
OMG! कानपुर में प्रदूषण पहुंचा खतरे के निशान के भी ऊपर
कानपुर। कानपुर में प्रदूषण के चलते हालात खतरनाक हो चले हैं. इस हफ्ते में चौथे दिन कानपुर देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा. एयर क्वालिटी इंडेक्स में कानपुर में प्रदूषण का स्तर सीवियर यानी खतरनाक रहा. पार्टिकुलेटेड मैटर 2.5 का स्तर मानक से 7 गुना ज्यादा दर्ज किया गया. क्या है इसके आगे की जानकारी, आइए जानें.
ऐसी मिली है जानकारी
कानपुर में इस हफ्ते चार दिन प्रदूषण का स्तर देश में सर्वाधिक दर्ज किया गया. एयर क्वालिटी इंडेक्स में 23 अक्टूबर को पीएम 2.5 का स्तर 378 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था. वहीं 24 अक्टूबर को यह कुछ कम होकर 363 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा. हालांकि प्रदूषण का यह स्तर भी देश के किसी भी शहर से सबसे ज्यादा था. वहीं 25 अक्टूबर को फिर प्रदूषण का स्तर बढ़कर 381 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया. एयर क्वालिटी इंडेक्स में प्रदूषण के इस स्तर को बेहद खराब माना जाता है. वहीं शनिवार को फिर पॉल्यूशन का स्तर बढ़ा और यह खतरनाक स्थिति में 418 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया.
ऐसा है कहने का मतलब
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने एयर क्वालिटी के मुताबिक पॉल्यूशन के स्तर को छह श्रेणियों में बांटा गया है. मानक स्तर पर प्रदूषण होने पर इसे अच्छा यानी कि गुड माना जाता है. वहीं मानक से थोड़ा ज्यादा होने पर इसे सेटिस्फैक्ट्री माना जाता है. प्रदूषण का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा होने पर इसे मॉडरेटेड कैटेगरी में रखा जाता है. प्रदूषण का स्तर 4 गुना तक बढ़ने पर इसे पुअर माना जाता है. यानी कि इससे सांस लेने में समस्या होने की संभावना रहती है. वहीं प्रदूषण का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से बढऩे पर वैरी पुअर कैटेगरी होती है. इसमें प्रदूषण का रेस्पेरेटरी सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है.
तब स्थिति होती है और भी ज्यादा खतरनाक
यह स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक होती है, जिसमें प्रदूषण का स्तर 400 माइक्रोग्राम से भी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसी आबोहवा का असर स्वस्थ लोगों पर भी पड़ता है और जिन्हें पहले से ही अस्थमा या लंग्स से जुड़ी प्रॉब्लम हैं उनके लिए यह स्थिति बेहद नाजुक मानी जाती है.
Published on:
28 Oct 2018 03:09 pm
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