कानपुर देहात-पौराणिक इतिहास में वर्णित कपिलेश्वर धाम शिव मंदिर भक्तों में अपना विशेष स्थान बनाए हुए। जहां प्रत्येक सोमवार को भक्तों का अपार जनसमूह देखने को मिलता है। दरअसल कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के उत्तर पूरब दिशा में कस्बे से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खेड़ाकुर्सी गांव में प्राचीन खेड़े पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे कपिलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता हैं। इस मंदिर के विषय में श्रीमदभागवत पुराण में ऐसा वर्णन है कि यह शिवलिंग स्वयभुव मनु एवं शतरूपा के 2 पुत्र व 3 पुत्रियां थी। प्रियवत्व उत्तानपाद नामक दो पुत्र थे एवं आकूति, देवहूति, प्रसूति नामक तीन पुत्रियां थी।
देवहूति का विवाह परम तपस्वी मुनि कर्दम के साथ हुआ, जिन्हें भगवान के पंचम अवतार श्री कपिल देव जी का प्राकट्य हुआ। एक बार उन्होंने भगवान शंकर जी की आराधना की, जिससे भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए। उन्ही कपिल देव के द्वारा यह शिवलिंग आज भी कपिलेश्वर के नाम से जाना जाता है। यहां की एक विशेषता है कि आसपास के नाग देवता मंदिर में दर्शन करने आते हैं एवं प्रांगण में आकर एक दूसरे से लिपटकर नृत्य करते है। ऐसा ही कुुुछ स्थानीय लोगो रामअवतार शुक्ल व शांति देवी ने बताया। लोगो के मुताबिक यह मंदिर 6वीं शताब्दी का है। ऐसा बताते हैं कि इसे गौर ठाकुरों ने बनवाया था।
यहां हर साल ग्रामीणों के सहयोग से शिवरात्रि के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। शिवरात्रि में विशाल मेला लगता है, सावन मास में भागवत कथा होती है। मंदिर के कथावाचक पं0 राजकुमार ने बताया कि इस शिव मंदिर की विशेषता है कि यहां पर मांगी गई मन्नत हमेशा पूरी होती हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग का कोई अंत नहीं है। यह स्वयं स्थापित हुआ है। काफी गहराई तक शिवलिंग है, जिसके अंत तक कोई नहीं पहुंच सका। वही मंदिर के सेवक गुड्डन तिवारी बाबा ने बताया कि आज भी मंदिर के आस-पास बड़े-बड़े रंग-बिरंगे अजगर व काले सर्प देखने को मिलते हैं। भक्तों में अपार आस्था यहां देखने को मिलती है। सावन के प्रत्येक सोमवार को भक्तों का अपार जनसमूह जलाभिषेक करने को उमड़ता है।