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करोड़ों की लागत के साथ माइक्रो सरफेसिंग टेक्निक से बनेंगी सड़कें, ऐसे होगा कमाल

शहर की ज्यादातर सड़कें गड्ढों में गुम हो चुकी हैं. करोड़ों की लागत से बनीं ये सड़कें चंद दिनों की बारिश में गड्ढों में तब्दील हो गईं. इन्हें दोबारा बनाने के लिए फिर से भारी भरकम बजट की जरूरत है.

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Kanpur

करोड़ों की लागत के साथ माइक्रो सरफेसिंग टेक्निक से बनेंगी सड़कें, ऐसे होगा कमाल

कानपुर। शहर की ज्यादातर सड़कें गड्ढों में गुम हो चुकी हैं. करोड़ों की लागत से बनीं ये सड़कें चंद दिनों की बारिश में गड्ढों में तब्दील हो गईं. इन्हें दोबारा बनाने के लिए फिर से भारी भरकम बजट की जरूरत है. इस वजह से अब शहर में नई तकनीक से सड़कों का निर्माण किया जाएगा. इससे कम से कम 7 साल तक सड़कों को सुरक्षित किया जा सकेगा.

नगर निगम करेगा ये काम
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार, कोल्ड मिक्स टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर नगर निगम सड़कों का निर्माण करेगा. इसके लिए अभी ट्रायल के तौर पर 1 किमी. सड़क का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है. माइक्रो सरफेसिंग कर सड़कों के ऊपर 6 मिमी. की कोटिंग की जाएगी, इससे न तो नमी और न ही पानी की एक भी बूंद सड़क के नीचे जा पाएगी. इससे सालों तक सड़क में एक भी गड्ढा नहीं होगा.

इस्‍तेमाल किया जाएगा ये विशेष केमिकल
शहर में इस तकनीक का इस्तेमाल कर जोन-4 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से मोतीझील चौराहे तक 1 किमी. रोड को माइक्रो सरफेसिंग किए जाने का प्रस्ताव है. पूर्व पीडब्ल्यूडी अधिकारी वीके मौर्य बताते हैं कि माइक्रो सरफेसिंग तकनीक के अंतर्गत कंक्रीट मिक्स्चर में एक विशेष केमिकल मिलाया जाता है, जो सड़क को सूखने के बाद मजबूती प्रदान करता है. इससे सड़क की ऊपर सतह काफी लंबे समय तक चलती है और सड़क में एक भी गड्ढा नहीं होगा. वहीं इस जर्मन तकनीक से सड़क पर पानी और नमी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. आधुनिक मशीनों के माध्यम से 6 मिमी. मोटी केमिकल की लेयर को बिछाई जाएगी.

महंगी है तकनीक
माइक्रो सरफेसिंग तकनीक काफी महंगी होने की वजह से इसके निर्माण को लेकर नगर निगम काफी विचार कर रहा है. फिलहाल प्राइवेट कंपनी ने 1 किमी. सड़क पर माइक्रो सरफेसिंग करने के लिए 42 लाख का खर्चा बताया है. इसको लेकर नगर आयुक्त ने इस मामले में हर तकनीकी पहलू की जांच करने के लिए चीफ इंजीनियर को निर्देश दिए हैं.

पहले भी मिल चुका है ट्रायल
प्राइवेट कंपनी द्वारा 1 साल पहले भी इस तकनीक से मोतीझील कैंपस में ट्रायल के तौर पर सड़क का निर्माण किया था. तत्कालीन नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने यह ट्रायल करवाया था. लेकिन वित्तिय संकट से जूझ रहे नगर निगम ने इस तकनीक को अपनाने में असमर्थतता जताई थी.