
पेट्रोल की जगह गाडिय़ों में मेथेनॉल का प्रयोग कम करेगा वायु प्रदूषण
कानपुर। पर्यावरण को मशीनों से हो रहे नुकसान से बचाने के लिए यह जरूरी है कि मशीनों के निर्माण से पहले ऐसी पॉलिसी बनाई जाए जिससे प्रदूषण कम हो सके। गाडिय़ों के धुंए से बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के लिए पेट्रोल की जगह मेथेनॉल का प्रयोग काफी हद तक मददगार साबित होगा।
आईआईटी में हुई चर्चा
कानपुर आईआईटी में स्टूडेंट्स ओपेनियम सोसाइटी की ओर से पॉलिसी कॉनक्लेव का आयोजन हुआ। जिसमें इंजीनियरिंग सॉल्यूशन फॉर पॉलिसी मेकिंग पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मशीनों के जरिए हर समस्या का हल खोजा जा सकता है।
पेट्रोल की जगह मेथेनॉल
मेथेनॉल सबसे सरल अल्कोहल है। यह हल्का, वाष्पशील, रंगहीन, ज्वलनशील, द्रव है जिसकी गन्ध एथेनॉल (पेय अल्कोहल) जैसी होती है। किन्तु मेथेनॉल अत्यन्त विषैला है और पीने के लिये बिल्कुल अनुपयुक्त है। इसके पीने से मनुष्य मर सकता है और मरने से पहले वह अंधा होता है। सामान्य ताप पर यह द्रव अवस्था में होता है। इसका उपयोग एन्टीफ्रीज, विलायक, ईंधन, आदि के रूप में होता है। यह एथेनॉल के विकृतिकारक के रूप में भी प्रयुक्त होता है। यह बायोडीजल के उत्पादन में भी उपयोगी है। इसलिए पेट्रोल की जगह मेथेनॉल का प्रयोग कर प्रदूषण कम किया जा सकता है।
कम होगा खर्चा
पेट्रोल की जगह मेथेनॉल की कीमत कम होती है और यह वातावरण भी प्रदूषित नहंी करता। यह पेट्रोल से तीन गुना सस्ता है। साथ ही मेथेनॉल के बढ़ते प्रयोग से पेट्रोल की खपत कम होने से उसके दाम भी कम हो जाएंगे। वैज्ञानिकों ने पेट्रोल डीजल की जगह मेथेनॉल का प्रयोग फ्यूल के रूप में करने की सलाह दी है।
प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या
आईआईटी के इंडस्ट्रियल एंड मैनेजमेंट विभाग के डॉ. अनूप सिंह ने कहा कि प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसका इस तरह निस्तारण खोजना होगा कि उससे दूसरी समस्या न पैदा हो सके।
Published on:
26 Jan 2019 01:11 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
