
अब काली खांसी ने बोला बच्चों पर धावा
कानपुर। बारिश का मौसम खत्म होने को है और अब देखते ही देखते बुखार, डेंगू, खांसी, डायरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे है. साथ ही साथ काली खांसी यानी डिफ्थीरिया फैलाने वाले बैक्टीरिया ने भी हमला बोला है. मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग अस्पताल में डिफ्थीरिया से पीडि़त बच्चे लगातार भर्ती हो रहे हैं. यह बच्चे कानपुर और आसपास के जिलो से आए हैं. बच्चों के लगातार भर्ती होने के चलते आईडीएच के रैबीज वार्ड में उन्हें भर्ती करना पड़ा है.
एकसाथ भर्ती हुए कई बच्चे
इंफेक्शंस डिसीज हॉस्पिटल में 1 सितंबर से अब तक डिफ्थीरिया के शिकार 29 बच्चों को भर्ती किया गया है. इसमें कानपुर के अलावा, औरेया, जालौन,बांदा के बच्चे भी है. कार्डियोलॉजी की नई ओपीडी शुरू होने से आईडीएच में बना डिफ्थीरिया वार्ड खत्म हो गया. इस वजह से इन बच्चों को टिटनेस व रैबीज वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है.
इस वजह से और ऐसे होता है डिफ्थीरिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉरीनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया बैक्टीरिया का इंफेक्शन फैलाता है. यह बैक्टीरिया गले और टांसिल्स पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है और उसे इंफेक्टेड कर देता है. बैक्टीरिया का असर गले नाक और मुंह पर पड़ता है समय पर इलाज नहीं होने से बैक्टीरिया पूरे शरीर में फैल जाता है. बारिश के मौसम में ही इसका बैक्टीरिया सबसे ज्यादा फैलता है.
ऐसे करेंगे डिफ्थीरिया की पहचान
बताया गया है कि इस बैक्टीरिया के संक्रमण फैलने में 2 से 5 दिन लगते हैं. पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत होती है. बच्चे को ठंड लगती है और बुखार आता है. उसको खांसी आती है और खांसी की आवाज भी अजीब सी होती है. शरीर का रंग भी धीरे-धीरे नीला पडऩे लगता है और बैचेनी होती है.
ऐसा कहते हैं जानकार
आईडीएच के सीएमएस डॉ. एके शुक्ला कहते हैं कि डिफ्थीरिया के काफी मामले सामने आए हैं. इनमें ज्यादातर बच्चे है, जिन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. बच्चों काफी नाजुक हालत में आए हैं, लेकिन इलाज से काफी बच्चे सही भी हुए है.
Updated on:
17 Sep 2018, 8:37 AM IST
Published on:
17 Sep 2018, 8:37 AM IST
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