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इस नेता ने कर्नाटक में निभाया अहम रोल, पीएम की रैलियों का तैयार किया रोडमैप

अमित शाह ने सौंपी जिम्मेदारी, 35 दिनों तक कर्नाटक में कमल खिलाने के लिए जुटे रहे सलिल विश्नोई

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अमित शाह ने सौंपी जिम्मेदारी, 35 दिनों तक कर्नाटक में कमल खिलाने के लिए जुटे रहे सलिल विश्नोई

कानपुर। भारती जनता पार्टी ने 2018 में दक्षिण में भी अपनी दस्तक दे दी। कर्नाटक चुनाव के दौरान अमित शाह के कहने पर कानपुर की आर्यनगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे व यूपी के महामंत्री सलिल विश्नोई पूरे 35 दिन कर्नाटक लाव-लश्कर के साथ डटे रहे। सलिल ने पीएम नरेंद्र मोदी की अधिकतर सभी रैलियों का रोडमैप तैयार किया, जिसके चलते कर्नाटक में कमल खिला। कानपुर-बुंदेलखंड के मीडिया प्रभारी मोहित पांडेय ने बताया कि महामंत्री वहां के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर बूथ लेबल तक कार्यकर्ताओं को पहुंचाया। इसके पहले सलित विश्नोई को पीएम की संसदीय क्षेत्र बनारस में निकाय चुनाव के दौरान प्रभार सौंपा गया था, जहां भाजपा को जबरदस्त सफलता मिली थी।
अमित शाह ने सलित को सौंपी जिम्मेदारी
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने निकाय चुनाव के दौरान यूपी के महामंत्री सलिल विश्नोई को बनारस की जिम्मेदारी थी। भाजपा ने यहां प्रचंड बहुमत के साथ नगर निगम में चुनाव जीता था। इसी के बाद उनका कद पार्टी में बड़ गया। राज्यसभा चुनावों में इन्हें टिकट दिए जाने के संकेत मिले और अधिकारिक तौर पर घोषणा भी कर दी, लेकिन एन वक्त पार्टी हाईकान ने राज्यसभा में इन्हें नहीं भेजा। जानकारों का मानना है कि सलित विश्नोई को 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी उतार सकती है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि महांमत्री 5 मई को कानुपर से बंगलुरू के लिए निकले थे और पूरे 35 दिन तक वहां रूके। रायचूर जिले में पीएम की सभा का इन्हें जिम्मा सौंपा।
यूपी की तर्ज पर लड़ा गया चुनाव
भाजपा ने 2017 से पहले यूपी को छह भागों में बांटा और हर क्षेत्र का अध्यक्ष व संगठन में पदाधिकारियों को बैठाया। कानपुर-बुंदेलखंड परिक्षेण में 20 हजार बूथ प्रमुख बनाए गए। साथ ही 28 विस्तारकों की नियुक्ति की गई, जो मतदान से करीब आठ माह पहले अपने-अपने घरों को छोड़ दिया और गांव, मोहल्लों और कस्बों में रात गुजारी। वहां पर लोगों के साथ चौपाल लगाकर भाजपा की विचारधारा से अवगत करा जीत की अधारशिला रखी। डीएबी कॉलेज के प्रोफेसर अनूप सिंह बताते हैं कि भाजपा ने 223 सीटों करीब 78 हजार पांच सौ पन्ना प्रमुखों को बूथों पर तैनात किया था। जबकि अन्य विपक्षी दल रैलियों और भाषणों में अपने आपको सीमित रखा। प्रोफेसर अनूप सिंह ने बताया कि कर्नाटक का पूरा चुनाव यूपी की तर्ज पर लड़ा गया और यहां से कई नेताओं को वहां पर पहले से भेज दिया था।
विश्नोई और बीएस येदियुरप्पा के बीच दोस्ती
यूपी भाजपा के महांमत्री सलिल विश्नोई समाज से आते हैं। कर्नाटक के कई जिलों में विश्नोई समाज के अच्छे खासे वोट हैं और इसी के चलते बीएस येदियुरप्पा ने अपने मित्र सलिल विश्नोई को बेंगलेरू आने का आंमत्रण दिया। सलिल विश्नाई ने कर्नाटक में कई जिलों में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ लोगों के घर-घर गए। सलित ने दर्जनभर से ज्यादा जिलों में नुक्कड़ सभाएं की और भाजपा के पक्ष में महौल तैयार किया।रायचूर जिले में पीएम की रैली के लिए जब पीएम मोदी वहां पहुंचे तो सलिल विश्नोई उन्हें रिसीब किया। इस दौरान उन्होंने सलिल विश्नोई से चुनावी महौल पर चर्चा की। जहां-जहां सलिल ने चुनाव का चक्रव्यूह रचा, वहां-वहां कमल खिला।