
Vikas Dubey Encounter: जांच के लिए गठित आयोग के पुनर्गठन की मांग सुप्रीम कोर्ट में खारिज
कानपुर. विकास दुबे मुठभेड़ (Vikas Dubey Encounter) में और आठ पुलिसकर्मियों के नरसंहार की जांच के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायधीश न्यामूर्ति बी एस चौहान की अध्यक्षता में जांच कर रही तीन सदस्यीय टीम के गठन पर सवाल उठाने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की तीन सदस्यीय पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानुपर में हुई मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं। पीठ ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश डॉ. बलबीर सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक के एल गुप्ता और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश शशिकांत अग्रवाल की सदस्यता वाले जांच आयोग के पुनर्गठन के लिए उपाध्याय की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
इस जांच आयोग को कानपुर के चौबेपुर थाने के अंतर्गत बिकरू गांव में तीन जुलाई को आधी रात के बाद विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मियों के मारे जाने की घटना की जांच करनी है। इसके अलावा आयोग को 10 जुलाई को विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत की घटना और इससे पहले अलग अलग मुठभेड़ में दुबे के पांच साथियों के मारे जाने की घटना की जांच करनी है।
जय बाजपेयी पर शिकंजा
विकास दुबे के करीबी जय वाजपेयी पर पुलिस ने शिकंजा कसा है। उन पर विकास को असलहा और कारतूस सप्लाई करने का आरोप है। इसके साथ ही जय बाजपेयी के तीन भाइयों पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस ने आपराधिक इतिहास खंगालने के बाद जय बाजपेयी के तीनों भाइयों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए तीनों फरार चल रहे हैं। बता दें कि, जय बाजपेयी विकास दुबे का खजांची था। विकास के फरार होने में भी जय ने मदद की थी।
वर्तमान में जय बाजपेयी पुलिस की गिरफ्त में है। जय बाजपेई की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके तीन भाई शोभित, रजय और अजय कांत बाजपेई के आपराधिक इतिहास को खंगाला गया तो कई मामलों में वांछित मिले। इसके बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए गए। जिसके बाद से नजीराबाद पुलिस जय बाजपेई के भाइयों की तलाश में ब्रह्मनगर, बजरिया व हर्षनगर स्थित तीनों मकानों के अलावा करीबियों के यहां दबिश दे रही थी।
एक लाख के वांछित ने किया सरेंडर
कानपुर शूटआउट के वांछित अपराधी धर्मेंद्र दुबे ने स्पेशल जज दस्यु प्रभावित न्यायालय में सरेंडर कर दिया है। उस पर एक लाख का इनाम घोषित था। लेकिन उसके सरेंडर की भनक न तो पुलिस को चली और न ही यूपी एसटीएफ को। पता लगने पर पुलिस ने न्यायलय परिसर पहुंचकर हंगामा किया। अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच इस बात पर काफी नोकझोंक हुई। जज ने धर्मेंद्र उर्फ धीरू को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
Published on:
19 Aug 2020 05:30 pm
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