
बिकरू कांड: घटना की रात विकास दुबे सहित उसके साथियों को छिपे पुलिस कर्मियों की ऐसे मिली जानकारी
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर-बहुचर्चित बिकरू कांड में मनु को लेकर पुलिस पर कई सवालिया निशान लग रहे हैं। पुलिस द्वारा चार्जशीट में मनु के बारे में दर्ज तथ्यों के मुताबिक पुलिस का दोहरा खेल दिख रहा है। पुलिस ने मनु पांडेय उर्फ वर्षा को न तो सीधा आरोपी बनाया और न ही उसे क्लीन चिट दी। साथ ही जो तथ्य दिए भी हैं, उससे क्लीन चिट देना भी संभव नहीं है। बिकरू कांड में मनु पांडेय ने बदमाशों का सहयोग किया था। पुलिस को इसके पुख्ता सबूत मिले हैं, लेकिन इनकी पुष्टि बाकी है। मनु का आरोपी बनना लगभग तय हो गया है। बिकरू गांव में घटना की रात गांव में ही रहने वाली मनु के घर पर डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा को मारा गया था। इसके अतिरिक्त घर की चौखट पर 3 अन्य पुलिस कर्मियों की हत्या भी की गई थी। घटना के बाद मनु के कई फोन कॉल रिकॉर्डिंग ऑडियो वायरल हुए थे। जिसमें मनु के साजिश में शामिल होने का खुलासा हुआ था। लेकिन पुलिस ने उसको आरोपी नहीं बनाया।
पुलिस पर उठे सवाल
पुलिस की चार्जशीट में लिखा है कि मनु के खिलाफ मिलने वाले साक्ष्यों से उसके घटना में शामिल होने को साबित करता है। हालांकि विवेचना चल रही है। मिले साक्ष्यों की पुष्टि की जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि जुलाई में हुई घटना को तीन माह गुजर चुके हैं। फिर भी पुलिस का कहना है कि मनु के खिलाफ साक्ष्य तो हैं, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है। तीन माह के दौरान आखिर क्या वजह है कि पुलिस मिले साक्ष्यों की पुष्टि नहीं कर सकी। पुलिस इस मामले चार महिलाओं को भी जेल भेज चुकी है।
अधिवक्ता शिवाकांत के मुताबिक
चार्जशीट में पुलिस ने बताया कि घटना के समय पुलिसकर्मी जब बचने के लिए इधर उधर भागकर किसी तरह छिप गए थे। तो इन महिलाओं ने उनके छिपे होने की सूचना फोन के जरिए बदमाशों को दी थी। जिसके बाद बदमाशों ने वहां पहुंचकर छिपे पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित के मुताबिक पुलिस द्वारा मनु को लेकर जिन तथ्यों का जिक्र किया गया है, उससे पुलिस उसे गवाह नहीं बना सकी है। मनु के खिलाफ साक्ष्य हैं। सवाल है कि अभी तक पुलिस आखिर साक्ष्यों की पुष्टि क्यों नहीं कर सकी। पुलिस की विवेचना में खामियां हैं।
Published on:
07 Oct 2020 05:05 pm
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