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अफसर पत्नी की मेहरबानी से पति मालामाल, धोखाधड़ी के जरिए बैंक को लगाई लाखों की चपत

ब्रान्च मैनेजर रीता श्रीवास्तव ने बिना किसी कागजी कार्रवाई के अपने पति को 30 लाख का ऋण मुहैया कराया

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ब्रान्च मैनेजर रीता श्रीवास्तव ने बिना किसी कागजी कार्रवाई के अपने पति को 30 लाख का ऋण मुहैया कराया

कानपुर। शहर के जाने-माने उद्योगपति विक्रम कोठारी ने अपने रसूख के दम पर सात बैंकों से फर्जी दस्तावेज के जरिए 37 अरब का लोन लिया और पूरी रकम हड़क कर ली। हाई-प्रोफाइल केस के बाद बैंक के अफसरों की आंखें खुली तो अब हरदिन नए-नए धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। शरादा नगर स्थित यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक में अपनी तैनाती के दौक्रान ब्रान्च मैनेजर रीता श्रीवास्तव ने बिना किसी कागजी कार्रवाई के अपने पति को 30 लाख का ऋण मुहैया कराया। पत्नी की मेहरबानी से पति मालामाल हो गया और पूरा पैसा हॉस्पिटल में लगा दिया। बैंक ने कईबार नोटिस दिया लेकिन उसने कर्जा वापस नहीं किया। भारतीय रिजर्व बैंक के पर्यवेक्षणीय निर्देशों के कार्यरत यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक ने गबन करने वाली शाखा प्रबंधक रीता श्रीवास्तव को बखास्त कर दिया।
बिना दस्तावेज के ऋण मुहैया
रोटोमैक पेन के मालिक ने बैंक अफसरों की मिलीभगत से करीब 37 अरब का लोन कंपनी के नाम पास कराया। पैसा मिलते ही सारी रकम डकार गए। सीबीआई ने जांच करने के बाद धोखाधड़ी करने वाले कोठारी और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर बैंक अफसरों पर कार्रवाई के लिए जुटी है। कोठारी के कारनामें की पोल सामने आने के बाद बैंक के अलाधिकारियों ने अन्य कर्ज पर जांच शुरू की तो हरदिन नए-नए राज बाहर आ रहे हैं। शारदा नगर स्थित यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक है। यहां पर 2000 से वर्ष 2009 तक शाखा प्रबंधक के रूप में रीता श्रीवास्तव तैनात रहीं। इस दौरान खाख प्रबंधक ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने पति को बिना दस्तावेज के ऋण मुहैया करा दिया। पति ने बैंक के पैसे से एक प्राईवेट हॉस्पिटल का निर्माण कराया। बैंक ने ऋण वसूलने के लिए बैंक की तरफ से रीता श्रीवास्तव के पति को नोटिस दी गई, पर ऋण वसूलेनहीं जा सके और एनपीए हो गए।
गलत तरीके से दिया था लोन
बैंक के अलाधिरियों ने जांच में पाया कि मैनेजर ने अपने पति को तीस लाख रुपये का लोन दिया था, वह भी गलत तरीके से। इसी दौरान जांच में दस लाख रुपये के गबन की भी जानकारी मिली। इसे लेकर बैंक ने रीता श्रीवास्तव को चार्जशीट दी थी। इसके बाद बर्खास्तगी का नोटिस दिया था लेकिन, कोई जवाब नहीं दिया गया। बैंक के सचिव ने बताया कि गबन के मामले में रीता श्रीवास्तव कोर्ट में गई जहां 8.52 लाख रुपये की धनराशि बैंक के पक्ष में जमा कराई गई वहीं बैंक ने उनकी ग्रेयुटी और पीएफ भी आहरित कर लिया है जो करीब दस लाख रुपये है। अभी करीब 22 लाख रुपये की रिकवरी की जानी बाकी है। सविच ने बताया कि शाखा प्रबंधक कह बर्खास्ती के बाद उनके खिलाफ एफआईआर भी जल्द दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए आरबीआई सहित बैंक के बड़े अफसरों को जानकारी दे दी गई है।
9 साल तक एक ही जगह रही श्रीवास्तव
रीता श्रीवास्तव की पोस्टिंग 2000 में शरादा नगर स्थित यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक में बतौर मैनेजर के रूप में हुई थी। 2000 से लेकर 2009 तक रीता श्रीवास्तच ने पद पर रहते हुए गलत तरीके से अपने पति को फाएदा पहुंचाया। बैंक के अधिकारियों ने बताया कि रीता श्रीवास्तव की ट्रांन्सफर होने के बाद जब यहां नए मैनेजर से चार्ज संभाला तो बकाएदारों की लिस्ट खंगाली। जिसमें पूर्व मैनेजर रीता श्रीवास्तव की करतूत उजागर उई। मैनेजर ने मामले की जानकारी अपने अधिकारियों को दी। इसी के बाद रीता श्रीवास्तव पर जांच बैठा दी गई। जांच में पाया गया कि उन्होंने गैर कानूनी तरीके से अपने पति को लोन दिया। बदले में कोई दस्तावेज नहीं लिए। सचिव यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक, वीरेश श्रीवास्तव ने कहा कि मैनेजर रीता श्रीवास्तव ने अपने पति को गलत तरीके से लोन दिया और गबन भी किया था। इसी के बाद रीता श्रीवास्तव को नौकरी से बर्खास्त करने के बाद बैंक ने उनकी ग्रेयुटी और पीएफ भी आहरित कर लिया है जो करीब दस लाख रुपये है।