
कानपुर। रूपहले पर्दे पर शुक्रवार को राजकुमार गुप्ता के निर्देशन में रेड नाम की फिल्म प्रर्दशित हुई, जिसे देखकर दर्शकों के साथ आईटी विभाग के अफसर दंग रह गए। एक्टर अजय देवगन ने आईटी के इमानदार अफसर के रोल को बड़ी सादगी से निभाया और विभाग के काम करने के लिए तरीके को परदे के जरिए जनता तक पहुंचाया। फिल्म की कहानी 80 के दशक की एक सच्ची घटना बयां करती हैं। फिल्म में अजय देवगन एक ईमानदार, निडर आयकर अधिकारी अमय पटनायक का किरदार निभा रहे है जिसकी ईमानदारी के चलते महज सात साल के कार्यकाल में करीब 40 से ज्यादा बार ट्रांसफर होने के बावजूद वह अपने फर्ज को पूरी निडरता के साथ निभाते हैं। रेड की कहानी कुछ हद तक कानपुर में तैनात रहे दो आयकर विभाग के दो आयकर अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती है। तत्कालीन कमिश्नर एसपी पाडे और डिप्टी डायरेक्टर एके बटब्याल ने मुखबिर की सटीक सूचना पर 1980 में मूसानगर स्थित एक साहूकार के घर में रेड मारी थी। साहूकार गाठ, गिरवी का भी काम करता था। गाव में आयकर अधिकारियों पर हमला कर दिया गया था और कई अधिकारी घायल हो गए थे लेकिन टीम ने छापे की कार्रवाई को बिना रोके पूरा किया। टीम पर हमला करने वाले कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके किस्से आज भी आयकर विभाग के दफ्तर में सुने जा सकते हैं।
गुरू साहब ने करोड़ रूपए नकदी बरामद की
आयकर विभाग के कर्मचारी रेड फिल्म रिलीज के बाद मॉल व टॉकीजों में जाकर देखी। एक्टर अजय देवगन ने जिस तरह से आईटी विभाग के अफसर का किरदार निभाया उसे देख कर विभाग के अफसर और कर्मचारी गदगद हैं। आईटी के कर्मी रमेश अग्रवाल बताते हैं कि 1980 की दशक था। कानपुर में कमिश्नर एसपी पाडे और डिप्टी डायरेक्टर एके बटब्याल तैनात थे। दोनों अफसरों के पास पूरे जिले में पुलिस से ज्यादा मुखबिर थे। वह आर्यनगर अपने घर से रिक्शे पर सवार होकर जाते और मुखबिरों से मिल उन्हें काम का इनाम देते। अग्रवाल बताते हैं कि कानपुर में एक कारोबारी के घर पर दोनों अफसर टीम के साथ पहुंचे और रेड मारी। गुरू, कारोबारी के घर से पूरे एक करोड़ रूपए बरामद किए। साथ ही तीन दर्लन बिस्किट भी कारोबारी के पास मिले। अग्रवाल कहते हैं कि इतनी बड़ी राशि की बरामदी के बाद वह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। अधिकारियों की विभाग और शहर में जबरदस्त ख्याति थी। हमारी उस वक्त नई-नई पोस्टिंग हुई थी। उनके कार्यो का गुणगान आज भी हमलोग करते हैं।
चिल्लरों को लालटेन की रोशनी में गिना गया
एक करोड़ की नकदी को गिनने के लिए दोनों अधिकारियों ने आरबीआई के अधिकारियों को बुलाया था। अग्रवाल बताते हैं कि आरबीआई के अफसर व कर्मचारी तीन दिन तक नोटों को गिना था। उस वक्त एक रूपए से लेकर पचास और सौ के नोट थे। रात में बिजली चली जाने से लालटेन मंगवानी पड़ी थी। नोटों की गिनती तक आईटी के दोनों अफसर मौजूद रहे और खाना होटल से मंगवाया था। अग्रवाल बताते हैं उस छापे में शामिल सभी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश की कमान संभालने वाले कमिश्नर शारदा प्रसाद पाडे की ईमानदारी की मिसाल इससे भी दी जा सकती है कि वह रोज आर्यनगर स्थित आवास से सिविल लाइंस स्थित आफिस रिक्शे से आते थे। उन दिनों इनाम की कोई योजना नहीं हुआ करती थी, इसलिए टीम को अध्यक्ष की ओर से हस्ताक्षरित प्रशसा पत्र मिला था। इसके साथ ही सबकी सर्विस बुक में भी इसका उल्लेख किया गया। बाद में आइआरएस एके बटब्याल बोर्ड के सदस्य के रूप में सेवानिवृत्त हुए तो आइआरएस शारदा प्रसाद पाडे मुंबई में प्रथम आयकर जाच विंग के निदेशक के पद से रिटायर हुए।
नोटबंदी और जीएसटी के बाद काम बढ़ गया
आयकर विभाग के अफसरों की मानें तो नोटबंदी और जीएसटी के बाद काम बढ़ गया है। विभाग के अफसरों के साथ कर्मचारियों की बहुत ज्यादा कमी है। रेड के दौरान आयकर विभाग को कभी-कभी बिना पुलिस के जाना पड़ता है। आईटी के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग में आज भी इमानदार अधिकारियों की फौज है, जिसके चलते काले कारोबारी आएदिन धरे जा रहे हैं। हमारी पास मुखबिर तंत्र भी है, जो पुलिस से ज्यादा तेज है। तीन माह के दौरान आईटी विभाग ने बड़े-बड़े कारोबारियों और सरकारी बाबुओं को दबोचा है। अधिकारी की मानें तो कानपुर जोन बहुत बड़ा है और अनकम टैक्स की चोरी करने वालों पर कार्रवाई के लिए पार्याप्त कर्मचारी नहीं है। बावजूद हमलोग दिनरात काम कर सरकारी पैसे की चेरी करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते रहते हैं।
Published on:
19 Mar 2018 08:48 pm
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