
हड्डियां गलने से चेहरा बिगड़ा, दस घंटे के आपरेशन से लौटी मुस्कान
कानपुर . नरेंद्र पाठक अपनी जिंदगी की उम्मीद छोड़ चुके थे। पांच साल पहले उनके मसूड़ों में दर्द हुआ तो सामान्य समझकर घरेलू इलाज करते रहे। मर्ज बढ़ता गया तो डेंटिस्ट के जरिए इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले लार के साथ मवाद निकलने लगा। साथ ही चेहरे की बनावट बिगडऩे लगी। सीटी स्कैन हुआ तो मालूम हुआ कि पाठक के चेहरे के बाएं हिस्से की हड्डी गल रही हैं। डाक्टर्स ने बताया कि उन्हें ऑस्टियोमाइलाइटिस नामक बीमारी है, जोकि एक लाख में एक-दो लोगों को होती है। वक्त पर इलाज नहीं मिला तो मौत मुमकिन है। नरेंद्र कई डाक्टर्स से मिले, लेकिन चेहरे के इतने बड़े हिस्से की प्लास्टिक सर्जरी करने को कोई तैयार नहीं था। ऐसे में डॉ. रजनीश ने हिम्मत बांधी और नरेंद्र के चेहरे को नकली हड्डियों ने नया जैसा बनाकर मुस्कान लौटा दी है। चेहरे के समूचे बाएं हिस्से की हड्डियों को निकालकर इम्प्लांट के जरिए नया रूप देने का यह देश का पहला मामला है।
मसूड़ों की मामूली चोट को नजरअंदाज करना भारी पड़ा
नरेंद्र पाठक पान-मसाला वगैरह नहीं खाते हैं, बावजूद चेहरे की हड्डियों के गलने की बीमारी ने उन्हें परेशान कर दिया था। पड़ताल के बाद डॉ. रजनीश साहू ने बताया कि ऑस्टियोमाइलाइटिस नामक बीमारी किसी पुरानी चोट के नासूर बनने अथवा चोट में पॉयोजेनिक बैक्टीरिया के पहुंचने के कारण पनपती है। इस जानकारी के बाद नरेद्र पाठक ने बताया कि पांच साल पहले मसूड़ों में चोट लगी थी। उस वक्त फौरी इलाज से खून रिसना बंद हो गया तो नजरअंदाज कर दिया। डॉ. रजनीश के मुताबिक, मसूड़ों की चोट में पॉयोजेनिक बैक्टीरिया पहुंच गया और धीरे-धीरे मरीज की हड्डियां गलने लगीं, जोकि मवाद के रूप में बाहर निकलती रही थीं।
बायां हिस्सा खत्म हो चुका था, अब फिर पुराने जैसा
ऑस्टियोमाइलाइटिस बीमारी के कारण नरेंद्र पाठक के चेहरे के बायीं ओर आंख के नीचे की हड्डी, कान के आगे की हड्डी, ऊपरी जबड़ा, तालू की हड्डी गल चुकी थीं। डॉ. रजनीश ने मुंबई से 90 गुणा 80 गुणा 60 मिमी साइज का इम्प्लांट बनवाया। इसके बाद साढ़े नौ घंटे के लंबे ऑपरेशन के दौरान नरेंद्र के चेहरे की खराब हड्डियों को निकालकर इम्प्लांट को फिट कर दिया। ऑपरेशन के दौरान इस बात का खास ख्याल रखा गया कि चेहरे के बाएं हिस्से की बनावट हूबहू दाएं हिस्से जैसी रही। ऑपरेशन के पांच दिन बाद नरेंद्र का चेहरे बिल्कुल सामान्य है, सिर्फ बाएं हिस्से में सर्जरी के निशान हैं, जोकि वक्त के साथ हल्के पड़ेंगे।
देश का पहला ऑपरेशन, एक लाख में एक मरीज
डॉ, रजनीश का दावा है कि ऑस्टियोमाइलाइटिस बीमारी के कारण शरीर के इतने बड़े हिस्से से हड्डियों को निकालकर इम्प्लांट को फिट करने का यह पहला ऑपरेशन है। इम्प्लांट तैयार करने वाली कंपनी ने भी बताया है कि उन्होंने देश में अभी तक इतना बड़ा इम्प्लांट तैयार नहीं किया है। गौरतलब है कि ऑस्टियोमाइलाइटिस नाम जितना सुनने में मुश्किल और अनसुना है, यह मेडिकल साइंस में उतना ही असामान्य नाम भी है। इस बीमारी में इंफेक्शन के कारण हड्डियां गलने लगती है, जोकि धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है। मेडिकल जर्नन के अनुसार यह बीमारी एक लाख लोगों में एक-दो लोगों को होती है।
वयस्कों के साथ-साथ बच्चे और डायबिटिक भी खतरे में
ऑस्टियोमाइलाइटिस की चपेट में बड़ों के साथ-साथ बच्चों और मधुमेह से पीडि़तों में फैल सकती है। मधुमेह की स्थिति में घाव सूखने के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है। पैर की छोटी ऊंगुली में अल्सर के रास्ते भी पॉयोजेनिक बैक्टीरिया के शरीर के अंदर घुसने की संभावना होती है। बैक्टीरिया के प्रभाव वाले हिस्से में हल्की सूजन रहती है। इसके अलावा बच्चों या नवजात में खून की जांच के समय या ड्रॉप देते समय भी बैक्टीरिया खून में प्रवेश कर सकते हैं।
बीमारी का लक्षण
हड्डियों में दर्द, हड्डियों में सूजन, बुखार, मांसपेशियों की ऐंठन, जोड़ों में दर्द स्थानीय लालिमा, पीठ के दर्द का बढऩा, खून का थक्का बनना, प्रभावित हिस्से में मवाद, हड्डियों में सूजन, आदि ऑस्टियोमाइलाइटिस बीमारी के लक्षण हैं।
Published on:
01 Jul 2018 05:20 pm
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