
ज्योतिषाचार्य ने अखिलेश यादव की कुंडली खंगाली, मुलायम के चलते टीपू विरोधियों पर पड़ेंगे भारी
कानपुर। पूरे देश में दीपवाली पर्व धूम-धाम के साथ बनाया जा रहा है तो वहीं ही लोकसभा चुनाव को लेकर देश में सियासी पारा इस वक्त पूरे शबाब पर है। नेता 2019 का चुनवी दंगल फतह करने के लिए जुटे हुए हैं और कुछ ज्योतिषाचार्यो के दर पर जाकर अपनी कुंडली दिखवा रहे हैं। ऐसे में हमने भी यूपी की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की सियासी कुंडली की जानकारी जाने-माने ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर पंडित बलराम तिवारी से जानी। पंडित बलराम तिवारी ने बताया कि अखिलेश यादव का कन्या लग्न व मिथुन राशि है। वर्तमान में अखिलेश यादव की कुंडली में केतु की महादशा 25 मार्च 2017 से आरंभ है, जो 25 मार्च 2024 तक रहेगी। वर्तमान में केतु की महादशा में सूर्य का अंतर चल रहा है। कुंडली में भी केतु व सूर्य का ग्रहण योग दशम भाव बना हुआ है। यह योग पिता व पुत्र में विक्षोभ कराता है। 28 फरवरी 2019 में केतु में चन्द्रमा आते ही पिता व पुत्र में स्नेह का रिश्ता मजबूत होगा। अभिप्राय है कि इस समय पिता व पुत्र के रिश्ते पहले से और बेहतर होंगे। उन्हीं के आर्शीवाद से अखिलेश के दिन बहुरेंगे।
डिम्पल के आने के बाद चमके अखिलेश
लोकसभा चुनव का शंखदान हो चुका है और राजनीतिक दल एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। तो वहीं ज्योतिषाचार्यो के घरों पर नेताओं की दस्तक बढ़ गई है। दिवाली पर्व पर हमने यूपी के दूसरे सबसे बड़े दल के मुखिया अखिलेश यादव का सियासी भविष्य कैसे रहेगा, इसकी जानकारी पिंडत बलराम तिवारी से की। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई सन् 1973 को प्रातः 8 बजे मुलायम सिंह यादव और मालती यादव के घर इटावा के सैफई में हुआ। इनके नवमांश कुंडली के मुताबिक कर्क और मकर लग्न के चलते अखिलेश का स्वभाव भावुक, संवेदनशील और कल्पना से प्रिय अनुमानित किया जाता है। अपनी पढ़ाई पूरी कर अखिलेश जल्द ही अपने पिता के साथ हो गए और राजनीति में कदम रख दिया। कुंडली के पंचमेश में मंगल और सप्तमेश की दृष्टि के कारण अखिलेश ने डिंपल के साथ प्रेम विवाह किया और इस विवाह ने इनके लिए उन्नति के सारे रास्ते खोल दिए। जिससे इन्हें अनुकूल परिस्थिति मिलती गई और ये जीवन की तमाम ऊचाइयों पर पहुंच गए।
अपनों से खा रहे धोखा
बलराम तिवारी कहते हैं कि, इन्हीं ग्रहों के चलते अखिलेश पर हमेशा विश्वासघात का डर भी बना रहता है। जो अपने लोगों से ही मिलती है। अपने विचारों और गुणों के कारण ये सभी परिस्थिति में सबको पीछे छोड़ आगे आ जाते हैं। जिसकी सबसे बड़ी वजह है की इनके कुंडली में बुध की महादशा। यह महादशा अखिलेश की कुंडली में 2020 तक चलेगी। इसके साथ ही सौम्य लग्न में बुध और शुक्र लगातार बैठा हुआ है। जो इनके हंसमुख और शालीनता हो दर्शाता है। इनके दशमेश में मंगल का त्रिकोण भाव स्थिर है। जिसने अखिलेश को पहले ही मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान कराया। बलराम तिवारी बताते हैं ं की अखिलेश यादव की कुंडली में बुध की महादशा और पंचमेश में मंगल ने ही इन्हें 2012 में मुख्यमंत्री का पद दिलाया था। बुध की महादशा 2020 तक लगातार है साथ ही साथ इनकी कुंडली में छठे घर में बैठा राहु इन्हें कुशल राजनीति और विरोधियों के षड्यन्त्र से बचने में सहायता प्रदान करता है।
दोनों पर भारी है नेता जी की कुंडली
मुलायम सिंह यादव का कर्क लग्र और मीन राशि है नेता जी की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है, जो 21 सितम्बर से 2016 आरंभ हुई है और 21 सितम्बर 2023 तक चलेगी। मंगल की महादशा में गुरु का अतंर चल रहा है मंगल योगकारी है पंचवेश व दशवेश मंगल अष्टम में बैठ कर आय भाव, द्वितीय भाव व पराक्रम को देख रहा है। पंडित बलराम तिवारी के मुताबिक कर्क लग्र के लिए मंगल योगकारी होता है। शिवपाल व अखिलेश यादव दोनों पर नेता जी की कुंडली भारी पडऩे वाली है। नेता जी की कुंडली में ऐसे योग हैं कि वह जिसके साथ जायेंगे उसका बड़ा फायदा होगा। इसके चलते दोनों लोग नेता जी को अपनी खीच रहे हैं। पर गृह ये इशारा कर रहे हैं कि मुलायम सिंह का आर्शीवाद बेटे अखिलेश को मिल सकता है। पिता के बल पर अखिलेश सियासत के मैदान पर फिर से परचम लहरा सकते हैं।
Published on:
07 Nov 2018 02:52 pm
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