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बिकरूकांडः आठ पुलिसकर्मियों की मौत के बाद भी नहीं सुधरी पुलिस, विकास दुबे की मिली कार में कर दिया ‘खेल’

UP News: कानपुर बिकरूकांड में आठ पुलिस कर्मियों के मौत के बाद भी पुलिस में सुधार नहीं हुआ। विकास के गाड़ी मिलने की जांच में खेल कर दिया।

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UP Police not improved after death of 8 policemen in Bikrukand game with Vikas Dubey’s car

UP Police not improved after death of 8 policemen in Bikrukand game with Vikas Dubey’s car

कानपुर बिकरू कांड के दो साल बाद चौबेपुर पुलिस ने सहज्योरा गांव में एक खाली प्लॉट से कुख्यात विकास दुबे की एक स्कॉर्पियो कार एक माह पहले बरामद की थी। चौबेपुर इंस्पेक्टर ने इस मामले में खेल कर दिया। कार बरामदगी के बाद इंस्पेक्टर एक माह यह नहीं तलाश कर सके कि कार जिसके पास थी उसके और विकास दुबे के बीच क्या संबंध थे। इतना ही नहीं इंस्पेक्टर ने वाहन की वैल्यूएशन रिपोर्ट इतनी कम लगाई कि एसपी भी आश्चर्य में पड़ गए। इस मामले में एसपी कानपुर आउटर ने इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। जांच एडिश्नल एसपी कानपुर आउटर को सौंपी गई है।

30 जून 2022 को सहज्योरा गांव चौबेपुर में संजीव बाजपेई के खाली प्लॉट पर विकास दुबे के नाम से एक स्कॉर्पियो कार नम्बर यूपी 78 डीडी 2220 बरामद की थी। दो साल बाद वाहन बरामद होने पर एसपी समेत अन्य अधिकारियों ने इसकी ठीक से छानबीन कर गैंगस्टर एक्ट के मुकदमें में इसे भी सम्पत्ति के तौर पर शामिल करने के निर्देश दिए थे। चौबेपुर पुलिस ने मामले में जांच शुरू की मगर एक माह में चौबेपुर इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय यह पता नहीं लगा सके कि संजीव बाजपेई और विकास दुबे के बीच क्या संबंध थे और विकास दुबे ने अपनी कार उसे क्यो दी थी। तेज स्वरूप सिंह एसपी कानपुर आउटर का कहना है कि इस मामले में लापरवाही बरती गई है। इंस्पेक्टर ने मामले में ठीक से जांच नहीं की है। एडिश्नल एसपी को इंस्पेक्टर की जांच सौंपी गई है। जो भी रिपोर्ट आएगी उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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इंस्पेक्टर ने एसपी को समझाई कहानी

दो दिन पूर्व एसपी कानपुर आउटर तेज स्वरूप सिंह ने जब इंस्पेक्टर से जांच की प्रगति पूछी तो इंस्पेक्टर ने बताया कि संजीव बाजपेई से पूछताछ में उसने कहा कि उसका और विकास दुबे से कार खरीदी थी। जिसे वह ट्रांसफर नहीं करा पाया था। इस पर एसपी ने पूछा कि अगर कार खरीदी थी तो ट्रांसफर क्यों नहीं कराई। इस सवाल का जवाब इंस्पेक्टर के पास कोई जवाब नहीं था।

इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच

65 हजार गाड़ी की वैल्यूएशन इतना ही नहीं जब एसपी कानपुर आउटर ने फाइल देखी तो उसमें इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर गाड़ी की वैलुएशन 65 हजार रुपए लिखी थी। इसपर एसपी ने फाइल वापस कर दी। जबकि जो गाड़ी बरामद हुई थी वह 11 अक्तूबर 2013 को खरीदी गई थी। उस लिहाज से भी बाजारी मूल्य एक लाख रुपए से ज्यादा का है। इस मामले को एसपी कानपुर आउटर ने गम्भीरता से लिया है। उन्होंने इंस्पेक्टर चौबेपुर कृष्ण मोहन राय के खिलाफ एडिशनल एसपी कानपुर आउटर आदित्य कुमार शुक्ला को जांच सौंप दी है।

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