॉर्डन स्टेशन बनाने का वादा किया था। तीन साल निकल गए पर स्टेशन जस के तस आज भी वैसे के वैसे ही है। हां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल मंत्री जरूर बदल दिया, पर इसका फर्क छुक-छुक-छुक पर नहीं पड़ा। कानपुर सेंट्रल स्टेशन में ना ही मेटल डिटेक्टर मशीन है और ना ही एंट्री गेट पर कोई गार्ड खड़ा होता है। यात्रियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि नए रेल मंत्री पियूष गोयल कानपुर के सेंट्रल स्टेशन को खूबसूरत बनाने के लिए कुछ करेंगे पर ऐसा होता दिख नहीं रहा।
आग के गोले में तब्दील हुई थी महिला
कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग महिला कानपुर सेंट्रल स्टेशन के अंदर प्रट्रोल से भरी बोतल लेकर प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंच गई। यात्रियों के सामने उसने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़कर आग लगी। महिला आग के गोले में तब्दील हो गई। सूचना के दस मिनट पर रेलवे व जीआरपी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक वृद्धा पूरी तरह से झूलस चुकी थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा की दृष्ठि से सबसे संवेदनशीन स्टेशनों में कानपुर का नाम आता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति हथियार लेकर अंदर आराम से आ सकता है। दिल्ली जा रहे राजीव शुक्ला कहते हैं कि कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन आंतकियों के निशाने पर रहता है। पुखरायां हादसे के दौरान भी आंतकी वारदात सामने आई थी, बावजूद रेलवे ने सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं किया।
मेटल डिटेक्टर भी नहीं
कानपुर सेंट्रल को संवेदनशील जोन में रखा गया है। ऐसे में यहां यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। दरअसल स्टेशन पर आने के लिए सिटी और कैंट साइड रास्ते हैं। कैंट साइड की तरफ मौजूद एक नंबर प्लेटफॉर्म के प्रवेश द्वार पर कोई भी अंदर आ सकता है। इसके अलावा मेन गेट पर सामानों की चेकिंग करने के लिए मेटल डिटेक्टर भी नहीं है। वहीं, इस प्लेटफार्म पर वेटिंग रूम भी बना हुआ है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां एक इंचार्ज को नियुक्त किया गया है, जो आने-जाने वाले यात्रियों का पूरा विवरण नोट कर सके। वेटिंग रूम में एक यात्री ने बताया कि वह दो घंटे से यहां बैठे हैं, लेकिन कोई इंचार्ज नहीं आया। साथ ही उनके बारे में किसी ने पूछताछ भी नहीं की। वहीं मामले पर जीआरपी इंस्पेक्टर राममोहन राय ने कहा कि जिस केबिन पर बंदर बैठे मिले हैं, वहीं जिसकी ड्यिटी थी। इसकी जांच करवाई जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।