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राम नाइक बोले – एक साल का मेहमान हूं, उद्घाटन मुझे ही करना है

राष्ट्रपति रामनाथ ने ऑडिटोरियम की बुनियाद रखी, सदस्यता का प्रस्ताव विनम्रता से ठुकराया

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राम नाइक बोले - एक साल का मेहमान हूं, उद्घाटन मुझे ही करना है

कानपुर. रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम हॉल खचाखच भरा था। सीटों के मध्य रिक्त स्थानों पर भी लोग खड़े थे। इंतजार था राष्ट्रपति रामनाथ का। किसी वक्त एडवोकेट के रूप में कॅॅरियर शुरू करने वाले रामनाथ कोविंद को देखने के लिए न्यायपालिका से नाता रखने वालों तथा कानपुर के वकीलों को कोविंद की झलक देखने की बेताबी थी। करीब 11.30 बजे इंतजार खत्म हुआ। कानपुर की माटी से जुड़े रामनाथ कोविंद आए और कनपुरिया वकीलों को नसीहतों की घुट्टी देकर पिछड़ों और शोषितों के लिए न्याय की लड़ाई लडऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहाकि काले कोट की गरिमा बनाए रखना नौजवान वकीलों का दायित्व है। वकालत का पेशा उम्मीदों से जुड़ा है, इसलिए जल्द से जल्द न्याय दिलाने की कोशिश होनी चाहिए। समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना के पिता राम अवतार महाना की स्मृति में कचेहरी में ऑडिटोरियम निर्माण के लिए शिलान्यास भी किया। इस दौरान मौजूद विशिष्ट अतिथि और यूपी के राज्यपाल ने चुटकी लेते हुए कहाकि सरकारी काम में समय और लागत बढ़ जाती है, लेकिन ऑडिटोरियम का निर्माण वक्त पर किया जाए, क्योंकि मेरा कार्यकाल एक वर्ष शेष है और उद्घाटन मुझे ही करना है। जवाब में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कहाकि निर्माण सामग्री वह वक्त पर मुहैया कराते रहेंगे, शेष बार एसोसिएशन जैसा चाहे, वैसा निर्माण कराए।


गरीब और कमजोर व्यक्ति का डर दूर कीजिए

आईआईटी के इंजीनियर्स को राष्ट्रभक्ति की घुट्टी पिलाने के अगले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर के वकीलों को दायित्व समझाए। उन्होंने कहाकि वकील ही समाज को दिशा देते हैं, लेकिन आज के दौर में गरीब और कमजोर व्यक्ति अदालत आने से डरता है। कारण यहकि कोर्ट-कचेहरी में फंसने के बाद उन्हें तमाम दिक्कतों से जूझना होता है, इसके साथ ही न्याय भी वक्त पर नहीं मिलता है। राष्ट्रपति ने कहाकि यह देखकर दुख होता है कि न्याय हासिल करना भी महंगा हो गया है। ऐसे में वकालत के पेशे से जुड़े लोगों का दायित्व है कि गरीबों और कमजोर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए खुद आगे बढ़ें। ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि त्वरित न्याय मिले। इस दिशा में लोक अदालत और मध्यस्थ के जरिए मामलों को सुलझाने की पहल अनुकरणीय है।


तारीख लेने से बचें, बहस की आदत डालें

राष्ट्रपति ने समझाया कि कोशिश होनी चाहिए कि मुकदमों को जल्द से जल्द निबटाया जाए। इसके लिए वकीलों को तारीख लेकर मुकदमों को लटकाने के बजाय बहस करने की आदत डालनी होगी। किसी भी सूरत में मुकदमों को लंबित रखने की प्रवृत्ति छोडऩी होगी। आए दिन छोटी-छोटी बातों पर हड़ताल करना भी उचित नहीं है। मामूली झगड़ों को मिल-बैठकर निबटाना चाहिए। उन्होंने कहाकि सवोच्च पद पर आसीन होने के कारण देश का प्रत्येक नागरिक समान है, ऐसे में देश के प्रत्येक हिस्से का वकील भी एक समान है, लेकिन कानपुर के प्रति विशेष अनुराग है। इसी कारण यहां के वकीलों से अपेक्षा भी ज्यादा है कि समाज की दिशा और विकास के लिए बढ़-चढक़र योगदान देंगे।

बार एसोसिएशन की सदस्यता को विनम्रता से ठुकराया

कार्यक्रम के दौरान कानपुर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को कानपुर बार एसोसिएशन की सदस्यता का प्रस्ताव देते हुए आग्रह किया कि चूंकि राष्ट्रपति कानपुर के निवासी हैं तथा उन्होंने अपना कॅरियर बतौर एडवोकेट शुरू किया था। ऐसे में उन्हें कानपुर बार एसोसिएशन का सदस्य होना चाहिए। इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए राष्ट्रपति ने कहाकि देश के सर्वोच्च पद के दायित्व का निर्वहन करने के कारण किसी संस्था से जुडऩा उचित नहीं है। इसी कारण वकालत की डिग्री त्याग चुका हूं और सुप्रीमकोर्ट बार एसोसिएशन की सदस्यता को छोड़ चुका हूं। ऐसे में कानपुर बार एसोसिएशन से जुडऩा मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहाकि कानपुर की कचेहरी से विशेष लगाव है। डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौर में अक्सर ही कचेहरी आना होता था। फूलबाग और सरसैया घाट जाने के लिए कचेहरी का रास्ता तय करता था। बावजूद सदस्य बनना मुमकिन नहीं है।