6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस गांव के लोग विचित्र, यहां युवाओं को बनाया जाता हैं तांत्रिक

अकबपुर कोतवाली अंतर्गत आने वाले गांव श्रवणखेड़ी में 50 से ज्यादा लोग तंत्र-मंत्र करते हैं। इसके साथ लोगों को तांत्रिक की विद्या भी दे रहे हैं

3 min read
Google source verification

image

Ruchi Sharma

Oct 08, 2016

Black magic

Black magic

कानपुर. अकबपुर कोतवाली अंतर्गत आने वाले गांव श्रवणखेड़ी में 50 से ज्यादा लोग तंत्र-मंत्र करते हैं। इसके साथ लोगों को तांत्रिक की विद्या भी दे रहे हैं। 700 आबादी वाले इस गांव में रहने वाले इन लोगों के कमाई का यही जरिया भी है। सुबह होते ही यहां पर तंत्र -मंत्र का खेल शुरू हो जाता है, जो देररात चलता रहता है। इतना ही नहीं गांव के बाहर एक काली मां का मंदिर है, जहां युवाओं को नवरात्र से लेकर दिवाली की देररात तक तंत्र मंत्र की विद्या सिखाई जाती है। तांत्रिक युवाओं को बकायदा एक माह तक तंत्र साधना की रात में ट्रेनिंग देते हैं और बदले में मुंहमागी रकम एठते हैं। तांत्रिक नवरात्र के पहले दिन तंत्र मंत्र के गुर युवाओं के देते हैं और उन्हें घर में जाकर साधना को कहते हैं।


पुलिस जानकर भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती। सूत्रों का यहां तक कहना है कि कुछ माह पहले बिधनू थाने में एक इंस्पेक्टर ट्रांसफर पर आए थे। क्राइम पर कंट्रोल के साथ दूसरी जगह पोस्टिंग न हो इसके लिए तांत्रिक का सहारा लिया था। थाने में विधिवत हवन व पूजन करवाया गया और तांत्रिक ने इंस्पेक्टर को ताबीज भी बनाकर दी थी। वह इंस्पेक्टर कई माह बिधनू थाने में बिताए और बड़े खुलासे भी किए। फलस्वरूप उनका प्रमोशन कर चकेरी थाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वह ताबीज यहां काम नहीं आई और एक मामले पर उन्हें सस्पेंड तक कर दिया गया।

पांच से लेकर पचास हजार है इनकी फीस

पतारा निवासी रमेश रैदास ने बताया कि इस मंदिर पर तंत्र मंत्र की साधना की प्रथा सैकड़ों साल पुरानी है। पहले इस मंदिर पर गुरु हरीप्रसाद रहा करते थे और इलाके के लोगों को भूत प्रेत से पीड़ितों को तंत्र मंत्र के जरिए ठीक किया करते थे। लेकिन उनकी मौत के बाद मंदिर पर उनके शिष्यों ने कब्जा कर लिया। इस मंदिर के आस पास चार दर्जन तांत्रिक सुबह होते ही जमा हो जाते हैं और पीड़ितों के साथ युवाओं को तांत्रिक बनाते हैं। इसके बदले यह लोग युवाओं से पांच से लेकर पचाज हजार रुपए बतौर फीस के तौर पर लेते हैं।जब वह तंत्र मंत्र में महारत हासिल कर लेता है तो उसे काम भी यही लोग दिलवाते हैं। इनकी तंत्र विद्या बड़ी कठिन होती है और सिद्दी के दौरान कई युवाओं की मौत भी हो चुकी है।

तंत्र -मंत्र की करने लगा साधना

तंत्रमंत्र की विद्या पाने के लिए एक युवक रोजाना श्मसान में दो घंटे पूजा करता था। इसी को लेकर उसने घर पर आकर खुद को कमरे में बंद कर लिया और फांसी लगा ली। कानपुर देहात के श्रवणखेड़ा गांव का रहने वाला विनय कुमार नौबस्ता थानाक्षेत्र के संजय गांधी नगर में रहता था। उसकी सात माह पूर्व ही नीतू से उसकी शादी हुई थी और वह मां मंजू व पत्नी के साथ यहां रहता था। विनय पहले हलवाई का काम करता था, लेकिन 4 दिनों से वह तंत्रमंत्र की विद्या ग्रहण करने की सनक सवार हो गई। वह काला जादू और तंत्रमंत्र की किताबें पढ़ने लगा और पूजा करने लगा। बुधवार को सुबह वह घर आया और पत्नी की साड़ी से पंखे के कुंडे के सहारे फांसी लगा ली। घटना देख परिजनों के होश उड़ गए। परिजनों ने बताया कि वह जब फांसी लगा रहा था तो कह रहा था कि मैं मरुंगा नहीं, कुछ घंटे बाद जीवित हो जाऊंगा। मैं अपने गुरु से मिलने के लिए जा रहा हूं कहकर झूल गया और उसकी मौत हो गई।

तंत्र-मंत्र की सनक बना मौत का कारण

मृतक की बहन रीना ने बताया कि भाई विनय की सात माह पहले ही बर्रा की रहने वाली नीतू से हुई थी। भाई शादी बारातों में हलवाई का काम करता था। लेकिन शादी समारोह का सीजन नहीं चल रहा था तो उसको तंत्रमंत्र सीखने की सनक सवार हो गई। वहा श्रवणखेड़ा गांव गया और वह तंत्र-मंत्र की विद्या सीखने लगा। वह किताबे ढूंढ-ढूंढ कर लाने लगा और घर में अध्ययन करने लगा। किताबों में जैसे पूजा की विधि लिखी होती थी उसी तरह वह पूजा करता था। बीती शाम वह घर लौटा तो उसके पास अगरबत्ती, बताशे और नीबू था और चेहरा बिल्कुल लाल था। वह बहुत डरा हुआ था, जब उससे पूछा गया कि क्या बात हो गई, तो वह पूरे घर को गालियां बकने लगा। इसके बाद अपने कमरे में चला गया, वह अक्सर घाट से लौटने के बाद कमरे में बंद कर कई घंटे तक पूजा किया करता था। नौबस्ता थानाध्यक्ष राजीव द्विवेदी के मुताबिक मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों की तरफ से किसी प्रकार की तहरीर नहीं मिली है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण स्पष्ट हो पायेगा।