
कानपुर। देश में सबसे गिद्द और चीलों की प्रजातियों के गुम होने के चलते सरकार के साथ ही वन विभाग के अफसर खासे परेशान है और इसी के तहत कानपुर जू ने इनकी संख्या में बढ़ोतरी करने का नया तरीका इजाद किया है। डॉक्टर आरके सिंह की पहल पर जूलॉजिकल पार्क ने रैप्टर्स रेस्तरां खोला गया है। यहां पर मृत जानवरों के अलावा बाहर से लाए गए गोस्त को रखा गया है। भोर पहर दर्जन गिद्द यहां आकर लजीज भोजन का आनंद उठाते हैं और एक दर्जन से ज्यादा चीलों ने अपना ठिकाना यहीं पर बना लिया है। यह विशेष रेस्टोरेंट यहां के जंगल सफारी एरिया में तैयार किया गया है। डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि हमारा मुख्यउद्देश्य यहां पर एक साथ अच्छी संख्या में गिद्धों व चीलों को बुलाना है और ब्रीडिंग कराकर उनकी गिरती जनसंख्या को बढ़ाना है। साथ ही मृत जानवरों की बदबू से यहां आने वाले दर्शकों बचाना है।
देश का इकलौता रेस्टोरेंट
वन्यजीवों के लिए देश का इकलौता रेस्टोरेंट कानपुर स्थित चिड़ियाघर में खोला गया है। इस रेस्टोरेंट को चारों ओर पेड़ों से घिरा और बीच में लकड़ी की टहनियां लगा कर खुले आसमान के नीचे बनाया गया है। जहां गिद्ध, चील व अन्य शिकार करने वाले पक्षियों को ठहरने की सुविधा मिलती है। ऊपरी हिस्सा पूरी तरह खुला है। बीच-बीच में लकड़ी की मोटी टहनियां रखी गई हैं। जिन पर गिद्ध और चील आराम से बैठ सकते हैं। वे केवल मांस खाकर उड़ न जाएं, इसलिए पास ही छोटा सा तालाब भी बनाया गया है। डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि पहले यहां अलग-अलग चार क्षेत्रों में मीट के टुकड़े डाले जाते थे। इससे दुर्गंध व संक्रमण फैलने का खतरा रहता था। साथ ही बारिश के समय दिक्कतें बढ़ जाती थीं लेकिन, रेस्टोरेंट की व्यवस्था के बाद संक्रमण और गंदगी की समस्या से भी छुटकारा मिल गया है। चिड़ियाघर में आने वाले गिद्ध, कोल गिद्ध और दुर्लभ प्रजाति के ग्रिफॉन का संरक्षण करना उद्यान की प्राथमिकता है। एक माह के दौरान विपुल्प होने की कगार पर खड़े गिद्द बड़ी संख्या में यहां आकर ठहरे हैं और जल्द ही प्रजनन कर संख्या में बढ़ोतरी करेंगे।
आरटीआई एक्टीविस्ट ने दिया आईडिया
चिड़ियाघर में रोजाना घूमने आने वाले एनिमल आरटीआई एक्टिविस्ट अक्षय को मांसाहारी जानवरो द्धारा छोड़े गए खाने से दुर्गन्ध आती थी जिसकी शिकायत और भी दर्शको ने की थी। इसी दौरान अक्षय के दिमाग में एक आईडिया और उसने जू के डॉक्टर आरके सिंह के समक्ष रखा। अक्षय ने उन्हें बताया कि दुर्गन्ध के साथ ही विपुल्त हो रहे गिद्द और चीलों के लिए एक रेस्टोरेंट खोला जाए। अक्षय ने डॉक्टर को बताया कि रेस्टोरेंट को पूरी तरह से खुला रखा जाए और मांस के टुकड़े यहां पर रखें, जिससे की गिद्द और चील की नजर इन पड़े और वह यहां आकर अपना पेट भरें। साथ ही जू में ठिकाना बनाकर प्रजनन करें। चिड़ियाघर प्रशासन ने अक्षय का आईडिया मानकर रैप्टर्स रेस्टोरेंट खोला तो देखा पहले ही दिन से चील और कौवे वहाँ आकर भोजन का लुत्फ़ उठा रहे है।
पहले नेस्टिंग फिर ब्रीडिंग करेंगे
चिड़ियाघर के मुख्य चिकित्सक आर के सिंह का कहना है गिद्धों की संख्या देश में बहुत तेजी से कम हो रही है, इसलिए इनका संरक्षण किया जाना जरूरी है। जब झुंड में गिद्ध आएंगे तो स्वाभाविक है वह पहले नेस्टिंग फिर ब्रीडिंग (प्रजनन) करेंगे। इससे उनकी संख्या में इजाफा हो सकता है। वह केवल मीट खाकर उड़ न जाएं, इसलिए पास ही छोटा सा तालाब भी बनाया गया है। डॉक्टर आरके सिंह के मुताबिक पहले प्राणिउद्यान के अंदर अलग-अलग चार क्षेत्रों में मीट के टुकड़े डाले जाते थे। इससे दुर्गन्ध व संक्रमण फैलने का खतरा रहता था। बारिश के समय दिक्कतें बढ़ती थीं लेकिन रेस्टोरेंट की व्यवस्था के बाद संक्रमण और गंदगी की समस्या नहीं हैं। भारत में पाई जाने वाली प्रजातियां’ भारतीय गिद्ध,लंबी चोंच वाला गिद्ध , लाल सिर वाला गिद्ध, बंगाल का गिद्ध, सफेद गिद्ध इनकी जनसंख्या लगातार कम हो रही है रैपर्टस रेस्टोरेंट से ऐसी प्रजातियां यहां बड़ी संख्या में आ रही हैं और शांत माहौल देखकर यहाँ नेस्टिंग कर ब्रीडिंग करेंगी जिससे इनकी जनसंख्या में निश्चित इजाफा होगा।
Published on:
13 May 2018 12:48 pm
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