
सांकेतिक तस्वीर जेनरेट AI
देसी नुस्खों का असर अब सिर्फ घर-आंगन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि कारोबार की दुनिया में भी साफ दिख रहा है। हल्दी, तुलसी, गिलोय और आंवला जैसे परंपरागत औषधीय पौधे आज अरबों रुपये की आयुर्वेदिक इंडस्ट्री के आधार बन चुके हैं। बीते पांच वर्षों में आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री में करीब 40 फीसदी की छलांग लगी है। हर महीने लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार केवल हर्बल और आयुर्वेदिक वस्तुओं से हो रहा है।
कारोबारी बताते हैं कि कोरोना महामारी के बाद लोगों में आयुर्वेद और इम्युनिटी बढ़ाने वाले उत्पादों की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। यही कारण है कि गिलोय जूस, आंवला कैप्सूल, इम्युनिटी चाय, हर्बल टूथपेस्ट और यहां तक कि हर्बल लड्डुओं की मांग सबसे अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि युवा वर्ग भी अब इस लहर से जुड़ चुका है। पहले जहां आयुर्वेद को बुजुर्गों तक सीमित माना जाता था। वहीं अब हर्बल हेयर ऑयल, शैंपू और फेसवॉश युवाओं की पहली पसंद बन गए हैं। दि किराना मर्चेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुज अलंकार का कहना है कि कोरोना काल ने लोगों को देसी इलाज की अहमियत फिर से याद दिलाई। नतीजा यह हुआ कि आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री में अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई है।
इस बीच, नवरात्रि के मौके पर नेपाल से आने वाली जड़ी-बूटियों की मांग भी उफान पर है। नयागंज किराना बाजार में चिरायता, कुटकी, दारू हल्दी जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों की खपत बढ़ी है। साथ ही बड़ी इलायची, तेजपत्ता, सुगंधवाल और कोकिला जैसे हवन में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की बिक्री भी रफ्तार पकड़ रही है। हालांकि कुछ दिन पहले नेपाल में उपद्रव के चलते आपूर्ति बाधित रही थी, मगर अब फिर से स्टॉक बाजार तक पहुंचने लगा है। कुल मिलाकर देसी नुस्खों की ओर लौटती जनता ने आयुर्वेद के कारोबार को नई ऊंचाई दी है। परंपरागत औषधियां और हर्बल उत्पाद अब आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। जिससे यह सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।
Published on:
23 Sept 2025 12:42 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
