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कानपुर। तीन तलाक, खुला समेत सभी मामले का दिशा-निर्देश कुरआन में है। अल्लाह कुरआन में फरमाता है कि हमने इसको नाजिल किया और हम ही इसकी हिफाजत भी करेंगे। शरीयत की हिफाजत हम अपने जान-माल और औलाद से बढ़कर करेंगे। केंद्र सरकार इलेक्शन, सलेक्शन में मुसलमानों को उलझाने की कोशिश नहीं करे। यह बात तीन तलाक के मामले पर शहरकाजी मौलाना रियाज हशमती ने पत्रिका संवाददाता से बातचीत के दौरान कही। शहरकाजी ने कहा सरकार बदल सकती हैं लेकिन कानून -ए-एलाही नहीं बदल सकता क्योंकि शरीयत का कनून किसी इंसान ने नहीं, बल्कि अल्हाह ने बनाया है। सरकार को मुल्क की फिक्र करना चाहिए। मोदी सरकार को दहेज के लिये जलाई जा रहीं महिलाओं की फ्रिक नहीं है, उन्हें तीन तलाक की अचानक इतनी फिक्र क्यों हो गई।
शरीयत पर तब्दीली किसी भी कीमत पर नहीं
शरई कानूनों खासकर मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मसलों को लेकर देश में बढ़ती गफलत के लिए जानकारी और समुचित पालन के अभाव को जिम्मेदार ठहराते हुए शहरकाजी ने कहा कि मुल्क की ज्यादातर महिलाएं शरीयत से पूरी तरह संतुष्ट है। समुचित पालन नहीं होने से समस्याएं पैदा हो रहीं हैं। कहा कि इस्लामी शरीयत ऐसी नहीं है जो वक्त और हालात के हिसाब से बदली जाए। मुसलमान इसका सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं, इसलिये समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि शरीयत में किसी भी तरह की तब्दीली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बोर्ड की महिला सदस्यों की जिम्मेदारी है कि इस्लामी शरीयत की सही बातें औरतों तक ले जाएं।
धर्म को सियासत से दूर रखे केंद्र सरकार
शहरकाजी ने केंद्र की मोदी सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि धर्म को सियासत को दूर रखें। मुसलमान के धार्मिक मामलों पर दूर रहें। मुस्लमान पाक ए - कुरान के तहत अपने सारे मामले हल करता आ रहा है और आगे भी करता रहेगा। हम सरकार के किसी भी ऐसे कानून के खिलाफ हैं जो हमारे धर्म से जुड़ा है। काजी के मुताबिक देश में महिलाओं को हरदिन दहेज के नाम पर मौत के घाट उतारा जाता है, दहेज के नाम पर बेटियों की शादी नहीं हो पा रही हैं | हमारी मोदी सरकार को सलाह है कि इन पर कड़े कानून बनाने के लिए आगे आएं। मुस्लिमों के मसले हम पर छोड़ दें। देश की सरहद पर समय दें, बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराएं। इसी के चलते वह यूपी चुनाव फतह कर सकते हैं।
99 फीसदी मुस्लिम महिलाएं शरीयत से खुश
काजी के मुताबिक तीन तलाक का जो मामला उछाला जा रहा है, वह दरअसल महिलाओं को इस्लाम में दिए गए अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होने की वजह से उठ रहा है। इस्लाम ने महिलाओं को जितने अधिक अधिकार दिए हैं, उतने किसी और धर्म में नहीं मिले हैं। इस्लाम ने कई मामलों में तो औरतों को मर्दों से ज्यादा अधिकार दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की 20 करोड़ आबादी में शामिल करीब 10 करोड़ महिलाओं में से 99 प्रतिशत महिलाएं मुस्लिम पर्सनल लॉ से खुश हैं। शरीयत किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करती। इस्लाम में शादी एक अनुबंध है, जो दोनों पक्षों की मर्जी से होता है। मालूम हो कि हाल के दिनों में तीन तलाक को लेकर कुछ अदालती फैसलों के बाद शरीयत में महिलाओं के अधिकारों को लेकर देश में नए सिरे से बहस शुरू हो गई थी। ऑल इण्डिया मुस्लिम वुमेन पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि शरीयत कानून भारत में नहीं चल सकता। यह केवल इस्लामी मुल्कों में ही चल सकता है। ऐसे में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बयान के खिलाफ उतर आया और इसी के तहत शहरकाजी ने अपनी राय रखी।
Published on:
29 Oct 2016 06:22 pm
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