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लखनऊ-बनारस में सजेगा सियासी दंगल, मां-बेटी के बीच पटेल वोटों के लिए होगी जंग

कृष्णा पटेल मंच पर विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही हैं...

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Sonelal Patel Jayanti program in Lucknow and Varanasi

लखनऊ-बनारस में सजेगा सियासी दंगल, मां-बेटी के बीच पटेल वोटों के लिए होगी जंग

कानपुर. अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की जयंती सोमवार को मनाई जाएगी। इसके लिए डॉक्टर पटेंल की पत्नी कुष्णा पटेल ने बनारस को चुना तो उनकी बेटी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया ने लखनऊ में अपनी ताकत दिखाएंगी। मां-बेटी पटेल वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए यूपी के सभी जिलों से कार्यकर्ताओं को बुलाया है तो वहीं दोनों के मंच में सत्तापक्ष व विपक्ष के नेता मौजूद रहेंगे। दो जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम में अनुप्रिया के मंच में मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान मुख्य वक्ता होंगे। इसके साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। वहीं कृष्णा पटेल मंच पर विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही हैं। उनकी तरफ से बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी की तरफ से नरेश उत्तम के अलावा कांग्रेस की ओर से सांसद डॉक्टर संजय सिंह, रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रमेश दीक्षित शामिल होंगे।

दो धड़ों में बंटा अपना दल

कुर्मी-किसान-कमेरों- पिछड़ों को शोषण के विरुद्ध मंच उपलब्ध कराने और पिछड़ों-किसानों में राजनीतिक अलख जगाने के लिए डॉक्टर सोनेलाल पटेल ने जिस अपना दल की स्थापना की थी. आज वो दो धड़ों में बंट गया है। डॉक्टर सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल के साथ उनकी एक बेटी पल्लवी पटेल हैं जो सत्ता से दूर रहकर अपने पिता के संघर्षों को आगे बढ़ा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष पटेल हैं जो सत्ता के साथ कदमताल करते हुए राजनीतिक सुख भोग रहे हैं। मां-बेटी की सियासी जंग अब डॉक्टर पटेल की जयंती पर दिखाई देगी। जहां केंद्रीय मंत्री लखनऊ में अपने पिता की जयंती के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ समेत एनडीए के कई राजेनताओं के साथ हुंकार भरेंगी तो वहीं कृष्णा पटेल विपक्षी एकता के बल पर बनारस में बेटी को घेरेंगी। दोनों गुटों के नेता सोनेलाल पटेल का वारिस जनसैलाब दिखा कर हासिल करेंगे।

कौन हैं सोनेलाल पटेल

डॉक्टर सोने लाल पटेल का जन्म 2 जुलाई 1950 को कन्नौज के छिबरामऊ के बबूलहाई गांव में हुआ था। पिता गोविन्द प्रसाद पटेल व मां रानी देवी पटेल की संतानों में आठ भाइयों में डॉक्टर सोनेलाल पटेल सबसे छोटे थे। शिक्षा पूरी करने के बाद आपने सेना में सेंकेंड लेफ्टीनेंट के पद पर नौकरी ज्वाइन की, लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं लगा और नौकरी छोड़कर खुद का बिजनेस प्रारम्भ किया। डॉक्टर पटेल 1987 से लेकर 1996 तक अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1991से 1998 तक अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव दोनो पदों पर थे। 1998 से लेकर 2000 तक अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष की हैसियत से समाज की सेवा की।

बसपा ज्वाइन कर बनाया दल

1988 में डॉक्टर पटेल कांशीराम के संपर्क में आए और राजनीति में प्रवेश किया। 4 नवम्बर 1995 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में कुर्मी स्वाभिमान राजनैतिक चेतना रैली प्रस्तावित थी लेकिन कुर्मियों में बढ़ती राजनैतिक चेतनी की आहट से सरकार ने रैली की अनुमति ही नहीं दी। बाद में बारादरी के मैदान में रैली की गयी। इस रैली को प्रदेश के कुर्मी समाज की सबसे बड़ी राजनैतिक रैली कहा जाता है। इसी कुर्मी स्वाभिमान रैली में ‘अपना दल’ नामक राजनैतिक पार्टी के गठन की घोषणा की गई और डॉक्टर पटले को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। अपना दल के कानपुर जिला अध्यक्ष राजपूत कहते हैं कि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल अपने पिता के सिधांतों के बजाए संप्रदायिक ताकतों के साथ खड़ी हो गई। डॉक्टर पटेल पूरा जीवन भाजपा को हराने के लिए लगा दिया, आज अनुप्रिया उन्हीं की शरण में सत्ता का सुख उठा रही हैं।

इसलिए बेटी के खिलाफ हैं मां कृष्णा

राजपूत बताते हैं कि 1999 में डॉक्टर पटेल और उनके समर्थक पीडी टंडन पार्क इलाहाबाद में आयोजित नामांकन रैली में इकट्ठे हुए। समर्थकों की भारी भीड़ को देखकर तत्कालीन बीजेपी सरकार के ताकतवर सांसद मुरली मनोहर जोशी के इशारे पर डॉक्टर पटेल व उनके समर्थकों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था। एक राष्ट्रीय कद के नेता को इस लाठीचार्ज में इतना मारा गया कि उनके शरीर में जगह-जगह फ्रेक्टर हो गए। इतना ही नहीं इसके बाद डॉक्टर सोनेलाल पटेल को अन्य समर्थकों समेत घायल अवस्था में ही एक महीने के लिए जेल में डाल दिया गया। राजपूत बताते हैं कि बीजेपी सरकार की साजिश उस हमले में डॉक्टर पटेल को जान से मरवाने की थी लेकिन किसी तरह समर्थकों ने उनके ऊपर लेट कर उनकी जान बचाई। वहीं मामले पर जब कृष्णा पटेल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि हम अपने पति की जयंती मनाने के लिए बनारस में हैं। पति डॉक्टर पटेल संप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ते रहे पर घर के लोग आज उन्हीं के साथ खड़े हैं। कृष्णा पटेल कहती हैं कि जिस पार्टी ने उनके पति की जान लेने की कोशिश की, उसी के साथ बेटी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

शिवपाल भी हो सकते हैं शामिल

कृष्णा पटेल के कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व मंत्री शिवपाल को भी आंमत्रण पत्र भेजा गया है। अपना दल के नेताओं की मानें तो पूर्व मंत्री डॉक्टर पटेल की जयंती में शामिल हो सकते हैं। अपना दल के नेता राजीव पटेल बताते हैं कि डॉक्टर पटेल और शिवपाल यादव के बीच गहरी दोस्ती थी। शिवपाल उन्हें अपना बड़ा भाई मानते थे और कई कार्यक्रमों में वह डॉक्टर पटेल के साथ रहे। दोनों का नाता एक ही जिले से होने के चलते डॉक्टर पटेल का मुलायम परिवार से अच्छे संबंध थे। राजीव पटेल ने बताया कि जयंती के अवसर पर यूपी सरकार के मंत्री व सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को भी बुलाया गया है। इसके अलावा योगी सरकार के और भी मंत्री कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।