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राष्ट्रपति को कानपुर विकास कार्यों की रूपरेखा की दी गई जानकारी, हैलट को एम्स का दर्जा देने की मांग

-राष्ट्रपति से चर्चा के दौरान की कानपुर के हैलट अस्पताल को एम्स का दर्जा देने की मांग,-रिंग रोड की जानकारी पर राष्ट्रपति बोले शहर के यातायात को मिलेगी गति,-शहर के कई विकास कार्यों की जानकारी अफसरों ने दी,

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राष्ट्रपति को कानपुर विकास कार्यों की दी गई जानकारी, हैलट को एम्स का दर्जा देने की मांग

राष्ट्रपति को कानपुर विकास कार्यों की दी गई जानकारी, हैलट को एम्स का दर्जा देने की मांग

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. तीन दिवसीय दौरे पर कानपुर आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द (President Ramnath Kovind) ने सोवार को सर्किट हाउस (Circuit House Kanpur) में कानपुर के विकास कार्यों पर अफसरों से चर्चा की। इस बीच शहर के रिंग रोड प्रोजेक्ट को देखा तो बोले कानपुर यातायात के लिए यह बड़ा अच्छा प्रोजेक्ट है। अब कानपुर पुलिस कमिश्नरेट बन गया है तो यहां की यातायात व्यवस्था और सुदृढ़ होनी चाहिए। जिससे शहर की सड़कों पर जाम की समस्या उत्पन्न न हो। मंडलायुक्त डाक्टर राजशेखर (Commissioner Kanpur Cr. Rajshekhar) ने उन्हें रिंग रोड का खाका बताते हुए कहा पांच चरणों में यह रिंग रोड बनेगा। इससे बाहर से आने वाले वाहन बाहर से ही निकल जायेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि केडीए अपनी जमीनों को सुरक्षित कर उन पर अच्छी योजनाएं बनाए।

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समग्र विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव ने उन्हें पनकी-विषधन नहर पटरी पर फोर लेन सड़क प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी। और कहा कि इससे दक्षिण की ओर जाने वाला यातायात आसानी से चला जाएगा। इसका लाभ उद्योगों को भी मिलेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को वे दिखवाएंगे। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न प्रोजेक्ट की बुकलेट उन्हें सौंपी गई। इस दौरान मौजूद सलिल विश्नोई ने उन्हें मांगपत्र दिया। उन्होंने कहा कि अनवरगंज-फर्रुखाबाद रेलवे लाइन का अफसरों की अगुवाई में सर्वे हो चुका है। जिसमें सामने आया कि ट्रैक हटने के बाद ही जाम खत्म होना संभव है। अभी शहर दो हिस्सों में बंटा है।

इसके अतिरिक्त ईएसआइ पांडु नगर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बिल्डिंग पूर्ण होने के साथ उपकरण और मशीनें भी आ गईं हैं, तीन साल गुजर गए, लेकिन चालू नहीं किया गया। सुरार गांव में 20 एकड़ भूमि पर आल इंडिया स्पीच एंड हियरिंग इंस्टीट्यूट बनने के लिए भूमि आवंटित हो चुकी। तीन साल गुजर गए, लेकिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि इसमें मूक बधिर बच्चे बीटेक, एमटेक, पीएचडी आदि कर सकेंगे। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कालेज से संबद्ध हैलट अस्पताल को एम्स का दर्जा दिया जाए। इस अस्पताल में कई जनपदों के लोग इलाज के लिए आते हैं।