
रेलमंत्री जी अजग-गजब की ट्रेन, बोगी में लाश करती रही सफर
कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन चलाए जाने की बात करते हैं और इसके लिए सुरेश प्रभु की जगह रेलवे की जिम्मेदारी पियूष गोयल को दी है। लेकिन उनके मंत्री बनने के बाद भी रेल बेपटरी हो रही है। गंदगी से लेकर ट्रेनों के लेटलतीफी के चलते मुसाफिर परेशान होने के साथ भोजन की गुणवत्ता पर सवल लग रहे हैं। साथ ही रेलवे विभाग के कर्मचारी कितने गैर जिम्मेदार हैं कि एक व्यापारी का शच एक व्यापारी की शव पिछले 72 घंटे से लगातार ट्रेन की बोगी में बने शौचायल पर सफर करता रहा। जीआरपी और रेलवे पुलिस के साथ अधिकारियों को कानों-कान खबर नहीं हुई। परिजनों की शिकायत पर जब रेलवे हरकत में आया तो कारोबारी का शव तीन दिन के बाद बरामद हुआ।
3 दिन तक नहीं लगा सुराग
आनंदपुरी निवासी 48 वर्षीय संजय अग्रवाल इन्वर्टर के होलसेल कारोबारी हैं। उनके पास माइक्रोटेक इन्वर्टर की एजेंसी है। परिजनों के मुताबिक कारोबार के सिलसिले में वह 24 मई की सुबह साढ़े छह बजे पटना-कोटा एक्सप्रेस से आगरा के लिए निकले थे। उन्होंने जनरल टिकट लिया, लेकिन जब परिजनों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उन्हें स्लीपर के एस-4 कोच में जगह मिल गई है। आखिरी बार परिजनों से सुबह 7.08 बजे बात हुई और इसके बाद मोबाइल नेटवर्क एरिया से बाहर हो गया। 9 बजे पत्नी ने फोन मिलाया और रिंग जाने के बाद भी बात नहीं हुई तो उन्हें चिंता हुई। परिजनों से जब उन्होंने इस बाबत बताया तो मथुरा में 40 मिनट तक गाड़ी रोककर उनकी तलाश कराई गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने इस मामले में जीआरपी कानपुर में गुमशुदगी दर्ज कराई।
72 घंटे तक टॉयलेट में पड़ा रहा शव
24 मई को संजय ट्रेन में बैठे थे और उनका शव 72 घंटे बाद रविवार सुबह सात बजे बरामद हुआ। शव तीन दिन तक स्लीपर कोच के टॉयलेट में घूमता रहा। गाड़ी कोटा ? तक गई और वहां से वापस पटना आई, लेकिन इस बीच न तो सफाईकर्मियों ने शौचालय को साफ करने की जहमत उठाई और न ही सुरक्षाबलों ने लंबे समय से बंद दरवाजे को खोल कर देखना उचित समझा। यात्रियों ने टॉयलेट बंद होने और बदबू आने की सूचना कई बार दी लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। रविवार की सुबह राजेंद्र नगर टर्मिनल यार्ड में खड़ी कोटा-पटना एक्सप्रेस की स्लीपर बोगी के टॉयलेट के अंदर बदबू आने की जानकारी मिली तो रेलवे पुलिस हरकत में आई। टॉसलेट का दरवाजा खोलने पर कारोबारी का शव बरामद किया।
परिजन शव लेकर पहुंचे कानपुर
मौत की जानकारी मिलते ही उनके परिजन राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुंचे। जहां पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव उन्हें सौंप दिया। लाश सड़ चुकी थी। मृतक के बेटे वात्सल्य ने बताया कि पापा इंवर्टर का व्यापार करते थे। वह आगरा में पारिवारिक मंदिर में दर्शन के लिए गए थे। 24 मई की सुबह मैं पापा को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर छोड़ने गया। उन्हें एसी में जगह नहीं मिली तो वह पटना-कोटा एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में बैठे गए। वात्सल्य ने बताया कि मम्मी सुबह साढ़े आठ बजे अंतिम बार पापा से बात की और बताया कि वह फफूंद स्टेशन पार कर रहे हैं। काफी गर्मी है इससे उन्हें बेचैनी हो रही है। इसके बाद फिर पापा से संकर्प नहीं हो सका। हमने जीआरपी ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया और रविवार को हमें पापा की मौत की खबर मिली।
हार्ट अटैक के चलते हुई मौत
जीआरपी इंस्पेक्टर ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम हो गया है। जिसमें मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। परिजनों की तरफ से तहरीर नहीं मिली। वहीं मृतका की पत्नी ने बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ्य थे। उन्हें इससे पहले कभी हार्ट की समस्या नहीं आई। हम पुलिस को तहरीर देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग करेंगे। वहीं मृतक के बेटे ने बताया कि पापा को साजिश के तहत मौत के घाट उतारा गया है। ट्रेन के अंदर टॉसलेट में तीन दिन तक शव पड़ा रहा और कोई मुसाफिर या रेलवे का कर्मचारी सफाई करने तक नहीं आया। यह बात गले नहीं उतर रही।
Published on:
28 May 2018 07:21 pm
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